अफ्रीकन बोमा पद्धति से शिफ्टिंग:बारिश में पहाड़ी से बाड़े में आए चीतल, बिना छुए 132 गांधीसागर में शिफ्ट किए

राजगढ़2 महीने पहलेलेखक: श्रीनाथ दांगी
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बोमा में एक साथ इस तरह आए चीतल। - Dainik Bhaskar
बोमा में एक साथ इस तरह आए चीतल।
  • बारिश में सेंचूरी में ट्रक नहीं पहुंच पा रहे थे तो 10 घंटे में बनाई 900 मीटर लंबी सड़क

चिड़ी-खो अभ्यारण्य में चीतल की संख्या ज्यादा बढ़ जाने से इन्हे सालभर पहले दूसरी जगह शिफ्ट करने की योजना तैयार की थी। परिस्थियां शिफ्टिंग के अनुकुल नही हाेने से 91 दिनों में 64 चीतल ही गांधी सागर भेजे जा सके थे पर अब बारिश का सीजन हाेने से शिफ्टिंग में अासानी हाे रही है। इसीलिए तीन दिन में 132 चीतलाें को गांधी सागर अभयारण्य पहुंचाया गया है। पहले दिन दो अगस्त को 52 चीतल बोमा (अफ्रीकी बाड़ा) में घेरकर लाए गए, इसके बाद इन्हे बिना छुए ट्रक लोड कर गांधी सागर अभयारण्य पहुंचाया। एक दिन पहले सुबह 47 और शाम को 33 चीतल बोमा में आए, इन्हे भी गांधी सागर पहुंचाया है। ट्रक की गति भी धीमी रखी गई।

पिछले साल शुरू की थी शिफ्टिंग: वन विभाग ने सालभर पहले चीतल शिफ्ट करने की योजना तैयार की थी। इसके लिए 4 नवंबर से 7 फरवरी तक विशेष अभियान चलाया गया। इस अभियान में प्रदेश के 100 लोगों की एक्सपर्ट टीम शामिल की गई थी, तब हवा की दिशा ठीक नहीं होने और चीतल के पहाड़ों पर चले जाने से 91 दिन में 20 बार प्रयास करने के बाद भी महज 64 चीतल ही बोमा के अंदर आए थे। मौसम खराब हाेने और कोरोना के चलते शिफ्टिंग कार्य को रोक दिया था।

11 घंटे में ट्रक को बोमा तक पहुंचाने का रास्ता तैयार किया

बारिश हाेने से जंगल में बोमा तक ट्रक ले जाना मुश्किल था। बिना सड़क के ट्रक के फंसने का डर था, इसके लिए 1 अगस्त को 50 लोगों ने 11 घंटे की मेहतन के साथ 900 मीटर लंबी सड़क बनाकर तैयार कर दी। कर्मचारी ने बेल (कतार) बनाकर पत्थर जमाते हुए आगे बढ़ते गए और ट्रक को बोमा तक पहुंचाने रास्ता तैयार किया। बारिश में सड़क बनाना मुश्किल काम था।

2500 से ज्यादा हैं चीतल

पिछले साल की गणना के अनुसार 2500 से ज्यादा चीतल अभ्यारण्य में है। 600 चीतल गांधी सागर और 100 खिवनी अभयारण्य पहुंचाने हैं। इसके लिए प्रदेशभर के एक्सपर्ट की 14 टीमाें लगी हैं। बोमा यानी बाड़ा तैयार कर शिफ्टिंग ट्रक भी बुलाए है। चीतल को बिना छुए शिफ्ट किया जा रहा है। इसलिए आसानी से आ रहे: सेंचूरी इंचार्ज जेएस राठौर ने बताया कि चीतल बहुत समझदार प्राणी है जो गंध से भी खतरा भांप लेता है, इसलिए बारिश का समय चुना है।

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