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अस्पताल का हाल:40 स्पेशलिस्ट में से 38 पद खाली, दो भरे तो एक को सीएमएचओ का प्रभार, दूसरे फरार

राजगढ़एक महीने पहलेलेखक: श्रीनाथ दांगी
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स्टाफ की कमी के चलते इस तरह चलते-फिरते मरीजों का इलाज करने के लिए मजबूर हैं डाॅक्टर। - Dainik Bhaskar
स्टाफ की कमी के चलते इस तरह चलते-फिरते मरीजों का इलाज करने के लिए मजबूर हैं डाॅक्टर।
  • आठ मेडिकल अधिकारी गायब, जाे बचे उनमें से कुछ ही कर रहे ड्यूटी

कोरोना संक्रमण का संकट हाेने के बाद भी जिला अस्पताल में डाॅक्टर व मेडिकल स्टाफ की कमी है। जो तैनात हैं उन्हें भी प्रशासनिक व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंप रखी है। ऐसे में न मरीजों काे समय पर उपचार मिल रहा है और न मौजूद स्टाफ का भार कम हाे पा रहा है। हालत यह है कि पिछले एक महीने से मेडिकल स्टाफ की मदद के लिए राजस्व अमला अस्पताल में तैनात कर रखा है। इसके बाद भी व्यवस्था में सुधार नहीं हो पा रहा है। इसका खामियाजा मरीज व उनके अटेंडर उठा रहे हैं। हालत यह है कि 300 बेड के जिला अस्पताल में 300 से अधिक मरीज कोराेना व कोरोना सस्पेक्टेड है। वहीं मेटरनिटी सहित अन्य वार्ड में भी मरीज भर्ती हैं, जिन्हें भी देखना जरूरी है।

40 में से 38 पद खाली

जिला अस्पताल में इस समय विशेषज्ञ डाॅक्टर के 40 पद स्वीकृत हैं। इसमें से 38 पद सालों से खाली हैं। वहीं दो पद भरे हुए हैं। इसमें से नेत्र विशेषज्ञ डाॅक्टर स्तूपनिक यदू को सीएमएचओ का प्रभार दे रखा है। वहीं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. केके श्रीवास्तव फर्जी अस्पताल को मान्यता देने के आरोप में सालभर से अधिक समय से फरार चल रहे हैं। ऐसे में एक भी विशेषज्ञ डाॅक्टर जिला अस्पताल में मरीजों को सेवाएं नहीं दे पा रहे हैं।
मेडिकल व सपोर्ट स्टाफ की भी है कमी

जिला अस्पताल में स्टाफ नर्स सहित वार्डबाय व अन्य मेडिकल स्टाफ के लिए 275 पद स्वीकृत हैं। इसमें से 162 लोग ही कार्यरत हैं, जबकि 113 पद खाली हैं। इसके चलते चिकित्सकीय कार्य भी ठीक से नहीं हो पा रहा है। वहीं सपोर्ट स्टाफ के लिए 127 पद स्वीकृत हैं। इसमें से 47 लोग ही कार्यरत हैं। वहीं 80 पद रिक्त हैं। इसके चलते अस्पताल की अन्य व्यवस्था भी बढ़ते मरीजों के बीच चरमरा गई है।
कागजों में ज्यादा चिकित्सा अधिकारी लेकिन अस्पताल में नहीं

जिला अस्पताल में चिकित्सा अधिकारी के 23 पद स्वीकृत हैं, लेकिन कार्यरत 26 डाॅक्टर बता रखे हैं, जबकि जिला अस्पताल में पिछले छह साल से छह डाॅक्टर अनुपस्थित हैं। ये डाॅक्टर जिला अस्पताल को छोड़कर दूसरे अस्पताल में नौकरी भी कर रहे हैं, लेकिन इसके बाद भी इन्हें राजगढ़ के जिला अस्पताल में कार्यरत बता रखा है। वहीं एक डाॅक्टर एके सक्सेना पिछले एक साल से फरार हैं। इसके बाद भी इन्हें कार्यरत डाॅक्टरों में गिना जा रहा है। इसके साथ ही दो दंत डाॅक्टर में से एक ही कार्यरत हैं।
कारण... चार डाॅक्टर, आठ नर्सें कोरोना संक्रमित
जिला अस्पताल में स्टाफ की कमी पहले से बनी हुई है। वहीं दूसरी तरफ मौजूद स्टाफ में से भी चार डाॅक्टर कोरोना संक्रमित हाे गए हैं। इसमें दो महिला डाॅक्टर के संक्रमित होने से प्रसूति विंग की व्यवस्था गड़बड़ा गई है। इसके साथ ही एक दो पीजीएमओ डाॅक्टर के संक्रमित होने से ड्यूटी रोस्टर भी बिगड़ गया। वहीं आठ स्टाफ नर्स भी कोरोना संक्रमित हो गई हैं। इसके चलते मरीजों का इलाज करने में असुविधा हो रही है।
यह भी... एडीएम लगा रहे ड्यूटी फिर भी छह डाॅक्टर नहीं दे रहे सेवा
कोरोना संक्रमण के बीच स्टाफ की कमी को दूर करने के साथ ही मौजूद स्टाफ से काम लेने के लिए एडीएम केसी नागर सहित एसडीएम व तहसीलदार पिछले 20 दिनों से अस्पताल में ड्यूटी कर रहे हैं। यहां डाॅक्टर व मेडिकल स्टाफ की ड्यूटी लगाने के साथ ही अन्य प्रबंधकीय कार्य राजस्व अमला ही संभाल रहा है।

इसके बाद भी अस्पताल के 6 डाॅक्टर न तो वार्ड में ड्यूटी दे रहे हैं और न ही इमरजेंसी सेवाएं। इसमें से कुछ डाॅक्टराें ने बीमारी का बहाना बनाया तो किसी ने पद व जिम्मेदारी का, जबकि इस समय हेल्थ विभाग के टीकाकरण को छोड़कर अन्य सभी सेवाएं न के बराबर हैं, क्योंकि कोरोना संक्रमण को रोकना और संक्रमितों का इलाज करना प्राथमिकता है।

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