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इच्छाशक्ति से हारेगा कोरोना:72 की उम्र में फेफड़ों में 75% इंफेक्शन, पर आत्मविश्वास से इछावर के छोटे अस्पताल में ही ठीक हो गए

सीहोरएक महीने पहले
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  • गंभीर कोरोना संक्रमण होने के बावजूद अपनी इच्छाशक्ति से कोरोना को हराने वालों की जांबाज कहानियां
  • रिटायर्ड शिक्षक ने बच्चों को सिखाया आत्मविश्वास का सबक याद कर जीती कोरोना से जंग

जब स्कूल में बच्चों को पढ़ाता था तो यह हमेशा सिखाता था कि हमेशा आत्म विश्वास रखना चाहिए। आत्म विश्वास से ही हम अपनी मंजिल को आसानी से पा लेते हैं। पिछले दिनों जब मुझे कोरोना हुआ तो मैंने इसी सबक को याद रखा था जिसे कभी बच्चों को पढ़ाता था। बस मैंने ठान ली कि इस महामारी से लड़ना है और लड़कर जीतना भी है।

इस तरह से हुआ भी यही, मैंने इछावर अस्पताल में भर्ती रहकर इस लड़ाई को लड़ा । करीब 20 दिन पहले की बात है जब मुझे पहली बार बुखार आया। इसके बाद मुझे सर्दी जुकाम भी हो गया। अगले ही दिन मैं सिविल अस्पताल इछावर गया और वहां पर डॉक्टर को दिखाया। उन्होंने जांच के लिए कहा और दवाएं दीं। बाद में जांच रिपोर्ट आ गई जिसमें मैं पॉजिटिव था। मुझे काफी परेशानी होने लगी। डॉक्टरों ने एक और जांच कराई।

यह रिपोर्ट चौंकाने वाली थी। इसमें मेरे फेफड़े 75 फीसदी तक संक्रमित थे। 72 साल की इस उम्र में भी मैंने इस बात को गंभीरता से ना लेते हुए अस्पताल में इलाज कराने पर जोर दिया। मैंने डॉक्टर से जब सलाह ली तो उन्होंने चेकअप के बाद बताया कि आप सीहोर में किसी और डॉक्टर को भी दिखाएं। इसके अलावा यह समझाइश भी दी कि भोपाल में जाकर भर्ती हो जाएं।

मैंने इछावर के डॉक्टरों से कहा कि मुझे कहीं नहीं जाना है। इसलिए आप जो दवा देना है वह दीजिए मैं यहीं भर्ती होकर इलाज कराना चाहता हूं। डॉक्टर ने मुझे भर्ती कर लिया और उन्होंने दवा शुरू कर दी। मैंने दवा ली और इस बीच जब ऑक्सीजन लेवल गिरने लगा तो ऑक्सीजन लगवाई। इस बीच मेरे पास केवल एक ही उपाय था कि मुझे इस महामारी से जीतना है।

इसके लिए फिर से वही पुराना सबक याद आया जिसे बच्चों को पढ़ाया करता था कि आत्म विश्वास के बिना कुछ नहीं है। इसी बीच मैंने ठाना कि अब यहीं पर इसका इलाज कर ठीक होना है। 10 दिन तक इछावर अस्पताल में भर्ती रहा और इसके बाद यहां से छुट्टी दे दी गई ।
इसलिए इछावर में इलाज कराने का लिया फैसला
इछावर में इलाज कराने का सबसे बड़ा उद्देश्य यह भी था कि स्थानीय होने के कारण यहां पर परिवारजन भी हाल चाल जान सकते थे। साथ में बाहर जाना नहीं पड़ा। अस्पताल इछावर साफ-सुथरा है। यहां पर बेहतर सफाई के इंतजाम हैं जो बाहर के अस्पतालों में मुझे नहीं मिलते। इसलिए भी आसानी से बेहतर इलाज हो सका। यहां के डॉक्टर बहुत अच्छे हैं। इसलिए मेरा इलाज उन्होंने बहुत अच्छे से किया। यदि बाहर के किसी अस्पताल जाता तो वहां पर परेशान हो जाता।

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