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  • Champion Players Will Be Able To Open Academy, Sai Will Give 10 Lakh Rupees, So That Talent Can Emerge From Small Places

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नवाचार:चैम्पियन खिलाड़ी खोल सकेंगे एकेडमी, साई देगा 10 लाख रुपए, ताकि छोटी जगहों से उभरकर आएं प्रतिभाएं

सीहोर10 महीने पहले
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  • एक हजार जिलों में खुलेंगे खेलो इंडिया सेंटर, भारतीय खेल प्राधिकरण ने मांगे आवेदन, हर साल 300

विवेक दोहरे, जमीनी स्तर से खेल प्रतिभाएं तलाशने और पूर्व चैम्पियन खिलाड़ियों की आय का सोर्स तय करने के लिए भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) चार साल में एक हजार छोटे खेलो इंडिया सेंटर बनाने जा रहा है। पहले साल में 100 जिलों में सेंटर बनाने की योजना है। इसके बाद हर साल 300 सेंटर खोले जाएंगे। इन सेंटर का संचालन पूर्व चैम्पियन खिलाड़ी या एनआईएस कोच करेंगे। सीहोर जिले में दो सेंटर का प्रस्ताव भेज सकते हैं। इस योजना के पहले चरण में साई ने सेंटर चुनने के लिए राज्यों से प्रस्ताव मंगाए हैं। फिर सर्वश्रेष्ठ का चयन कर साई के क्षेत्रीय कार्यालय को भेजेंगे। जिला खेल अधिकारी पूर्णिमा जोशी ने बताया कि जिले के इच्छुक पूर्व खिलाड़ी 20 जुलाई तक जिला खेल एवं युवक कल्याण कार्यालय में आवेदन जमा कर सकते हैं। इस संबंध में और अधिक जानकारी कार्यालयीन समय में जिला खेल परिसर कार्यालय से ली जा सकती है। 
कोचिंग पर एक सेंटर तीन लाख रुपए तक खर्च कर सकता है : साई पूर्व चैम्पियन खिलाड़ी या कोच को दस लाख रुपए देगी। इसमें एक साथ पांच लाख रुपए सेंटर खोलने के लिए दिए जाएंगे जबकि दूसरे पांच लाख रुपए अगले चार सालों के लिए दिए जाएंगे। इनमें से खिलाड़ी/कोच अपने सेंटर में जरूरत पड़ने पर तीन लाख रुपए सैलरी तक के असिस्टेंट कोच नियुक्त कर सकता है। शेष दो लाख रुपए की राशि सेंटर के रखरखाव, खेल उपकरण, खेल के आयोजन और खेल किट के लिए खर्च की जाएगी। सेंटर संचालक नए खिलाड़ियों से न्यूनतम फीस भी ले सकता है। चार सालों के बाद पूर्व चैम्पियन खिलाड़ियों की पहचान स्थापित प्रशिक्षक के रूप में हो जाएगी। ऐसे में वे खुद के संसाधनों से केंद्र का संचालन जारी रख सकेंगे। पूर्व खिलाड़ी विकासखंड एवं जिला स्तर पर सरकारी या गैरसरकारी स्कूल, कॉलेज, संस्था व अन्य खेल इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें एमओयू साइन करना होगा।
इन वर्गों में खिलाड़ियों को रहेगी अपना सेंटर खोलने की अनुमति : खेलो इंडिया के मेडलिस्ट भी सेंटर खोल सकते हैं। पूर्व चैम्पियन की पहचान करने के लिए एक व्यवस्था तैयार की गई। ताकि ये चैम्पियन या तो खुद की अकादमी खोलकर उसे संचालित करें या फिर कोच के रूप में काम करें। पहली प्राथमिकता उन खिलाड़ियों को दी जाएगी, जिन्होंने मान्यता प्राप्त इंटरनेशनल टूर्नामेंट में नेशनल फेडरेशन की ओर से हिस्सा लिया हो। इसके अलावा सीनियर नेशनल चैम्पियनशिप या खेलो इंडिया के मेडलिस्ट भी अकादमी खोलने के लिए आवेदन कर सकते हैं। 

सिर्फ ओलिंपिक में खेले जाने वाले 15 खेलों की ट्रेनिंग मिलेगी
एक सेंटर में एक खेल की ट्रेनिंग मिलेगी। केवल ऐसी संस्था ही 3 खेलों का प्रस्ताव भेज सकती हैं, जो 5 सालों से खेलों के क्षेत्र में काम कर रही है। इन सेंटर में वे 15 खेल होंगे, जो ओलिंपिक में खेले जाते हैं। इनमें तीरंदाजी, एथलेटिक्स, बॉक्सिंग, बैडमिंटन, साइक्लिंग, फेंसिंग, हॉकी, जूडो, रोइंग, शूटिंग, स्वीमिंग, टेबल टेनिस, वेटलिफ्टिंग, कुश्ती, फुटबॉल हैं।

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