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नुकसान:बादल अब तो बरस जाओ- बेतवा की दिखी तलहटी, धान की फसल भी होने लगी खराब

रायसेन2 महीने पहले
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जून के महीने में शुरुआती दिनों में अच्छी बारिश होने से किसानों ने तेजी से बोवनी की और धान का रोपा भी लगा दिया। इसके बाद फिर बारिश का लंबा अंतराल हो गया। इससे किसान भी परेशान हो गए। हालत ये हो गई कि पूरी जुलाई में छुट-पुट बारिश छोड़कर अच्छी बारिश ही नहीं हुई। यही बात परेशानी का कारण बन गई। पानी की कमी से नदियों की तलहटी दिखने लगी तो कहीं-कहीं धान की फसल भी खराब होने लगी है। इतना ही नहीं अच्छी बारिश के इंतजार में बैठे किसान कई जगह धान ही नहीं लगा पाए हैं। इससे जिले में करीब 1 लाख हेक्टेयर रकबा खाली रह गया है।

बेतवा नदी की दिखने लगी तलहटी
मानसून के शुरुआती दिनों में हुई बारिश से बेतवा में हल्का उफान आ गया था। लेकिन बीते एक महीने से अच्छी बारिश न होने और फसलों की सिंचाई के लिए पानी लेने से अब बेतवा नदी की तलहटी दिखाई देने लगी है। इससे ही बारिश की कमी का अंदाजा लगाया जा सकता है।

खराब होने लगी धान जिले में इस बार 392 हजार हेक्टेयर रकबे में खरीफ की बोवनी का लक्ष्य रखा है। इसमें से 3 लाख हेक्टेयर रकबे में ही बोवनी हो पाई है। इसमें से करीब 145 हजार हेक्टेयर रकबे में धान और 91 हजार हेक्टेयर रकबे में सोयाबीन की बोवनी की जा चुकी हैं। लेकिन बारिश की कमी से ये फसलें खराब होने की स्थिति में आ गई हैं।

स्थिति: एक लाख हेक्टेयर रकबा पड़ा है खाली
जिले मे बारिश की कमी से लगाई हुई धान और सोयाबीन की फसल को बचाना मुश्किल हो रहा है। ये देखते हुए धान लगाने की गति कम हो गई। इससे जिले में करीब 1 लाख हेक्टेयर रकबा खाली पड़ा है। जिसमें किसानों ने बोवनी भी नही की और धान भी नहीं लगाई। जबकि धान के लिए उचित समय जुलाई तक ही माना जाता है। लेकिन जिले में इस बार जुलाई में बारिश न होने से खेतों के गड़े सूखे हैं, जिससे किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीर है। किसान आसमान की ओर आस लगाए बैठे हैं कि जल्द बारिश हो।

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