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पढ़ाई की चिंता:अब घर में बजेगी घंटी, परिजनों की देखरेख में पढ़ेंगे बच्चे

रायसेन2 महीने पहले
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  • अपना घर-अपना विद्यालय अभियान होगा शुरू, 15 जुलाई से पहले बच्चों को मिलेंगी किताबें

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर का असर कम होने के बाद अब जहां बाजार अनलॉक हो गए तो वहीं बच्चों की पढ़ाई को शुरू कराने के लिए कवायद शुरू हो गई है। हालांकि, अभी स्कूल तो नहीं खोले जा रहे हैं, परंतु घर पर ही बच्चों की पढ़ाई करवाने के लिए अपना घर-अपना विद्यालय प्रारंभ हो रहा है, जिसमें स्कूल के स्थान पर निर्धारित समय पर पालक घंटी बजाएंगे और उनकी देखरेख में बच्चे पढ़ाई करेंगे।

जिले भर के 2650 प्राथमिक और मिडिल स्कूल के करीब एक लाख 18 हजार बच्चों को 15 जुलाई से पहले किताबें और अभ्यास पुस्तिका बांटने की तैयारी की जा रही है, ताकि इस अभ्यास पुस्तिका के आधार पर बच्चों की पढ़ाई शुरु कराई जा सकें। इसकी खासियत यह है कि प्राइमरी तक के बच्चों में शैक्षणिक समझ विकसित करने के लिए इसे कलर्ड में प्रिंट किया जाएगा तो वहीं मिडिल की कक्षाओं के लिए ये ब्लैक एंड व्हाइट रहेगी।

{बच्चों की पढ़ाई के लिए बनाए सोशल मीडिया पर ग्रुप : छोटे बच्चों में भावनात्मक विकास और शैक्षणिक समझ विकसित करने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आओ सीखें कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है। 15 जुलाई तक सोशल मीडिया के ग्रुप के माध्यम से बच्चों को पढ़ाया जाएगा। इसमें विभिन्न छोटे ऑडियो और वीडियो भेजे जाएंगे।

प्रत्येक गतिविधि के लिए एक क्यूआर कोड है। क्यूआर कोड को बच्चे अपने मोबाइल पर क्लिक करेंगे तो उस गतिविधि को कराने के जो ऑडियो ओर वीडियो हैं, वे मोबाइल पर दिखाई देने लगेंगे। इससे बच्चे आसानी से सीख सकेंगे।

48 पेज की होगी अभ्यास पुस्तिका
डीपीसी सीबी तिवारी ने बताया कि प्रयास अभ्यास पुस्तिका 48 पेज की रहेगी। इसमें दो पेज पर एक गतिविधि के बारे में बताया गया है। एक महीने की गतिविधि दी जा रही है। 16 जुलाई से 15 अगस्त तक विद्यार्थियों के लिए यह अभ्यास पुस्तिका प्रदान की जाएगी।

इस 48 पेज की सामग्री को जिले स्तर पर कक्षा 1 व 2 और कक्षा 3 से 5 के लिए बहुरंगी तथा कक्षा 6 से 8 के लिए ब्लैक एंड व्हाइट प्रिंट में मुद्रित कराकर बच्चों को उनके घर पर कार्य करने के लिए 15 जुलाई के पूर्व उपलब्ध कराना होगा।
ऑनलाइन चलेंगी कक्षाएं
जिले भर के सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में शिक्षकों और कर्मचारियों को नए शिक्षा सत्र में स्कूल पहुंचना होगा। साथ ही शिक्षकों को बच्चों की ऑनलाइन तरीके से क्लास लेना होगी। ऑनलाइन क्लासें शुरू होने से बच्चों को पढ़ाई लिखाई में काफी मदद होगी।

बच्चे घर पर हैं और ऑनलाइन पढ़ाई बंद होने के कारण अध्यापन कार्य प्रभावित हो रहा है। बता दें कि जिले में एलकेजी, यूकेजी से लेकर कक्षा आठवीं तक के हजारों छात्र छात्राएं ऐसे हैं जिन्होंने एक साल से स्कूल नहीं देखा है।

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