पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

खेती-किसानी:खाद व बीज की बढ़ी कीमतों के बीच किसान बोवनी करने के काम में जुटे

सीहोर/ श्यामपुरएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • हर रोज किसान बीज खरीदने के लिए सीहोर के बाजारों में भी पहुंच रहे हैं

इस बार किसानों को सोयाबीन का बीज काफी महंगा मिल पा रहा है। महंगा भी इस कदर कि प्रति क्विंटल 9 से 10 हजार रुपए में यह मिल पा रहा है। ऐसे में किसानों के सामने बड़ा संकट यह है कि वे सोयाबीन की बोवनी करें या नहीं।

बोने के बाद यदि अधिक बारिश हो गई तो बीज के सड़ने का खतरा बना रहता है। यदि किसी कारणवश दूसरी बार बोवनी करना पड़ी तब तो उनकी हालत ही खराब हो जाएगी। बस इसी डर के कारण इस बार किसान सोयाबीन की फसल लेने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है।

पिछले सालों से देखा गया है कि हर साल सोयाबीन की फसल खराबहो रही है। पिछले साल की बात करें तो फसल बहुत अच्छी लगी थी लेकिन इसके बाद पौधे की ग्रोथ तो काफी अधिक हो गई लेकिन फली नहीं आई। इससे किसानों के खेतों के खेत बेकार हो गए थे।

पानी भरने से भी नुकसान: इसके बाद अधिक बारिश हो जाने से भी फसल को नुकसान हुआ था। निचले क्षेत्रों में अधिक पानी भराव की स्थिति बनी। इस कारण से फसल सड़ने लगी थी। इससे भी किसानों को नुकसान उठाना पड़ा था।

एक लाख से अधिक रकबा: इस बार जिलेभर में खरीफ का रकबा घटा है। कृषि विभाग ने भी सोयाबीन की जगह दूसरी फसलों का रकबा बढ़ाया है। इस तरह से पिछले साल की तुलना में इस साल सोयाबीन का रकबा कम है। इस बार क्षेत्र में कृषि विभाग ने खरीफ फसल का रकबा सीहोर व श्यामपुर में एक लाख 18 हजार हेक्टेयर का निर्धारित किया है।

अभी भी नहीं लिए जा रहे हैं सैंपल: बाजारों में इस समय सैंपल लेने का काम प्रशासन के अमले को करना चाहिए। जब बीज की इस कदर किल्लत है तो फिर दुकानों पर जाकर इसे चेक करना चाहिए कि प्रमाणिक बीज है भी या फिर नकली बीज बेचा जा रहा है। जब किसान बीज खरीद लेगा और फिर कार्रवाई की जाएगी तो यह समझ से परे है। यदि अभी सख्ती हो जाएगी तो किसान नुकसान से बच सकता है।

बीज के लिए मारामारी
तहसील क्षेत्र में खरीफ फसल की बोवनी के लिए किसानों को खाद और बीज उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। मजबूरी में कई किसानों को आष्टा, सीहोर, विदिशा आदि स्थानों से बीज खरीदना पड़ रहा है। इसी तरह खाद की किल्लत भी बनी हुई है। अभी से ही किसान खाद के लिए परेशान हो रहे हैं। किसान खरीफ फसल की बोवनी के लिए प्रमाणिक बीज के लिए भटक रहे हैं लेकिन उन्हें बीज नहीं मिल रहा है। बीज विक्रेता इसका लाभ उठाकर महंगे दामों में बेच रहे हैं।

खेतों में की जा रही तैयारी
किसान इस समय बोवनी की तैयारी करने में जुट गए हैं। यही कारण है कि सीहोर के बाजारों में जो खाद-बीज की दुकानें हैं वहां पर किसानों की भीड़ देखी जा सकती है। इसी तरह दवाओं की दुकानों पर भी लोग जा रहे हैं और आने वाली फसल के लिए जो भी जरूरी दवाएं हैँ उन्हें खरीद रहे हैं।

खबरें और भी हैं...