हालात खराब:मजबूर मरीज बरामदे में भर्ती, क्योंकि जनरल से लेकर आईसीयू तक सभी वार्डों में बेड फुल

राजगढ़6 महीने पहले
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जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर के बरामदे में लेटकर इलाज करा रहे मरीज। - Dainik Bhaskar
जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर के बरामदे में लेटकर इलाज करा रहे मरीज।
  • जिला अस्पताल में मेटरनिटी काे छाेड़कर वार्डों में क्षमता से ज्यादा मरीज

बेकाबू हो चुके कोरोना संक्रमण के दौर में इन दिनों जिला अस्पताल में मरीजों को भर्ती होने के लिए पलंग नहीं मिल रहे हैं। पुरुष-महिला मेडीकल वार्ड, ट्रामा सेंटर, आईसीयू, जनरल आईसीयू सहित कोविड वार्डों में सभी पलंग पर मरीज भर्ती हैं।

परेशान मरीज व उनके अटेंडर एेसे हालातों में समझौता करते हुए अस्पताल के बरामदे में मरीज को लेटाकर इलाज कराते हुए देखे जा रहे हैं। हालात यह कि कोविड के लिए आरक्षित सभी 147 पलंग भरे हुए हैं। इनके अलावा नॉन कोविड मरीजों की संख्या भी 100 से ज्यादा है, जिन्हें ट्रामा सेंटर व अन्य वार्डों में जैसे-तैसे इलाज कराना पड़ रहा है।

सिविल सर्जन डॉ आरएस परिहार के अनुसार 30 पलंग बढ़ाए गए हैं, फिर भी हालात एक जैसे हैं। प्रतिदिन मरीजों का आना-जाना लगा है। पलंग खाली नहीं होने पर बरामदे में या सुविधा के हिसाब से इलाज कर रहे हैं। कुल 300 पलंग के जिला अस्पताल में 100 पलंग मेटरनिटी के हैं। शेष बचे 200 बेड फुल हैं। 250 से ज्यादा मरीज यहां इलाज करा रहे हैं। इन सब हालातों के बीच अव्यवस्थाएं हावी है। समय पर डॉक्टरों की सेवाएं नहीं मिलने के आरोप अटेंडर लगा रहे हैं।

जबकि कोविड के चलते कम आ रहे सामान्य मरीज
एक स्थिति यह भी है कि जिला अस्पताल में इन दिनों सामान्य बीमारियाें के मरीज कम आ रहे हैं। अधिकांश मरीज सर्दी, खांसी, बुखार व गले में खराश, सांस लेने में दिक्कत आने जैसी समस्या लेकर ओपीडी में पहुंच रहे हैं। सिविल सर्जन डॉ परिहार भी स्वीकार करते हैं कि कोविड के चलते सामान्य मरीज जिला अस्पताल में बहुत कम संख्या में आ रहे हैं। कोरोना संक्रमण के चलते यह हालात बन रहे हैं।

शाजापुर व पचोर में नहीं मिली ऑक्सीजन, राजगढ़ में फर्श पर भर्ती, तीन घंटे डॉक्टर नहीं आए, हो गई मौत
गुरुवार सुबह जिला अस्पताल में कोविड के संदिग्ध मरीज हराना निवासी युवक सिद्धनाथ सेन की मौत हो गई। मरीज के अटेंडर लखन सेन ने बताया कि सुबह से ही उसे सांस लेने में दिक्कतें आ रही थीं। सुबह वह वार्ड में मौजूद स्वास्थ्यकर्मी को हालात बताने पहुंचा, तो कहा गया कि डॉक्टर राउंड पर आने वाले हैं। 3 घंटे इंतजार के बावजूद डॉक्टर नहीं आए। इस बीच अपने परिचितों को फोन किए। तड़पते हुए गुरुवार सुबह साढ़े 11 बजे सिद्धनाथ की मौत हो गई।

परिजन मुकेश सेन ने बताया कि पहले शाजापुर के निजी अस्पताल लेकर गए थे। वहां ऑक्सीजन नहीं मिली तो पचोर लेकर आए। वहां भी सुविधा नहीं मिलने पर बुधवार सुबह करीब 4 बजे जिला अस्पताल के ट्राम सेंटर के 22 नंबर वार्ड में जमीन पर ही भर्ती कराया था।

सिर्फ मेटरनिटी वार्ड के 60 पलंग ही खाली
मेटरनिटी वार्ड में जरूरी हालात सामान्य है। इस वार्ड के 100 में से 60 पलंग खाली है। सुरक्षा व सावधानियों के बीच प्रसव कराए जा रहे हैं। जिला अस्पताल में प्रसूति के लिए गर्भवती महिलाएं भी कम संख्या में पहुंच रही है। दरअसल इन दिनों सभी लोग कोविड के संक्रमण से डरे हुए हैं। बीते महीनों में जिले के स्वास्थ्य केंद्रों को प्रसव केंद्र बनाने के प्रयास किए गए थे।

इसका उद्देश्य संस्थगत प्रसव के मामलों को बढ़ाना था। हालांकि इसके बाद से जटिल प्रसव के मामले में ही प्रसूति के लिए जिला अस्पताल भेजा जा रहा है। गुरुवार को 40 महिलाएं प्रसूति वार्ड में भर्ती है। ऐसे में 40 पलंग खाली हैं।

सभी काे हालातों काे समझना चाहिए
डॉक्टरों से वार्डों में नियमित राउंड लेने को कहा है। इस समय विकट परिस्थितियां चल रही हैं। सभी को समझना चाहिए, ड्यूटी के प्रति गंभीर रहना चाहिए।
-डॉ आरएस परिहार, सिविल सर्जन, राजगढ़।

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