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रुद्राक्ष महोत्सव स्थगित होने की इनसाइड स्टोरी:तय था कि 15 लाख भक्त जुटेंगे ही,11 लाख तो रुद्राक्ष ही बंटना थे; प्रशासन अवॉइड करता रहा

सीहोर5 महीने पहले

सीहोर में रुद्राक्ष महोत्सव का स्थगित होना सरकार के लिए गले की फांस बनता जा रहा है। सरकार पर विपक्ष तो हमलावर है ही, भाजपा नेता भी इसे लेकर सरकार से सवाल पूछने लगे हैं। श्रद्धालु भी लगातार सोशल मीडिया पर अपना गुस्सा दिखा रहे हैं। सबका एक ही सवाल है कि आयोजन के बारे में एक महीने पहले ही पता चल गया था।

एक सप्ताह में 15 लाख लोग आने वाले थे। अब ऐसी क्या विपदा आई कि इसे रोकने के लिए पं. प्रदीप मिश्रा पर दबाव डाला गया। सरकार, इस सवाल का अब तक कोई जवाब नहीं दे पाई है। प्रशासन तो 28 फरवरी को ट्वीट कर व्यवस्था दुरुस्त करने को लेकर अपनी पीठ थपथपा चुका है। दैनिक भास्कर आपको बता रहा है कैसे 15 दिन की तैयारी 8 घंटे में ध्वस्त हुई...

15 फरवरी के बाद तेजी से प्रचार-प्रसार शुरू हुआ
लगातार दूसरे साल 7 दिवसीय रुद्राक्ष महोत्सव का आयोजन होना था। 10 हजार वर्गफीट में पंडाल लगाया गया था। शिव महापुराण कथा और अन्य धार्मिक आयोजन होने थे। महोत्सव में सात दिन के अंदर 11 लाख से अधिक रुद्राक्ष बांटे जाने थे। यह बात तेजी से भक्तों तक पहुंच रही थी। 20 फरवरी को शहर के बड़ा बाजार स्थित अग्रवाल पंचायती भवन में दो दर्जन से अधिक महिला मंडलों की बैठक भी हुई।

नेपाल से मंगवाए गए थे 11 लाख 51 हजार रुद्राक्ष
28 फरवरी की सुबह साढ़े 7 बजे से रुद्राक्ष अभिमंत्रित किए जाने थे। भक्तों को बांटने के लिए 11 लाख 51 हजार रुद्राक्ष नेपाल के मुक्ति नारायण से मंगवाए गए थे। व्यवस्थाओं के लिए 2000 कार्यकर्ताओं की टीम खड़ी की गई थी। 3500 महिलाओं की 60‎ टीमें भी आयोजन की‎ व्यवस्थाएं देख रही थीं। सीहोर से बाहर के लोग भी शामिल थे।

भक्तों के खाने की व्यवस्था पंडाल में थी। सुबह 7 से रात 10 बजे तक खाना मिले, ऐसी व्यवस्था की गई थी। कथा का समय दोपहर 1 बजे से शाम 4 बजे तक तय रखा गया था। शाम 6 बजे आरती के बाद 7 बजे से मुंबई, नैनीताल, पुणे के कलाकार प्रस्तुतियां देने वाले थे। तीन पंडाल बनाए गए थे, इनमें करीब 30 हजार भक्तों के रुकने की व्यवस्था थी।

आयोजन स्थल पर था ऐसा नजारा।
आयोजन स्थल पर था ऐसा नजारा।

आयोजन के एक दिन पहले ही होटल, लॉज फुल हुए
रुद्राक्ष महोत्सव‎ की शुरुआत वैसे तो 28 फरवरी से होना थी, लेकिन इसमें शामिल होने के लिए एक दिन पहले‎ ही बड़ी संख्या में‎ श्रद्धालु पहुंच गए थे। सभा स्थल पर बने पंडाल तो फुल हो ही गए थे। शहर की सभी होटलें और‎ धर्मशालाएं भी बुक हो चुकी थीं।‎ पहले‎ चरण में सुबह 9 बजे तक रुद्राक्षों‎ का अभिषेक किया जाना था।‎ मंदिर परिसर क्षेत्र में जाने के लिए आयोजन समिति ने भटोनी‎ गेट से प्रवेश द्वार बनाया था। करीब 60 एकड़ क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर पार्किंग‎ की व्यवस्था भी की गई थी।

आयोजन स्थल पर तीन पंडाल बनाए गए थे।
आयोजन स्थल पर तीन पंडाल बनाए गए थे।

आयोजन वाले दिन 28 फरवरी को यह घटनाक्रम हुआ
तय कार्यक्रम के अनुसार सोमवार सुबह 7 बजे से इस 7 दिवसीय महोत्सव की शुरुआत हुई। श्रद्धालुओं के लिए रुद्राक्ष को अभिमंत्रित किए गए। दोपहर 1 बजे कथा शुरू हो गई। भक्तों का तांता लगातार बढ़ता रहा। हालात यह हो गए कि भोपाल-इंदौर स्टेट हाईवे के दोनों ओर 25 किमी तक वाहन फंस गए। दोपहर 2 बजे हालात ऐसे बने की टू-व्हीलर तक को निकलने के लिए जगह नहीं मिल रही थी।

दोपहर तक पंडाल पर दो से ढाई लाख लोग पहुंच चुके थे। अफरा-तफरी की स्थिति को देख कथावाचक पं. प्रदीप मिश्रा भावुक हो गए। उन्होंने व्यास गादी पर बैठे-बैठे कहा- ऊपर से बार-बार दबाव आ रहा है, इसलिए कथा स्थगित कर रहा हूं। आपसे हाथ जोड़कर विनती करता हूं कि अपने घर जाकर ऑनलाइन माध्यम से ही कथा सुनें।

इंदौर-भोपाल हाईवे पर दोपहर से शाम तक यही हाल रहा।
इंदौर-भोपाल हाईवे पर दोपहर से शाम तक यही हाल रहा।

सीहोर कलेक्टर का 28 फरवरी को किया गया ट्वीट
कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा द्वारा 28 फरवरी से भव्य रुद्राक्ष महोत्सव आयोजित किया गया था। इस आयोजन में देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु सीहोर पहुंचे। श्रद्धालुओं और वाहनों की संख्या अपेक्षा से कहीं अधिक होने के कारण शुरू में जाम की स्थिति निर्मित हुई, लेकिन कलेक्टर चंद्रमोहन ठाकुर और एसपी मयंक अवस्थी ने व्यवस्था को सुचारु बनाया। कलेक्टर और एसपी खुद मोर्चा संभालते हुए माइक से लगातार अनाउंस करते रहे और व्यवस्था में लगे अधिकारी-कर्मचारियों को निर्देश देते रहे। सभी व्यवस्थाएं सुचारु रूप से चलने लगी।

सीहोर कलेक्टर व्यवस्था संभालने मैदान में उतरे।
सीहोर कलेक्टर व्यवस्था संभालने मैदान में उतरे।

महोत्सव के स्थगित होने के बाद गरमाई राजनीति
सीहोर के लोकल नेता तो इसे लेकर आमने-सामने आ ही गए थे। मंगलवार सुबह मामले में 'सरकार' की एंट्री भी हो गई। गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने व्यवस्थाओं को लेकर कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा से बात की। गृहमंत्री ने कहा- दंडवत प्रणाम कर रहा हूं महाराज, निवेदन कर रहा था प्रशासन की कोई दिक्कत तो नहीं है। कोई बात होगी तो बताइएगा, कोई भी आवश्यकता हो। आपके आशीर्वाद से ही सरकार है महाराज। जवाब में पंडितजी ने कहा कि आज सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त हैं, अब कोई दिक्कत नहीं है। पंडित मिश्रा ने गृहमंत्री से एक बार मंदिर आने को कहा। जवाब में गृहमंत्री ने कहा कि वे जरूर आएंगे।

गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने पंडित मिश्रा से की बात।
गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने पंडित मिश्रा से की बात।

कुछ देर बाद कमलनाथ ने इवेंट को लेकर सरकार को घेरा
गृहमंत्री के बयान के बाद पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ट्वीट कर सरकार को घेरा। उन्होंने लिखा- महाशिवरात्रि की पूर्व संध्या, शिवराज जी की सरकार, शिवराज जी का क्षेत्र और शिव ज्ञान की गंगा बहाने वाला 'शिव महापुराण व रुद्राक्ष महोत्सव' का 7 दिवसीय महाआयोजन दबाव डालकर पहले दिन ही स्थगित करा दिया गया, क्योंकि प्रशासन लाखों श्रद्धालुओं की व्यवस्था संभालने में असफल साबित…? एक कथावाचक को आंखों में आंसू भरकर व्यासपीठ से इस सच्चाई को श्रद्धालुओं को बताना पड़े तो इससे शर्मनाक प्रदेश के लिए कुछ और हो नहीं सकता है… जो खुद को धर्मप्रेमी बताते हैं यह है, उनकी सरकार की हकीकत…. बड़ी संख्या में श्रद्धालु नाराज, प्रदेश के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ।

शाम होते-होते विजयवर्गीय ने फोड़ा चिट्‌ठी बम
कैलाश विजयवर्गीय ने कहा- भोपाल में इज्तिमा का आयोजन होता है। लाखों लोग शामिल होते हैं। कई मंत्रियों को जाम में फंसना पड़ता है, लेकिन कभी सुनाई नहीं दिया कि इज्तिमा को रोक दिया गया है। क्या सीहोर का प्रशासन इतना नकारा था कि इस आयोजन की जानकारी होने के बाद भी व्यवस्थाएं नहीं जुटाई जा सकीं। क्या सीहोर का प्रशासन इतना नाकारा था कि भांप नहीं सका कि 11 लाख रुद्राक्ष का अनुष्ठान है तो श्रद्धालुओं की आवाजाही भी रहेगी। क्या सीहोर के प्रशासनिक अमले की इतनी हिम्मत है कि वो इतना बड़ा निर्णय कर लें। शिवराजजी ऐसे अनगिनत सवालों के जवाब नहीं मिल रहे हैं।

12 दिन पहले से ही पंडित जी ने सोशल मीडिया में पोस्ट कर जानकारी देनी शुरू कर दी थी

12 दिन पहले किया था पोस्ट।
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महोत्सव से 10 दिन पहले भी पोस्ट कर दी थी जानकारी।
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