संरक्षण जरूरी:ऑक्सीजन देने वाले पेड़ों की सुरक्षा और संरक्षण के प्रति सजग नहीं लोग

नरसिंहगढ़6 महीने पहले
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  • पेड़ाें की सुरक्षा के बजाय कहीं आग लगा देते हैं तो कही पॉलीथिन बांध रहे

पेड़ों के रखरखाव को लेकर स्थानीय स्तर पर आम लोग सजग नहीं हैं। अभी भी पेड़ों के प्रति उपेक्षा और लापरवाही का भाव ज्यादा है। सुखद बात यह है कि युवा और पर्यावरण कार्यकर्ता इसके प्रति संवेदनशील हैं। परेशान करने वाला पहलू यह है कि ज्यादातर आम लोग, जिनमें महिलाओं की बड़ी संख्या है, पेड़ों की सुरक्षा को लेकर बिल्कुल भी जागरूक नहीं हैं।

यही वजह है कि एक तरफ पर्यावरण प्रेमी हर वर्ष मेहनत करके नए पौधे लगाते हैं तो दूसरी तरफ आम लोग पुराने पेड़ों को कहीं आग लगाकर, कहीं कील ठोक कर तो कहीं उनकी जड़ों को काटकर सुखा रहे हैं। पिछले 5 सालों में नगरीय क्षेत्र में इन्हीं तरीकों से 100 से ज्यादा पुराने हरे-भरे पेड़ों को नष्ट कर दिया गया। सबसे बड़ी बात यह कि ज्यादातर मामलों में पेड़ों को सिर्फ इसलिए खत्म किया गया कि लोगों के मन में यह भ्रम था कि पेड़ कभी भी गिर जाएंगे और उनके नीचे दबने से लोगों की मौत हो जाएगी।

उससे भी बड़ी बात यह है कि पिछले 15 सालों में हरे पेड़ों को काटने के मामले में स्थानीय प्रशासन या वन विभाग ने कभी भी कोई भी बड़ी कार्रवाई नहीं की। केवल संबंधित को नोटिस देकर छोड़ दिया गया। इस मामले में नपा सीएमओ राजेंद्र वर्मा का कहना है कि हमारी टीम को जब भी पेड़ों के नुकसान की जानकारी मिलती है, कार्रवाई की जाती है।

शाखाओं पर पॉलीथिन बांधने से रुक रहीं बरगद की सांसें
श्री बैजनाथ बड़ा महादेव शिवालय के पार्वती मंदिर के सामने एक पुराने बरगद के पेड़ की जटाओं पर लोग पिछले लगभग 10 वर्षों से पॉलिथीन बांध रहे हैं। पर्यावरण प्रेमी संगठन कई बार इन पॉलिथीन को काट कर हटा चुके हैं। लोगों को यह भी बताया जा चुका है की मन्नत के लिए सूती धागों का प्रयोग किया जाए ना कि पॉलिथीन का।

वर्तमान में पॉलिथीन नहीं बांधने के संदेश का एक फ्लेक्स भी बरगद पर लगाया हुआ है लेकिन लोग अभी भी पॉलिथीन बांधने से नहीं चूक रहे हैं। इससे बरगद की जटाओं को पोषण मिलना बंद हो जाता है और जिस जगह से उन्हें बांधा जाता है वहां से वे सूख कर टूट जाती हैं। इससे पेड़ का विकास नहीं हो पा रहा है।

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