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समस्या:अलग-अलग रूट पर सामान्य दिनों में चलती थी 150 से अधिक बसें, अनलॉक के बाद सिर्फ 10

सारंगपुर9 दिन पहले
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शहर के बस स्टैंड पर पहुंच रही इक्का-दुक्का यात्री बसें। - Dainik Bhaskar
शहर के बस स्टैंड पर पहुंच रही इक्का-दुक्का यात्री बसें।
  • व्यवसायिक रूट इंदौर पर बहुत कम बसों का परिचालन होने से लोग परेशान

कोरोना कर्फ्यू के दौरान सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का सबसे मुख्य साधन यात्री बसे बंद हो गई थी, जो अनलॉक के बाद भी पूरी तरह से चालू नहीं हो पाई है। व्यापारिक दृष्टि से पूरी तरह इंदौर से जुड़ा होने के बावजूद भी इस रूट पर अभी भी गिनी चुनी यात्री बसें ही चल रही है। बस ऑपरेटरों की मानें तो डीजल के बढ़े हुए दामों व यात्रियों की कमी के चलते अभी बसों का पूरी तरह से संचालन नहीं किया जा रहा है। सामान्य दिनों में सारंगपुर बस स्टैंड से करीब 150 से अधिक यात्री बसें अलग-अलग रूट के लिए प्रतिदिन आवागमन करती थी, किंतु इस समय मात्र 9-10 यात्री बसें ही शुरु हो सकी है, जिससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा हैं।

मध्यम वर्ग के लोगों को सफर में ज्यादा समस्या
कोरोना काल में आर्थिक रूप से संपन्न लोग अपने निजी वाहनों से जरूरी सफर कर रहे हैं, लेकिन अधिकांश मध्यमवर्गीय परिवार के पास निजी वाहन नहीं होने से उसे सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर ही निर्भर रहना होता है। ऐसी दशा में यात्री बसें नहीं चलने से संबंधित को बाइक से जान जोखिम में डालकर आवागमन करना पड़ रहा है।

सवारियां नहीं मिलने से हो रही है दिक्कतें
बस संचालकों की माने तो सवारियां नहीं मिलने से बस चलाने का खर्च भी नहीं निकल रहा है, कर्मचारियों को वेतन, डीजल, टोल टैक्स, परमिट खर्च, मेंटनेंस आदि का खर्च तो देना ही पड़ता है। सवारी न मिले तो यह खर्च स्वयं बस संचालक को वहन करना पड़ता है। वर्तमान में हालात ऐसे है कि यात्री बसों की किश्त भी नहीं चुका पा रहे हैं।

इंदौर के लिए सबसे ज्यादा परेशानी
क्षेत्र का अधिकांश व्यापार-व्यवसाय में इंदौर से ही संबद्ध है। यहां के लिए चलने वाली यात्री बसों की संख्या भी ज्यादा है। यात्री बसें नहीं होने से सबसे अधिक व्यापारी, विद्यार्थियों को परेशानियां उठाना पड़ रही है। वहीं यहां से भोपाल, उज्जैन, जीरापुर, ब्यावरा, गुना, शुजालपुर रूट पर चलने वाली यात्री बसों की तादाद भी ज्यादा है, लेकिन इन स्थानों के लिए भी यात्री बसें इक्का-दुक्का ही चल रही है।

किराया बढ़ने के बाद भी नहीं चल रही बसें
यात्री मोहन पुष्पद, यशवंत चौहान ने बताया कि सरकार ने कुछ समय पूर्व ही यात्री बसों के किराए में वृद्धि कर दी है। अब कोरोना कर्फ्यू के बाद से शासन ने पूरी क्षमता से यात्रियों को बैठाकर ले जाने की अनुमति दी है। फिर भी बस ऑपरेटर वाहन नहीं चला रहे हैं। उन्हें यात्रियों की परेशानियों से कोई सरोकार नहीं है।
यात्री नहीं मिल रहे
डीजल की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही है। बसों के चलाने में जो खर्च आता है, वह भी नहीं निकल पा रहा है। यात्री भी नहीं मिल रहे हैं। ऐसी दशा में बस संचालक बसें नहीं चला पा रहे हैं।
-सुरेश माहेश्वरी, अध्यक्ष प्रायवेट बस एशोसिएशन सारंगपुर।

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