महिला बाल विकास सुपरवाइजर पर मनमानी का आरोप:राजगढ़ में एनआरसी में बच्चे नहीं गए तो सहायिकाओं का काट लिया वेतन

राजगढ़6 महीने पहले
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राजगढ़ में 8-9 हजार रुपए महीने में नौकरी करने वाली गरीब महिला सहायिकाओं का तीन-तीन दिन का वेतन काट लिया गया है। मामला खुजनेर सेक्टर के बखेड़ का है। जहां सुपरवाइजर के आदेश से आसपास की आंगनबाड़ी सहायिकाओं का वेतन काटा है।

कार्यकर्ताओं ने शिकायत करते हुए बताया की अब धमकी यह भी दी जा रही है कि बच्चे नही भेजे तो आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का वेतन भी अगले माह काटा जाएगा।

बताया जा रहा है कि कुपोषण को खत्म करने के लिए प्रशासन का भारी दबाव है। इसके लिए चिन्हित बच्चों को राजगढ़ एनआरसी सेंटर पर भेजा जाता है, लेकिन वर्तमान में कोरोना के डर से मां-बाप अपने बच्चों को एनआरसी सेंटर पर भेजने के लिए राजी नहीं हैं। ऐसे में गांव में ही रहकर काम करने वाली सहायिकाएं बच्चों को कैसे भेजें।

उल्लेखनीय है कि घर घर चक्कर लगाकर आंगनबाड़ी केंद्र तक बच्चों को लाने और उन्हें दिनभर दुलार से रखने के अलावा नेताजी की रैली में भीड़ बढ़ाने के काम करने वाली सहायिकाएं अब दोनों तरफ से मानसिक प्रताड़ना कीशिकार हो रही है। एक तरफ वेतन काटने के बाद भी प्रशासनिक दबाव ऊपर से ग्रामीण पालकों की दुत्कार। ग्रामीण पालक कोरोना के नए वेरिएंट के डर से अपने बच्चों को अपने से अलग करना नहीं चाहते। अब करें तो क्या करें।

राजगढ़ जिला कार्यक्रम अधिकारी म.बा.वि. सुनीता यादव ने बताया कि हमने ऐसे आदेश नही दिए हैं। कलेक्टर ने सुपरवाइजरों से कहा था कि बच्चे एनआरसी सेंटर में नहीं आए तो उनका वेतन काटा जाएगा। सुपरवाइजर ने सहायिकाओं का वेतन काटा है तो वापस करवा दिया जाएगा।