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कमी या मुनाफे का खेल:बाजार में यूरिया की 1 बोरी लेना है तो... 267 की जगह 310 रु. लगेंगे, उसमें भी 1150 की डीएपी खरीदना जरूरी

सीहोरएक महीने पहले
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  • सहकारी सोसायटियाें से हर किसान को 1 या दो बोरी दी जा रही हैं

किसान इस समय बोवनी में जुटे हैं। जिलेभर में करीब 15 फीसदी बोवनी का काम पूरा भी हो चुका है लेकिन अभी भी किसानों को खाद नहीं मिल पा रहा है। हालत यह है कि यूरिया के लिए किसान सोसायटियों के चक्कर काट रहे हैं पर उन्हें एक या दो बोरी देकर चलता किया जा रहा है। बाजार में यदि किसान खाद खरीदने जाता तो उसे अलग-अलग रेट में खाद मिलता है। यूरिया की बोरी 267 रुपए की जगह बाजार में 310 रुपए देना पड़ रहे हैं। यानि एक बोरी पर 43 रुपए अधिक। इसमें भी शर्त यह होती है कि दो यूरिया की बोरी पर एक बोरी डीएपी लेना जरूरी है। रबी फसल का सीजन आ गया और किसान बोवनी में जुट गए हैं। कई किसानों का कहना है कि वह कई चक्कर सोसायटी के काट चुके हैं लेकिन एक भी यूरिया की बोरी अभी तक नहीं मिल सकी है। मजबूरन बाजार से खाद लेना पड़ रहा है। क्योंकि 10 दिन बाद खाद की जरूरत पड़ेगी। अभी किसान बोवनी के काम में जुटा है। नसरुल्लागंज और बुदनी में लेट बोवनी होगी, इसलिए अभी सीहोर, आष्टा और इछावर में बोवनी का काम किया जा रहा है।

जानिए जिले की डिमांड और अब तक कितना आया खाद

जिले के लिए कुल डिमांड 60 हजार टन है। इसमें से अभी तक 27026 टन खाद आ चुका है। इसमें 20 हजार 11 टन सोसायटियों में पहुंचा है जबकि 6015 टन बाजार में आया है। यानि डिमांड का करीब आधा खाद आ चुका है जबकि बाकी आना है। खाद तो लगातार आता जा रहा है लेकिन जो कालाबाजारी हो रही है, उससे किसान बहुत परेशान हैं। बाजार में महंगे दामों में खाद मिल रही है तो वहीं सोसायटियों में इंतजार करना पड़ रहा है। कुछ को मिल चुकी है तो कुछ को अभी मिलना है।

10 दिन बाद खाद की जरूरत
किसानों का कहना है कि 10 दिन बाद खाद की जरूरत पड़ेगी। समाजसेवी और कृषक एमएस मेवाड़ा का कहना है खाद को लेकर किसान परेशान है। बाजार में उसे महंगे दामों में खाद मिल रहा है। किसान लुट रहा है लेकिन इसे देखने वाला कोई नहीं है।

शिकायत मिलने पर की जाएगी जांच
इस संबंध में कृषि विभाग के डिस्टी डायरेक्टर एसएस राजपूत का कहना है कि खाद लगातार आ रहा है। खाद की कमी नहीं है। बाजार में अधिक रुपए लेने की बात पर उन्होंने कहा कि अभी उनके पास इस तरह की शिकायतें नहीं मिली हैं। यदि खाद के अधिक रुपए लिए जा रहे हैं तो किसान शिकायत करें, जांच कराकर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।​​​​​​​

बाजार में मुनाफे का खेल...

यूरिया की बोरी 310, डीएपी की 1150 की

किसानों की मानें तो बाजार में उन्हें अभी से महंगे दामों में खाद मिल रहा है। चंदेरी गांव के किसान मुकेश कुशवाह ने बताया कि बाजार से 12 बोरी खाद अभी तक खरीदा है। इनमें यूरिया खाद भी शामिल है। सोसायटी में जो यूरिया खाद की बोरी 267.50 पैसे में मिली वहीं बोरी बाजार में 310 रुपए में दी जा रही है। यही नहीं एक शर्त भी है। वह यह कि दो बोरी के साथ एक डीएपी की बोरी लेना जरूरी है जिसकी कीमत प्रति बोरी 1150 रुपए है। इसी गांव के किसान धनराज मेवाड़ा ने बताया कि वह कई बार सोसायटी गया लेकिन वहां पर खाद खत्म हो चुका था। इसलिए इंतजार कर रहा हूं। धबोटी के रामप्रकाश ने बताया कि दो बोरी यूरिया पर एक बोरी डीएपी लेना जरूरी है। भगवानपुरा के किसान सूरज सिंह ने बताया कि वह सोसायटी गया था लेकिन यह कहा गया कि वह डिफाल्टर है। इसलिए खाद नहीं मिलेगा।​​​​​​​

सवाल- प्रशासन क्यों नहीं रोक रहा बाजार की मनमानी
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सोसायटी में एक बोरी यूरिया की कीमत 267 रुपए लिए जा रहे हैं तो फिर बाजार में 310 क्यों लिए जा रहे हैं। बाजार में रेट को लेकर की जा रही मनमानी पर क्यों नजर नहीं है। किसानों को अधिक कीमत देकर यूरिया खरीदना पड़ रहा है वह भी तब जब अभी ज्यादा डिमांड नहीं है। आने वाले दिनों में तो इसके दाम और बढ़ जाएंगे। कई किसानों ने बताया कि जब ज्यादा किल्लत होती है तो प्रति बोरी यूरिया 350 रुपए तक में भी बिकती है।


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