रायसेन में अनोखी परंपरा:मोर पंखों की ढालों की पूजा कर निकाला जुलूस, जिले में दो जगह लगा मडई मेला

रायसेन22 दिन पहले
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रायसेन जिले में हर साल भाईदूज के अवसर पर देवरी और बरेली में मडई मेला आयोजित किया जाता है। इस दौरान मौर पंखों की ढालों को लेकर अलग-अलग गांव से लोग मेला में आते हैं। जहां लोग पूजन कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। कुशवाहा, मांझी समाज, आदिवासी, अहिरवार समाज ने मोर के पंखों की ढालों के साथ नाचते-गाते संगीत के साथ बैंडबाजा के साथ जुलूस निकालकर मड़ई मेला में पहुंचे।

मेले में मोर पंख से बनी ढालों को मिलाते लोग।
मेले में मोर पंख से बनी ढालों को मिलाते लोग।

जहां पर गंगो माई दरबार की परिक्रमा लगा कर ढालो को एक-दूसरे के मिलाते हैं, जिससे कि भाईचारा एवं खुशहाली बनी रहे। रमेश कहार, गोटीराम अहिरवार ने बताया कि जो तांत्रिक विद्या एवं पंडा होते हैं उनके घर में डाल बनाई जाती है। प्रत्येक ढाल लगभग 20 फीट लंबी होती है, जिसमें 2000 तक मोर पंख लगाए जाते हैं। प्रत्येक धार का खर्च लगभग 10 से 15 हजार का आता है। बाद में लोगों ने मेले में मिट्टी से बने खिलौने, मिठाई, सिंघाड़े एवं गन्ने का लुत्फ उठाया और बच्चों ने झूला-झुलकर मेला का आनंद लिया।

वहीं बरेली में भी अमावस्या की दूज के दिन पशु बाजार में मडई मेला का आयोजन किया जाता है। इसमें हजारों श्रद्धालु ने पहुंचकर माता चंडी की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की और मेले का लुफ्त उठाया।

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