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मौसम की मार:कीड़े लगने से गिर रहे चना-मसूर के फूल, मटर धनिया और बैंगन के पौधे काले होकर मुरझाए

राजगढ़12 दिन पहले
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  • बीते सप्ताह चली शीतलहर व सीवियर कोल्ड वेब का फसलों पर अब नजर आया असर

माैसम में बार-बार हाे रहे बदलाव के कारण किसान परेशान हैं। पिछले दिनाें बादल छाने से फसलों में कीट और इल्ली का असर झेलने के बाद अब उन्हें फसल काे पाले से हुए नुकसान का भी सामना करना पड़ रहा है। बीते सप्ताह चली शीतलहर से रबी की परंपरागत और बागवानी वाली फसलों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। सप्ताह बीतने के बाद अब पौधे काले होकर मुरझाने लगे हैं। हराना गांव में मंगलवार को किसानों को चना व मसूर के पौधों से खेतों में फूल गिरे हुए नजर आए। बैंगन व मटर के पौधे भी मुरझा गए हैं। धनिया के फूल व दानों का रंग काला हो गया है। गेहूं के पौधों में विकसित होती बालियों में भी शीतलहर का अंदेशा है। यह नुकसान बालियां विकसित होने के साथ नजर आ सकता है। सोमवार से ही मौसम साफ है, ऐसे में आने वाले दिनों में शीतलहर का प्रकोप बढ़ सकता है। अकेले हराना ही नहीं ऐसी ही स्थिति अन्य कई गावाें में भी बन रही है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को पाले से बचाव के उपाय बताते हुए सतर्क रहने काे कहा है। किसानाें ने की हैं नुकसान की शिकायतें : ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी एसएन चौहान ने बताया कि कुछ किसानों ने यह नुकसान होने की शिकायतें की है, वह क्षेत्र का दौरा कर वस्तु स्थिति की जानकारी लेंगे। उन्होंने बताया कि फूल गिरने की स्थिति में अनुकूल मौसम रहने पर चना व मसूर में फिर से फ्लॉवरिंग होने की संभावना है क्योंकि अभी पौधे विकासशील है। किसानों को पाले से बचाव के उपाय भी बताए हैं।

सबसे बुरा असर पड़ा धनिया की फसल पर, पैदावार हाेगी प्रभावित
बीते सप्ताह शीतलहर के दौरान जिले में सीवियर कोल्ड वेब के हालात बने थे। इस दौरान फसलों पर ओस जम गई थी। इसी वजह से पौधों में नुकसान पहुंचा, जो समय बीतने के साथ अब पौधों पर नजर आने लगा है। हराना के किसान गोपालबिहारी नागर, रमेशचंद्र सेवरिया ने बताया कि फसलों में नुकसान तो हुआ है, लेकिन अभी यह नहीं कहा जा सकता कि कितना नुकसान हुआ है। इसका असर पैदावार पर पड़ेगा। किसानों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। सबसे ज्यादा बुरा असर धनिया की पौध पर देखा जा रहा है।

चना, मसूर में फूल आने की उम्मीद पर धनिया, मटर की भरपाई नहीं
चना व मसूर में फूल आने का दौर गुजर चुका है। पौधों पर फूल लदे हुए हैं। बीते सप्ताह पाला पड़ने से तनों से फूल गिरने की स्थिति बनने की सूचनाएं हैं। हालांकि कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि पौधे विकासशील होने से चना व मसूर में फिर से फ्लॉवरिंग की उम्मीदें हैं, लेकिन धनिया, मटर, बेंगन व बागवानी फसलों में नुकसान की भरपाई नहीं होगी। गेहूं की बालियों में भी नुकसान का अनुमान है, लेकिन यह अभी दिखाई नहीं दे रहा। किसानों का मानना है कि बालियां विकसित होने के साथ गेहूं में भी शीतलहर से हुआ नुकसान दिखने लगेगा। दाने बड़े नहीं हो सकेंगे।

चने में तंबाकू, कटुआ व हरी इल्ली, मसूर में माहू कीट से हो रही बर्बादी
चने के पौधों को तंबाकू, कटुआ व हरी इल्ली प्रजाति के कीट खाकर चट कर रहे हैं। मसूर में माहू कीट की मौजूदगी है। बेहद छोटे आकार के यह कीट तने पर लिपटे हुए नजर आ रहे हैं। कुछ समय बाद यह मच्छरों के रूप में वातावरण में दिखाई देंगे। इससे मसूर के पौधों का विकासक्रम प्रभावित हो रहा है।
क्लाेरापाइरीफाॅस के छिड़काव की सलाह पर नहीं मिट रहा माहू
ग्रामीण कृषि विस्तारक चौहान ने मसूर के माहू कीटों से बचाव के लिए रोगार व क्लोरोपाइरीफॉस कीटनाशक का छिड़काव करने की सलाह दी है। इसके बावजूद लाख्या गांव के किसान सुल्तानसिंह सरावत, नारायणसिंह, हरिसिंह सरावत आदि ने बताया कि कीटनाशक छिड़काव के बाद भी कीटों की मौजूदगी देखी जा रही है। किसानों का कहना है माहू का असर खत्म नहीं हो रहा है।
अभी अधिक नुकसान नहीं, लेकिन आगे पाला पड़ने की आशंका
^पाले से अधिक नुकसान का अनुमान नहीं है। धूप निकलने पर मसूर व चने में फिर से फ्लॉवरिंग की उम्मीदें हैं। गेहूं में फ्लॉवरिंग स्टेज चल रही है, वहीं बालियों में भराव होने पर स्थिति स्पष्ट होगी। आगे पाला पड़ने की आशंका है। किसानों को सतर्क रहकर खेत की मेढ़ों पर धुआं करना चाहिए।
–एसएन चौहान, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी।

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