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समृद्धि की रंगत:गेहूं की अधपकी-पकी फसल ने भरे कुदरत के रंग

रायसेनएक महीने पहले
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एक ओर जहां रंगों के त्याेहार होली को लेकर लोग उत्साह, उमंग और आनंद से भरे हुए हैं। वहीं दूसरी ओर प्रकृति ने भी खेत, जंगल सभी जगह प्राकृतिक रंगों की छंटा बिखेर दी है। कहीं टेसू और सेमर के पेड़ चटख सिंदूरी रंग के फूलोें से लदे हुए हैं तो दूसरी ओर खेतों में लगी फसलों में भी समृद्धि के अलग-अलग रंग देखने को मिल रहीे हैं। जिन खेतों में गेहूं की फसलें पक चुकी हैं, वहां के खेत सुनहरे और जहां गेहूं की फसल अभी पकी नहीं है, वहां के खेत हर-भरे नजर आ रहे हैं। इस तरह से जिले की समृद्धि फसलों पर ही निर्भर है।
गेहूं का उत्पदान- करीब 1 करोड़ 15 लाख, 60 हजार क्विंटल : जिले में इस बार 2 लाख 89 हजार हेक्टेयर रकबे में गेहूं की फसल बोई गई है। करीब 60 फीसदी गेहूंं की कटाई हो चुकी है। एक हेक्टेयर रकबे में औसतन 40 क्विंटल गेहूं का उत्पादन होता है। इस हिसाब से जिले में इस बार 1 करोड़ 15 लाख 60 हजार क्विंटल गेहूं का उत्पादन होगा। इससे किसानों सहित जिले में समृद्धि आएगी ।

चने का उत्पादन- करीब 23 लाख क्विंटल
जिले में 1.15 लाख हेक्टेयर रकबे में चने की फसल बोई थी। कृषि के जानकारों के मुताबिक चने की उपज प्रति हेक्टेयर 20 क्विंटल मानी जाती है। जिले में 23 लाख क्विंटल चने का उत्पादन होगा।

धान का औसतन उत्पादन 70 लाख क्विंटल, मंडी में नहीं रुक रही आवक

इस बार 1 लाख 75 हजार हेक्टेयर रकबे में धान की फसल लगाई गई थी। कृषि के जानकारों के मुताबिक एक हेक्टेयर रकबे में धान का औसत उत्पादन 40 क्विंटल माना जाता है, इसलिए जिले में इस बार करीब 70 लाख क्विंटल धान का उत्पादन हुआ है। पूरे साल से किसान मंडी में धान बेचने के लिए आ रहे हैं ।

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