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कोरोना का कहर:काेराेना से अब तक करीब 50 ने दम ताेड़ा, पर सरकारी आंकड़ों में 18 की माैत

राजगढ़12 दिन पहले
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कोविड-19 के संक्रमण का दौर मार्च से चल रहा है। इस लिहाज से देखा जाए तो मार्च माह से लेकर अब तक जिले में काेराेना वायरस के संक्रमण से करीब 50 लाेगाें की मौत हो चुकी हैं, जबकि सरकारी आंकड़ों में सिर्फ 18 की ही माैत हाेना बताया जा रहा है।
आंकड़ों में यह अंतर इसलिए है क्योंकि जिले का स्वास्थ्य विभाग कोविड-19 से हुई मौत के वही आंकड़े जिले के मान रहा है, जिनका सैंपल जिला चिकित्सालय में एकत्रित हुआ और ऐसे मरीज जो यहां से क्रिटिकल स्थिति में भोपाल, इंदौर या अन्य किसी अस्पताल में रेफर हुए और उनकी मौत हो गयी। इस प्रकार के आंकड़ों को देखा जाए तो जिले में अब तक 18 मरीजों की मौत हाे चुकी है। जबकि जिले में ऐसे इससे ज्यादा मरीजों की माैत हुई है क्योंकि जाे मरीज झालावाड़ या सीधे इंदौर, भोपाल, शाजापुर इलाज कराने गए उनकी माैत हाेने पर जिले के आंकड़ों में शामिल नहीं किया गया है। दूसरी ओर ऐसे भी कुछ मरीज हैं, जो कोरोना वायरस के अटैक से बीमार हुए, बाद में उनकी दूसरी रिपोर्ट निगेटिव आई, लेकिन विभाग ने ऐसे मरीजों की मौत को भी कोरोना के कारण हुई मौत का कारण नहीं माना। ऐसे तमाम बिंदुओं को शामिल किया जाए तो पिछले छह माह में ऐसे करीब 50 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनकी मौत का कारण कहीं न कहीं कोरोना ही है।
दो दिन में फिर 30 नए मरीज सामने आए: कोरोना संक्रमण दिनोंदिन बढ़ रहे हैं। एक दिन पहले कोरोना के दस मरीज सामने आए थे। इनमें से तीन ब्यावरा, एक जीरापुर, एक खिलचीपुर, दो राजगढ़, एक नरसिंहगढ़, एक मरीज सारंगपुर से था। वहीं, अगले दिन बुधवार को बीस नए संक्रमित सामने आए। इनमें से पांच जीरापुर ब्लॉक से हैं, तीन राजगढ़ ब्लॉक, छह ब्यावरा ब्लॉक, तीन पचोर, और तीन पॉजिटिव नरसिंगगढ़ ब्लॉक से हैँ।

इन दो उदाहरणों से समझिए कैसे आ रहा है मौत में अंतर

1. प्रवासी मजदूर की माैत जिला अस्पताल में हुई पर जिले के मृतकों में नही माना
यह मामला, अप्रैल माह के दूसरे सप्ताह का है, महाराष्ट्र से दो मरीज लॉकडाउन लागू होने के कारण पैदल चले थे, इस दौरान उदनखेड़ी के पास पहुंचते ही एक मजदूर की तबीयत बिगड़ गयी थी, अधिक तबीयत बिगड़ने पर उसे जिला अस्पताल में भर्ती किया गया था, इस दौरान एक मजदूर की मौत हो गयी थी, जिसका अंतिम संस्कार जिला अस्पताल प्रबंधन की देखरेख में स्थानीय मुक्तिधाम में कोरोना प्रोटोकाल के तहत ही किया गया था, लेकिन इसे न तो कोरोना के जिले के केस में शामिल किया गया, और न ही यह माना गया कि यह जिले में कोरोना से हुई मौत है।

2. झालावाड़ इलाज के लिए ले गए, इसलिए मौत यहां की सूची में नहीं
मई माह में जीरापुर क्षेत्र के एक गांव के व्यक्ति की तबीयत बिगड़ने पर उसे इलाज के लिए संबंधित परिजन राजस्थान बार्डर से सटे झालावाड़ जिले के सरकारी अस्पताल में लेकर गये थे, इलाज के दौरान संबंधित की मृत्यु हो गयी थी, स्थानीय स्वास्थ्य विभाग ने इसे भी जिले में हुई कोरोना के कारण मौत नहीं माना जबकि हमारा जिला राजस्थान से लगा हुआ है। ऐसे में कई मरीज वहीं इलाज को जाते हैं। यदि ऐसे केस मिलाकर देखा जाए तो पिछले छह माह में 50 से अधिक मौत हो चुकी हैं, जिनके पीछे कारण कहीं न कहीं कोरोना ही है।

बाकी संस्थाओं की ऑडिट रिपोर्ट मिलने पर जाेड़ेंगे
^कोरोना से आज तक 18 लोगों की मौत कोरोना से होना पायी गयी है, 18 लोगों की पुष्टि हो चुकी है। बाकी की संबंधित संस्थाओं से ऑडिट रिपोर्ट प्राप्त होते ही कोरोना के कारण हुई मौत में शामिल करेंगे। ऐसा अनुमान है कि रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद मौत के आंकड़े 30 से अधिक हो सकते हैँ।
-महेंद्र पाल सिंह, जिला महामारी अधिकारी, जिला राजगढ़
राहत: जिले में रिकवरी रेट 60 प्रतिशत से अधिक है।​​​​​​​

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