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पटरी पर नहीं आई स्कूली पढ़ाई:बच्चाें को स्कूल भेजने 30.4 प्रतिशत अभिभावकों की सहमति, कोरोना का डर इसलिए अब भी कम आ रहे

राजगढ़एक महीने पहले
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  • अनलाॅक के बाद शर्ताें पर खुले कक्षा 9वीं से 12 तक के स्कूल पर नहीं आ रहे ज्यादा बच्चे

कोरोना संक्रमण के बीच कक्षा 9 से 12वीं तक के बच्चों के लिए स्कूल खोले जाने के बाद से एक-दो घंटे की मार्गदर्शन कक्षाएं लगाकर पढ़ाई शुरू हो गई है। इनमें अभिभावकों के सहमति पत्र के साथ ही विद्यार्थी को प्रवेश दिया जा रहा है। जिले के अधिकांश विद्यार्थियों व अभिभावकों में कोरोना का भय है। विभाग के आंकड़ों के मुताबिक मात्र 32 फीसदी अभिभावक इस परिस्थिति में बच्चों को स्कूल भेजने के लिए तैयार हैं और उन्होंने ही सहमति पत्र दिए हैं। इसके बाद अब भी जाकर छात्रों की संख्या अधिक नहीं हाे सकी है।
जिले में 217 सरकारी हाईस्कूल और हायर सेकंडरी स्कूल हैं जिनमें 56 हजार 200 से अधिक बच्चे पढ़ते हैं। वहीं 125 निजी स्कूल है, जहां करीब 25 हजार 700 बच्चे पढ़ते हैं, लेकिन अभी 24900 बच्चे ही मार्गदर्शन कक्षाओं में पहुंच पा रहे हैं। हालांकि इस दौरान स्कूल में प्रवेश से लेकर कक्षाओं में पढ़ाई के दौरान कोविड प्रोटोकॉल का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। मुख्य द्वार पर शिक्षक विद्यार्थियों की स्क्रीनिंग करते हैं, टेम्प्रेचर नापते हैं। इसे रजिस्टर में नोट करने के बाद ही बच्चों को स्कूल में प्रवेश देते हैैं। इस दौरान पालक का लिखा हुआ सहमति पत्र भी देखा जा रहा है। कक्षाओं में बच्चों को दूर-दूर बिठाया जा रहा है ताकि सोशल डिस्टेंसिंग भी बनी रहे। बावजूद अभी भी 70 फीसदी अभिभावक बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे है। कई स्कूलों में तो एक भी विद्यार्थी नहीं आ रहा है। इसका कारण अधिकांश अभिभावकों में कोरोना को लेकर भय है और उन्हें इंतजामों पर भी ज्यादा भरोसा नहीं है इसलिए वह अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाह रहे है।
स्कूल में सहमति-पत्र के बिना नहीं दे रहे प्रवेश: अगर कोई विद्यार्थी पालक द्वारा लिखा हुआ सहमति पत्र लेकर नहीं आया तो उसे प्रवेश नहीं दिया जाता है। स्कूल में मास्क और सोशल डिस्टेंस आवश्यक है। सामूहिक खाना नहीं होगा और पानी की बोतल भी अलग लाना पड़ती है। पेन, कॉपी, किताब शिक्षण सामग्री भी एक-दूसरे से बदल नहीं सकते है। छात्र जिस टेबल-कुर्सी पर बैठा है उस पर ही रहेगा। अपनी जगह बार-बार नहीं बदलेगा। इसके अलावा जो छात्र स्कूल नहीं आना चाहते उनके लिए शिक्षण सामग्री स्मार्ट फोन पर भेजी जा रही है।
फसल कटाई व त्याेहार भी है कारण: क्षेत्र में पिछले एक महीने से फसल कटाई का सीजन चल रहा है। वहीं अब त्योहार का सीजन है। ऐसे में फसल कटाई व त्योहार के चलते छात्र स्कूल कम ही पहुंच रहे है। जिले की अधिकांश आबादी कृषि से जुड़ी है, ऐसे में छात्र भी अभिभावकों का कटाई के दौरान सहयोग कर रहे है। कोरोना के साथ यह कारण भी है कि त्योहार व कृषि कार्य के चलते छात्र संख्या कम है।

जो नहीं आ रहे उनकी ऑनलाइन पढ़ाई पर जोर
डीईओ बीएस बिसोरिया ने बताया कि शिक्षा विभाग द्वारा स्कूलों में जो भी विद्यार्थी आ रहा है उसे ऑनलाइन ही जुड़कर पढ़ाई करने पर जोर दिया जा रहा है। शिक्षकों को समय पर स्कूल में उपस्थित होकर वहीं से ऑनलाइन कक्षा करवाई जा रही है। इससे ज्यादा से ज्यादा बच्चे जुड़े इसके लिए जुटे हुए है।

विशेषज्ञ मानते हैं- कक्षा की पढ़ाई ऑनलाइन पढ़ाई से अधिक बेहतर है
शिक्षाविद आरके शर्मा ने बताया कि ऑनलाइन पढ़ाई अभी इतनी सफल नहीं हाे पा रही है। इसमें कई तरह की परेशानी आती है। कक्षा की पढ़ाई ज्यादा ठीक है क्योंकि शिक्षक से छात्र कुछ भी पूछ सकता है और उसमें अन्य विद्यार्थी का भी लाभ होता है। सरकार ने स्कूल शुरू करने के आदेश तो दे दिए है लेकिन वहां कोई खास सुविधा नही है इसलिए अभिभावक बच्चों को भेजने के लिए सहमत नही है।

अब कुछ स्कूलों में 30 फीसदी तक होने लगी छात्र संख्या शुरूआत के 15 दिनों तक जिलेभर के स्कूलों में छात्र संख्या 10 फीसदी ही रही है। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार अब कुछ स्क्ूलों छात्र संख्या बढ़ने लगी है। अक्टूबर के दूसरे सप्ताह तक जिले के अधिकांश स्कूलों में छात्र संख्या बढ़कर 30 फीसदी तक हो गई है। श्री बिसोरिया ने बताया कि कोरोना का प्रभाव कम होने पर अन्य छात्र भी स्कूल आएंगे, लेकिन तब तक हम ऑनलाइन शिक्षा भी जारी रखेंगे।

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