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दहशरा आज:रावण दहन से पहले भगवान राम को दी जाएगी बंदूकों से सलामी, कोरोना को मात देने लेंगे संकल्प

राजगढ़एक महीने पहले
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  • रावण दहन के दौरान घर व नगर को साफ रखने के साथ ही कोरोना को हराने जारी होगा संदेश

शहर में इस बार अहंकार रूपी का रावण को भले ही 52 फीट की बजाय 35 फीट ऊंचा ही पुतला तैयार किया गया हो, लेकिन इस अहंकार रूपी रावण को जिस प्रकार से जलाकर नष्ट किया जाएगा, उसी प्रकार से हम मिलकर कोरोना से लड़ेंगे। इसके लिए हम नियमित रूप से मास्क पहनने के साथ ही सामाजिक दूरी का पालन करेंगे। इस तरह का संकल्प शहर सहित जिलेभर में रावण दहन से पहले दिया जाएगा। कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने इसके लिए सभी निकाय सीएमओ और आयोजन समिति से कहा कि वह कोरोना से लड़ने लोगों को जागरूक जरूर करे। शहर सहित जिलेभर में कुछ नगर व कस्बे को छोड़कर सोमवार को 12 नगरीय निकाय के साथ सौ से अधिक कस्बों में रावण दहन किया जाएगा। जहां पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के लिए कोई ट्रैफिक प्लान तैयार नहीं किया है। जबकि इस साल रावण दहन के दौरान कोरोना जैसी महामारी का प्रकोप चल रहा है। शहर सहित ब्यावरा, खिलचीपुर, नरसिंहगढ़, पचोर, सारंगपुर सहित अन्य शहरों में दशहरा को लेकर तैयारियां की जा रही है। लेकिन इस अहंकार रूपी रावण के साथ कोरोना से निपटने के लिए कहीं योजना तैयार नहीं की गई।

कोरोना के चलते... आज इस तरह से होगा आयोजन
नपा द्वारा नए दशहरा मैदान पर रावण दहन का आयोजन किया जाएगा। यहां आयोजन के दौरान कोरोना के प्रति जागरूक किया जाएगा। शहर में सोमवार को रावण दहन किया जाना है। परंपरानुसार लक्ष्मीकांत मंदिर पर भगवान राम को गॉर्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा। शाम चार बजे रामजी दलबल के साथ गांधी चाैक, तिल्ली चौक, गणेश जी की छत्री, जय स्तंभ, मनकामनेश्वर मंदिर होते हुए विजय जुलूस के साथ दशहरा मैदान पर शाम छह बजे पहुंचेंगे। जहां रामजी के तरकश से निकले तीर से रावण का दहन होगा। इसके लिए 37 साल से रावण तैयार करने वाले सतीश दशेरिया बताते हैं कि इस बार कोरोना के चलते रावण व आतिशबाजी की लागत कम की है। रंग-बिरंगी आतिशबाजी के बीच कोरोना से लड़ने संदेश दिया जाएगा।

जानिए: जिले में इन दो जगह इसलिए खास रहता है दशहरा पर्व

खिलचीपुर में 64 साल से बजरंग समिति करती है आयोजन
खिलचीपुर नगर में 64 साल पहले राजपरिवार के सहयोग से रावण दहन होता था, इसके बाद समिति ने इसकी शुरूआत की। नगर के गोपालसिंह राठौर, रघुवीरसिंह बताते हैं कि पहली बार दशहरा पर्व नपं के सहयोग से बजरंग समिति ने उस समय मनाया था जब नप का पहला बजट 51 रुपए था। श्याम बिहारी सेन “मामा” 52 वर्षों से इस दशहरे पर्व को मनाते आ रहे हैं। नगर में दशहरा पर्व पर दोनों दल में 2 सौ पात्र से अधिक लोग मिलकर सजीव चित्रण करते हैं। भव्यता प्राचीन समय से नगर दो भागों में बंटा है। एक तरफ नगर व नदी के दूसरी तरफ सोमवारिया, जहां दशहरा मैदान है। पटवा बाजार स्थित श्रीराम मंदिर से चल समारोह दशहरा मैदान के लिए निकलता है। नदी पर बनी पुलिया पर रामसेतु कहलाता है, जहां भोलेनाथ की भगवान राम द्वारा पूजा की जाती है। इसके बाद सेतु पार कर भगवान राम रावण का संहार कर हनुमानगढ़ी स्थित अशोक वाटिका जाते हैं। जहां से सीता को लेने के साथ ही विभीषण का राजतिलक भी करते हैं।

भाटखेड़ी में रावण जलाते नहीं भाले से नाभि में मारते हैं
करीब डेढ़ सौ सालों से चली आ रही पुरानी परम्परा को भाटखेड़ी में आज भी निभाया जाता है। विजय दशमी के दिन जिले में एक मात्र आगरा मुम्बई हाइवे स्थित भाटखेड़ी गांव के पास बने रावण और कुंभकर्ण के पुतलों की यहां पूजा होती है। इसके बाद इन पुतलों को जलाया नहीं जाता है, इनकी नाभि में भाला मारा जाता है। गांव में नवरात्र के दौरान नौ दिनों तक रामलीला का मंचन किया जाता है। इसके बाद दशहरे के दिन श्री राम मंदिर से चल समारोह भगवान के विमान के साथ शुरू किया जाता है। रामादल और रावण की सेना सहित रामलीला के बने पात्र नाचते-गाते हाइवे किनारे बने रावण व कुंभकर्ण के पुतलों के सामने रामलीला का मंचन करते है। जहां आसपास के दर्जनों गांव के लोग मंचन को देखने पहुंचते है। इसके बाद रावण को जलाया नहीं जाता है, इसके लिए पुतले में भाला मारा जाता है। गांव के पटेल विमान के सामने मारते है भाला ग्रामीणों का मानना है कि उनके गांव में सालों से यह परंपरा चली आ रही है।

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