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प्रवेश प्रक्रिया में परेशानी:मैपिंग के कार्य में पिछड़ रहे निजी स्कूल जनशिक्षक समीक्षा बैठक में पूछेंगे दिक्कत

राजगढ़16 दिन पहले
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जनपद शिक्षा केंद्र में समीक्षा बैठक में मौजूद विभाग के अधिकारी व जन शिक्षक। - Dainik Bhaskar
जनपद शिक्षा केंद्र में समीक्षा बैठक में मौजूद विभाग के अधिकारी व जन शिक्षक।
  • 31 जुलाई तक करना है स्कूलों को छात्रों की मैपिंग का काम

स्कूलों में प्रवेश के लिए नामांकित छात्रों को पोर्टल पर दर्ज कर मैपिंग का कार्य 31 जुलाई तक निजी और सरकारी स्कूलों को पूरा करना है। सरकारी स्कूलों में यह काम 10% तो निजी स्कूलों में करीब 30% तक शेष रह गया है। नए शिक्षण सत्र को लेकर आयोजित समीक्षा बैठक में यह बात सामने आई। बैठक में तय किया गया कि जो निजी स्कूल मैपिंग के कार्य में पिछड़ रहे हैं उनकी संबंधित जन शिक्षक समीक्षा बैठक करेंगे और निजी स्कूल संचालकों से मैपिंग कार्य में आ रही परेशानी पूछेंगे।

समीक्षा बैठक में यह बात सामने आई कि मेपिंग के लिए समग्र आईडी कई छात्रों की ना होने से परेशानी आ रही है। ग्रामीण क्षेत्र में जनपद द्वारा और शहरी क्षेत्र में नगरपालिका समग्र आईडी बनाती है। इसलिए संबंधित जनपद और नगर निकाय से समग्र आईडी से वंचित छात्रों की सूची मांगी जा रही है।

जनपद शिक्षा केंद्र ब्यावरा में विभागीय कार्ययोजना पर समीक्षा बैठक में जिला परियोजना समन्वयक विक्रम सिंह राठौड़, बीआरसी नागेंद्र सिंह गुर्जर, बीएसी ओम प्रकाश शर्मा, अभिषेक दिक्षित, एमआईएस हरीश शिवहरे, बीजीसी सोना अवस्थी, सब इंजीनियर आशीष लोवानियां व 12 जन शिक्षा केंद्र से 24 जन शिक्षक की उपस्थिति में योजना वार समीक्षा की गई। समय सीमा में कार्य पूर्ण कराए जाने के लिए जनशिक्षकों को निर्देश दिए गए।

10 स्कूलों को मिली छोटे नाप की गणवेश: समीक्षा बैठक में सामने आया कि ब्लॉक के 10 स्कूलों को छात्रों के हिसाब से छोटे नाप की गणवेश मिली हैं। इसके लिए संबंधित समूह की महिलाओं को गणवेश वापस कर दोबारा सिलकर देने के लिए कहा गया है। बता दें ब्लाक में कुल 326 शासकीय मिडिल स्कूल हैं, जिनमें से 4 स्कूलों में गणवेश वितरण नहीं हो पाया है। वहीं 109 निजी स्कूलों में आरटीई के तहत 1100 फॉर्म पोर्टल पर अपलोड हुए हैं, जिनका सत्यापन होना है।

अब ठेकेदार स्कूलों तक पहुंचाएगा पुस्तकें
पिछले कई सालों से सरकारी स्कूल के शिक्षकों को छात्रों की पुस्तकों के लिए जन शिक्षा केंद्रों पर भीड़भाड़ के रूप में देखा जाता था। यहां से अपने-अपने स्कूलों के लिए शिक्षक बच्चों की पुस्तकें लेकर कई साधनों से बमुश्किल स्कूलों तक पहुंचते थे। इसमें उनका बहुमूल्य समय भी खर्च होता था। लेकिन अब राज शिक्षा केंद्र ने इस व्यवस्था को खत्म कर नई पहल की है।

इसके लिए जिला स्तर पर पुस्तक परिवहन करने वाले ठेकेदारों के टेंडर भी कराए जा रहे हैं। बीआरसी नागेंद्र गुर्जर ने बताया कि नई व्यवस्था में अब राज्य शिक्षा केंद्र से सीधे बीआरसी कार्यालय में पुस्तकें आएंगी और यहां से ठेकेदार जन शिक्षा केंद्र के स्कूलों तक पुस्तक पहुंचाएंगे। पहले शिक्षकों को बीआरसी कार्यालय से ले जानी पड़ती थी।

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