खनन माफिया फिर बेखौफ:कार्रवाई नहीं की गई ताे अब नदी में उतार दीं पनडुब्बियां

राजगढ़9 महीने पहले
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  • महीने भर से बोट, पोकलेन व जेसीबी से निकाल रहे थे रेत, अब बेखौफ होकर लगाईं पनडुब्बियां

कुछ दिनों तक एंटी माफिया अभियान से डरे खनन माफिया बोट, पोकलेन और जेसीबी से रेत खनन कर रहे थे, लेकिन जिले में इनके खिलाफ बड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो बेखौफ होकर खनन माफिया ने पार्वती नदी में पनडुब्बियां उतार दी हैं। इनके माध्यम से दिनरात रेत का खनन किया जा रहा है। हालत यह है कि एक पनडुब्बी से रोजाना औसतन सौ ट्राली से ज्यादा रेत का खनन किया जा रहा है।

प्रदेश में एंटी माफिया अभियान की शुरुआत हुई थी। इससे डरे खनन माफिया चोरी छिपे रेत खनन कर रहे थे। रेत का अवैध खनन करने वाले कारोबारी अभी तक बोट, पोकलेन और जेसीबी की मदद से खनन में लगे थे, लेकिन अब प्रशासन का खाैफ खत्म हो गया तो उन्होंने पार्वती नदी में जगह-जगह पनडुब्बी उतार दी। पार्वती नदी में 6 से अधिक पनडुब्बियां उतारकर यहां दिन-रात रेत का अवैध तरीके से खनन किया जा रहा है। प्रशासनिक अमले ने इस रेत खनन के खिलाफ कार्रवाई करना तो दूर मौके पर जाकर भी नहीं देख रहा। हालत यह है कि हरेक पनडुब्बी से रोजाना सौ-सौ ट्राली रेत निकाली जा रही है

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कार्रवाई जारी है
^जिले में अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई जारी है। मैं माइनिंग अधिकारी को बोलता हूं कि मौके पर जाकर कार्रवाई करें कि कहां मशीनों से खनन किया जा रहा है।
-नीरज कुमार सिंह, कलेक्टर
मशाीन मिली ताे कार्रवाई
^मैंने कुछ दिन पहले ही नदी पर जाकर देखा था, पनडुब्बी नहीं थी, कल ही कार्रवाई के लिए टीम भेजता हूं, अगर मौके पर मशीनें मिली तो कार्रवाई होगी।
–मुमताज खान, जिला खनिज अधिकारी राजगढ़।
अनुमति से कई गुना ज्यादा कर लिया खनन : नई खनिज नीति के तहत आवंटित खदानों से सालभर में 35 हजार घनमीटर रेत का खनन किया जाना था, लेकिन खनन का इतना कारोबार तो जिलेभर में रोजाना हो रहा। हाथ से निकाली जाने वाली रेत के लिए पोकलेन, जेसीबी व बोट का उपयोग किया जा रहा था, लेकिन अब खनन माफिया ने नदी के अंदर पनडुब्बी उतार दी।

जिले में खदानों की यह है स्थिति
बैराड़: बैराड़ के यहां नदी में पानी गहरा है। यहां अभी तक बोट चल रही थी, लेकिन अब पनडुब्बी के सहारे दिनरात खनन किया जा रहा है। खनन के दौरान यहां सौ से अधिक ट्राली रेत रोजाना निकाली जा रही है। इसके साथ ही दो बोट भी यहां लगी हुई हैं, जो इंजन की मदद से रेत निकाल रहीं।

टोड़ी-सेमलापार: टोड़ी-सेमलापार में पोकलेन की मदद से रेत का खनन किया जा रहा है। यहां कभी पोकलेन तो कभी जेसीबी की मदद से रेत निकालकर किनारे लाई जाती है। जहां से रेत को परिवहन किया जाता है। यहां भी करीब सौ ट्राली रेत रोजाना निकाली जा रही है।

शेखनपुर: दोनों खदानों से दूर पार्वती नदी पर ही शेखनपुर खदान है, जहां दो पोकलेन से रेत का खनन किया जा रहा है। मशीनों ने नदी के तले को खोदकर रेत निकालकर सीधे डंपर व ट्रालियों में भरकर उसे बेचा जा रहा है। यहां दो से तीन सौ से अधिक ट्राली रेत रोजाना निकाली जा रही है।

अकेले बैराड़ में सौ ट्राली रेत का रोजाना खनन
टोड़ी सेमलापार से लेकर बैराड़ तक नदी में 6 पनडुब्बियां उतारी हैं। इनकी मदद से दिन-रात रेत निकाली जा रही है। पनडुब्बी से निकाली रेत को पाइप के जरिए किनारे एकत्रित कर यहां से डंपर व जेसीबी की मदद से बाजार में सप्लाई किया जा रहा। इसके साथ ही भोपाल व गुना की तरफ भी पनडुब्बी उतारी है, जहां रेत निकालकर दूसरे जिले की सीमा पर एकत्रित की जा रही है। बैराड़ में डाली पनडुब्बी को जब भास्कर टीम द्वारा देखा गया तो बीच नदी में लगी पनडुब्बी पाइप के जरिए रेत को किनारे डाल रहे। यहां करीब एक घंटे में तीन से चार ट्राली रेत निकाली जा रही है।
रात-दिन चल रहा खनन
रेत खदानों का काम गिरजा ट्रेडिंग कंपनी ने 3.56 करोड़ सालाना में लिया, जिसे 35 हजार घनमीटर खनन करना था, लेकिन यहां छोटे-छोटे कारोबारियों को काम देने के साथ ही रसूखदारों को भी काम सौंपा है, जो खनन नीति को ताक पर रखते हुए दिन रात मशीनों से खनन कर रहे हैं।

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