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धर्म:भूले-बिसरे पितृों का आज किया जाएगा तर्पण

राजगढ़6 दिन पहले
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  • श्राद्ध पक्ष में सभी पितर धरती पर अपने परिवारों में आकर धूप-ध्यान, तर्पण आदि ग्रहण करते हैं

सर्व पितृमोक्ष अमावस्या गुरुवार को है। यह पितृ पक्ष की अंतिम तिथि है। इसके साथ ही श्राद्ध खत्म हो जाएंगे। यदि पूरे पितृपक्ष में किसी का श्राद्ध करना भूल गए हैं या मृत व्यक्ति की तिथि मालूम नहीं है तो इस तिथि पर उनके लिए श्राद्ध किया जा सकता है। पं. राधारमण त्रिपाठी ने बताया कि जब कुंडली में पितृदोष, गुरु चांडाल योग, चंद्र या सूर्य ग्रहण योग हो तो इस दिन विशेष उपाय किए जा सकते हैं। अमावस्या पर सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों के पिंडदान करना श्रेष्ठ माना जाता है। मान्यता है कि पितृपक्ष में सभी पितर देवता धरती पर अपने-अपने कुल परिवारों में आते हैं। धूप-ध्यान, तर्पण आदि ग्रहण करते हैं। जो अमावस्या पर पितृलोक में चले जाते हैं। श्राद्ध पक्ष में पूर्वजों का स्मरण, उनकी पूजा करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है। जिस तिथि पर हमारे परिजनों की मृत्यु होती है उसे श्राद्ध की तिथि कहते हैं। बहुत से लोगों को अपने पूर्वज के मृत्यु की तिथि याद नहीं रहती। ऐसी स्थिति में शास्त्रों में इसका भी निवारण बताया गया है। उन मृत लोगों के लिए पिंडदान, श्राद्धा, तर्पण, कर्म किए जाते हैं।

इस तरह से आज कर सकते है श्राद्ध
श्राद्ध वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान ध्यान करने के बाद पितृ स्थान को सबसे पहले शुद्ध कर लें। पंडितजी को बुलाकर पूजा और तर्पण करें। पितरों के लिए बनाए भोजन के चार ग्रास निकालें। उसमें से एक हिस्सा गाय, एक श्वान, एक कौए और एक अतिथि के लिए रख दें। गाय, श्वान और कौए को भोजन देने के बाद ब्राह्मण को भोजन कराएं और वस्त्र दक्षिणा दें। पितरों के नाम से पौधरोपण भी करे।

यह शुभ काम भी जरूर करें
पितृपक्ष की अमावस्या पर जरूरतमंदों को धन, अनाज, वस्त्र आदि का दान करना चाहिए। पितरों की शांति के लिए आप चाहें तो वस्त्र दान भी कर सकते हैं। धार्मिक स्थल, मंदिर में दान व गरीबों को भोजन, गोशाला में गायों को चारा डालना। सूर्यास्त के बाद घर में बने मंदिर में और तुलसी के पास दीपक जलाएं। मुख्यद्वार और छत पर भी दीपक जलाएं।

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