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सर्वे शुरू होगा:सीहोर, नसरुल्लागंज और रेहटी में ऑक्सीजन प्लांट लगाने की स्वीकृति, आष्टा-इछावर को इंतजार

सीहोरएक महीने पहले
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  • अभी जिले के अस्पतालों को रोज 140 ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत जबकि मिल रहे 80-100
  • जिला अस्पताल में प्लांट के लिए बेस बनाने का काम पूरा हो चुका है

अस्पतालों में मरीजों के इलाज के लिए ऑक्सीजन की जरूरत है और इसकी इस समय किल्लत बनी हुई है। इस समस्या को देखते हुए जिले के तीन अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट लगाए जाना हैं जिसके लिए स्वीकृति मिल चुकी है। जिला अस्पताल में बेस बनाने का काम भी पूरा हो चुका है। इसी तरह इछावर और आष्टा अस्पतालों में प्लांट लगाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है लेकिन अभी मंजूरी नहीं मिली है। इसकी मंजूरी मिलने के बाद सर्वे का काम शुरू हो जाएगा। ऑक्सीजन की कमी को देखते हुए प्रदेश सरकार ने यह निर्णय लिया कि प्रमुख अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट लगवा दिए जाएं। इसी कड़ी में सभी जगह इसके लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं। अभी जो ऑक्सीजन आ रही है वह पर्याप्त नहीं है। यही कारण है कि मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सीहोर , नसरुल्लागंज और रेहटी में प्लांट लगाने की स्वीकृति मिल चुकी है। इस समय जिले के अस्पतालों को रोज 140 ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत है जबकि 80 से 100 सिलेंडर ही मिल पा रहे हैं।

फायदा ये... अगर अंचलाें में ऑक्सीजन की व्यवस्था हो जाएगी तो सीहोर पर भार नहीं आएगा
जहां स्वीकृति मिल चुकी वहां इस तरह होगा काम

1. जिला अस्पताल सीहोर: सबसे पहला ऑक्सीजन प्लांट सीहोर जिला अस्पताल में लगाया जा रहा है। पिछले दिनों जब इसका बेसमेंट ही तैयार नहीं हुआ था तो नगर के समाजसेवी अखिलेश राय ने बेस को तैयार कराने के लिए इंदौर से विशेष टीम बुलाई थी जिसने इस बेसमेंट को दो दिन में तैयार कर दिया था। अब प्लांट को लगाने का इंतजार हो रहा है।

  • क्या होगा फायदा: जिला अस्पताल में जो ऑक्सीजन प्लांट लगाया जा रहा है उससे एक दिन में 600 एलपीएम लीटर प्रति मिनट मिलेगी। यहां पर फिलहाल अस्पताल के कोविड वार्ड की सेंट्रल लाइन को यहां बन रही ऑक्सीजन से जोड़ दिया जाएगा। इसके अलावा स्टोरेज की व्यवस्था भी रहेगी जिससे जिले के अस्पतालों के सिलेंडर भी भरे जा सकेंगे।

2. नसरुल्ल्लागंज अस्पताल: यहां पर भी ऑक्सीजन का प्लांट लगाया जाना है। इसकी क्षमता 300 एलपीएम की रखी गई है। इस प्लांट के प्लान को हरी झंडी मिल चुकी है। अब पीआईयू को काम शुरू करना है। पहले सिविल वर्क होगा और बाद में इलेक्ट्रिक का काम होना है। बाद में प्लांट लगाया जाएगा।

  • फायदा: नसरुल्लागंज में जो कोरोना के मरीज हैं उनके लिए करीब 25 सिलेंडर ऑक्सीजन की प्रतिदिन जरूरत पड़ती है। अभी ऑक्सीजन सीहोर से मुहैया कराई जा रही है। प्लांट लगने पर वहीं पर यह सुविधा उपलब्ध हो जाएगी।

3. रेहटी अस्पताल: रेहटी अस्पताल में भी ऑक्सीजन का प्लांट लगाया जाना है। इसके लिए भी स्वास्थ्य विभाग ने स्वीकृति दे दी है। यहां पर 200 एलपीएम का प्लांट लगाया जाना है जिसके लिए बाकी सभी तरह की प्रक्रिया पूरी हो गई है। अब इसका काम शुरू होगा।

  • फायदा: रेहटी में भी काफी मरीज अस्पताल आते हैं। प्लांट लगने से यह फायदा होगा कि यहां पर अब सीहोर पर निर्भर नहीं होना होगा। इसी तरह सलकनपुर देवी धाम में हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं। कभी भी यदि यहां पर ऑक्सीजन की जरूरत होगी तो यहीं से पूरी हो सकेगी।

आष्टा और इछावर के लिए 500 एलपीएम का प्लान
जिले के आष्टा सिविल अस्पताल में भी ऑक्सीजन प्लांट की जरूरत है। अभी यहां पर बाहर से ऑक्सीजन ली जाती है। यहां की खपत करीब 15 से 20 सिलेंडर है। यहां के लिए 300 एलपीएम का प्लांट स्वीकृति के लिए भेजा गया है। इसी तरह इछावर अस्पताल के लिए भी 200 एलपीएम के प्लांट का प्लान भेजा गया है। इनकी स्वीकृति मिलने के बाद काम शुरू हो जाएगा।
परेशानी ये कि खपत की तुलना में नहीं मिलती है ऑक्सीजन
जितनी खपत है उस हिसाब से ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है। वर्तमान की बात करें तो हर रोज जिले में करीब 140 ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत है जबकि यहां पर औसतन 80 से 90 ऑक्सीजन सिलेंडर ही मिल पाते हैं। जिला अस्पताल की बात करें तो यहां पर प्रतिदिन करीब 80 सिलेंडर ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। इसी तरह आवासीय कोविड केयर सेंटर पर 20 सिलेंडर की खपत है। इस संबंध में सीएमएचओ डॉ. सुधीर डेहरिया ने बताया कि जिला अस्पताल के ऑक्सीजन प्लांट का काम जल्दी ही पूरा कराया जाएगा।

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