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डेंगू का दंश:63 दिन में 169 डेंगू पॉजिटिव; इनमें 7 माह से 17‎ साल तक के 66 मरीज, ऐसे हालात पहली बार‎

राजगढ़‎एक महीने पहले
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छापीहेड़ा के नगर परिषद दफ्तर के पास जमा पानी में तैर रहे मच्छर और लार्वा।‎ - Dainik Bhaskar
छापीहेड़ा के नगर परिषद दफ्तर के पास जमा पानी में तैर रहे मच्छर और लार्वा।‎
  • 30 सैंपल की जांच में 10 नए मरीज मिले, इनमें सारंगपुर व ब्यावरा के 2-2 बच्चे शामिल‎

डेंगू पर प्रहार अभियान चलाने के‎ बाद भी जिले में 3 सितंबर के बाद‎ से अब तक 63 दिनाें में ही 169‎ रोगियों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है।‎ इनमें 7 माह से 17 साल तक के‎ 66 बच्चे, 98 युवा और 5 बुजुर्ग‎ शामिल हैं।

जिला अस्पताल में‎ जांच के दौरान 146 मरीजों में‎ रोगियों की पहचान हुई। इनके‎ अलावा 23 मरीजों की सूचना‎ अन्य अस्पतालों से मिली। जिले के‎ मरीज यहां इलाज कराने गए और‎ उनमें डेंगू की पुष्टि हुई। शुक्रवार‎ को 30 सैंपल की जांच की गई,‎ इनमें 4 मरीज सारंगपुर व 3-3‎ मरीज क्रमश: राजगढ़-ब्यावरा के‎ हैं। इनमें सारंगपुर में 8 व 15 साल‎ के 2 बच्चे व ब्यावरा के 12 व 10‎ साल के 2 बच्चे शामिल हैं।‎

लगातार बढ़ रहे मरीजों को‎ लेकर विशेषज्ञ हैरानी जता रहे हैं।‎ जिला अस्पताल के एमडी मेडिसिन‎ डॉ सुधीर कलावत बताते हैं कि‎ बच्चों और बड़ों में डेंगू का इतनी‎ तेजी से फैलाव सेवाकाल में पहली‎ बार देख रहे हैं।वे कहते हैं कि हर‎ दूसरे मरीज के प्लेटलेट्स तेजी से‎ कम हो रहे हैं। हालाकि 20, 22‎ और 24 हजार प्लेटलेट्स वाले‎ मरीजों में ब्लीडिंग जैसे‎ कांप्लीकेशन नहीं मिल रही हैं।‎

ग्राउंड रिपोर्ट : जहां मरीज मिले, वहीं लापरवाही, फॉगिंग और स्प्रे से परहेज‎

छापीहेड़ा : नगर के वार्ड 9 से 13,‎ कंजर बस्ती, पचोर-सोयत स्टेट‎ हाईवे परनगर परिषद के नए दफ्तर‎ के पास, रामपुरिया नाला, छापी‎ नाले में महीनों से पानी ठहरा है।‎ बड़ी संख्या में मच्छर पानी में तैरते‎ नजर आ रहे हैं। परिषद ने‎ जलजमाव का निपटान तो दूर,‎ कीटनाशक का छिड़काव भी नहीं‎ किया है।‎

मगराना : पड़ाना के पास इस गांव में‎ सितंबर माह में 48 वर्षीय युवक‎ की मौत भोपाल में हुई थी। यहां‎ आशा कार्यकर्ता से फीवर सर्विलेंस‎ कराया। करीब 40 दिन बीतने के‎ बाद भी यहां कीटनाशक स्प्रे नहीं‎ कराया है। ग्रामीणों को नहीं पता‎ फॉगिंग क्या होता है, क्योंकि इस‎ तरह की कार्रवाई अब तक नहीं की‎ गई।‎

राजगढ़ : सितंबर माह में ही राजगढ़‎ के शिक्षक कॉलोनी की एक महिला‎ की भोपाल में मौत हुई थी। पुरा,‎ कालाखेत में सबसे ज्यादा मरीज‎ हैं। अकेले राजगढ़ शहर में अब‎ 55 मरीज हैं। कालाखेत में सड़कों‎ पर पानी ठहरा हुआ है। फॉगिंग अब‎ नजर नहीं आ रही। कीटनाशक स्प्रे‎ भी नहीं किया है।‎

विशेषज्ञों का तर्क‎
अनदेखी व नासमझी‎ से बच्चे हो रहे पीड़ित‎

अनदेखी : एमडी मेडिसिन डॉ‎ योगेश दांगी बताते हैं कि दिन‎ के समय में बच्चे हर कहीं‎ खेलते रहते हैं। अभिभावक‎ अक्सर इन पर ध्यान नहीं देते‎ और मच्छर काटते रहते हैं।‎

नासमझी : जिला महामारी‎ नियंत्रक डॉ महेंद्रपाल सिंह‎ के अनुसार सुबह जल्दी‎ जागने के बाद बच्चे खेलने‎ में व्यस्त हो जाते हैं। बच्चों‎ में मच्छरों से बचाव की‎ समझ नहीं रहती है। इससे‎ इनमें मर्ज बढ़ रहा है।‎

डेंगू के दौर में घातक हो‎ सकती है ये 3 लापरवाही‎

1-जलजमाव : रिहायसी क्षेत्रों में‎ सफाई, जल जमाव का निपटान‎ नहीं होने से मच्छर व लार्वा पनप‎ रहा है। डेंगू पर प्रहार अभियान‎ अब कागजों में ही चल रहा है।‎

2-संयुक्त इलाज : जिला‎ अस्पताल में सामान्य मरीजों के‎ बीच डेंगू के मरीज भर्ती हैं। डेंगू‎ पीड़ित को काटने वाले मच्छर‎ सामान्य मरीज को काटे, तो डेंगू‎ प्रसार की आशंकाएं हैं।‎

3-क्षतिग्रस्त जालियां : जिला‎ अस्पताल में सुबह-शाम मच्छरों‎ की भरमार रहती है। वार्डों में लगी‎ खिड़कियों की जालियां टूटी हुई है।‎ मरीजों के लिए मच्छरदानियां नहीं‎ है।‎

सर्विलेंस करा रहे हैं‎

  • जहां डेंगू के मरीज मिलते हैं। वहां‎ हम सर्विलेंस करा रहे हैं। डेंगू मरीज‎ के पास रहने वालों, परिजनों के‎ सेंपल ले रहे हैं। जिला अस्पताल में‎ जांच की सुविधा है, सस्पेक्टेड‎ मरीजों के सेंपल जिले भर से आ‎ रहे हैं। - डॉ महेंद्रपाल सिंह,‎महामारी नियंत्रक, राजगढ़।‎
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