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बाेवनी का सीजन निकला:मानसून आए एक महीना होने को और 88% ही बोवनी, अंकुरित फसल भी सूखने की कगार पर

राजगढ़20 दिन पहले
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बारिश के अभाव में खेतों में अंकुरित फसलें सूखने लगीं। - Dainik Bhaskar
बारिश के अभाव में खेतों में अंकुरित फसलें सूखने लगीं।
  • औसत से आधी भी नहीं हुई बारिश, पिछले साल से 10 सेमी कम

मानसून को आए एक महीना होने को आया, लेकिन इसके बाद भी जिले में 88 प्रतिशत रकबे में ही बोवनी हो सकी। जिन किसानों ने पहले बाेवनी की थी वह फसल भी बारिश की कमी से सूखने लगी है। बारिश की लंबी खेंच के चलते बोवनी का समय भी निकलता जा रहा है। स्थिति यह है कि जिले में 14 जुलाई की स्थिति में औसत से आधी भी बारिश नहीं हुई है।

मानसून सीजन में जिले की औसत बारिश 110 सेमी है, जबकि 15 जुलाई तक 30 सेमी बारिश हो जाती है। इस साल 14 जुलाई तक 15 सेमी ही बारिश हुई है जबकि पिछले साल 14 जुलाई की स्थिति में 25 सेमी बारिश हो गई थी।

सामान्यता मानसून 18 जून के आसपास आता है, लेकिन इस साल मानसून 15 जून को ही आ गया था। 20 जून तक बारिश हुई, इसके बाद खंड वर्षा होने लगी। अब पिछले 20 दिन से बारिश नहीं हो रही है। इस साल खरीफ फसल के लिए 4 लाख 26 हजार हेक्टेयर क्षेत्र का लक्ष्य रखा गया था, उसके बदले 3 लाख 75 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में ही बोवनी हो सकी।

यानी 88 प्रतिशत खेतों में बोवनी हुई है, बाकी खेत खाली पड़े है। जिन किसानों ने पहली बारिश में बोवनी कर दी थी, उनकी फसलें भी अब खराब होने लगी है। बारिश के अभाव में अभी किसान दोबारा बोवनी भी नहीं कर सकते।

10-15 जुलाई तक बोवनी का रहता है अंतिम समय
क्षेत्र में बोवनी के लायक अच्छी बारिश का समय 15 से 20 जून तक रहता है। वहीं बोवनी का अंतिम समय 10 से 15 जुलाई तक रहता है। इसके बाद बोई गई फसल पक नहीं पाती है बारिश थम जाती है। ऐसे में 15 जुलाई के बाद तिल व अन्य फसलें जो कम उम्र की होती है उसी की बुआई हो सकती, लेकिन सोयाबीन, मक्का व अन्य फसल की जिसकी उम्र औसत 60 से 90 दिन होती है उसकी बुआई उचित नहीं रहती है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि खरीफ की फसल लेने के बाद फिर किसान को रबी की बाेवनी की तैयारी भी करनी होती है।

तापमान भी सामान्य से 5 डिग्री ज्यादा
बारिश के अभाव में तापमान भी सामान्य से पांच डिग्री ज्यादा बना हुआ है। मौसम विभाग के आरएस गोयल के अनुसार मंगलवार को दिन का अधिकतम तापमान 37 डिग्री और न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस था, जो बुधवार को बढ़कर अधिकतम 37.2 और न्यूनतम 27.6 डिग्री सेल्सियस रहा है। इस दौरान मौसम में सुबह आद्रता 75 फीसदी थी जो शाम को घटकर 52 फीसदी रह गई।

साेयाबीन का रकबा 60 हेक्टेयर घटा
पिछले कुछ सालों से सोयाबीन में किसानों को लगातार घाटा जा रहा है। वहीं इस साल पर्याप्त बारिश भी नहीं हुई है। इसके चलते सोयाबीन का रकबा भी 60 हजार हेक्टेयर घट गया है। इस साल सोयाबीन का रकबे का लक्ष्य 3 लाख 43 हजार हेक्टेयर रखा था, लेकिन बारिश के अभाव में 2 लाख 83 हजार हेक्टेयर में ही बुआई हुई है। पिपरखेड़ा जैसे एक दर्जन से अधिक गांव ऐसे है जहां आधे गांवाें में बारिश होने से बोवनी हुई और आधे गांव में बारिश के अभाव में खेत खाली हैं।

बारिश के अभाव में मुरझाने लगी हैं फसलें, बारिश जरूरी

  • ^अभी कुछ खेतों में नुकसान की सूचना है, वहीं दोपहर के समय बारिश के अभाव में फसलें मुरझाने लगी हैं। अभी बारिश होती है तो कम उम्र की फसल की बुआई कर सकते है। अगर इस सप्ताह बारिश नहीं होती है तो फसलों को काफी नुकसान होगा। ऐसे में फसलों का सर्वे कराया जाएगा, ताकि किसानों को फसल बीमा का लाभ मिल सके। –हरीश मालवीय, उपसंचालक कृषि राजगढ़।

अभी खंड वर्षा से भी राहत नहीं: इस साल जिले में औसत से भी कम बारिश हुई है। ऐसे में बोई गई फसल खंड वर्षा के चलते खराब हो रही है। मोयाखेड़ी, देवरी, कछोटिया, देवाखेड़ी, रूपारेल, बिसन्या, बरखेड़ा सहित दर्जनों गांवों में खेत खाली पड़े है। किसान रामसिंह, रामरतन सौंधिया, धीरपसिंह ने बताया कि सालों बाद इस तरह खेतों को बारिश के अभाव में वीरान देख रहे हैं। अब बारिश होती है तो बोवनी की उम्मीद है, नहीं तो रबी सीजन की बाेवनी तक खेत खाली रहेंगे।

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