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सावधानी ही बचाव:ऐसे ही जीतेंगे कोरोना से... नवरात्र के पहले दिन गिनती के श्रद्धालु सलकनपुर धाम पहुंचे

सीहोर8 दिन पहले
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  • गाइड लाइन का पालन कराने मौजूद थे जिम्मेदार लेकिन सन्नाटा होने से नहीं पड़ी जरूरत

सरकार ने भले ही श्रद्धालुओं के लिए नवरात्र में देवी मंदिरों के पट खोल दिए हों लेकिन कोरोना की डर ऐसा है कि नवरात्र के पहले दिन शनिवार को सलकनपुर देवी धाम में गिने चुने श्रद्धालु ही पहुंचे जबकि इस दिन छुट्‌टी रहती है। शाम तक करीब 5 हजार श्रद्धालु ही यहां पर आ सके थे। प्रशासन ने गाइड लाइन का पालन कराने शुक्रवार रात से यहां पर अमला तैनात कर दिया था लेकिन दर्शनार्थियों की संख्या बेहद कम होने से इसकी भी जरूरत ही नहीं पड़ी। हालत यह थी कि सुबह से शाम तक सीढ़ी मार्ग पर सन्नाटा पसरा रहा। मंदिर प्रांगण भी खाली पड़ा था। मंदिर तक श्रद्धालु तीन रास्तों से पहुंचते हैं। नीचे सीढ़ी मार्ग से ही सबसे अधिक लोग मंदिर जाते हैं। हर साल नवरात्र में इस सीढ़ी मार्ग पर पैर रखने की जगह नहीं होती है लेकिन इस बार तो यहां पर लोग ही नहीं दिखाई दे रहे थे। इक्का-दुक्का लोग ही दिखाई दे रहे थे। हालांकि नवरात्र शुरू हाेने के एक सप्ताह पहले ही यहां पर श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था। उनको लग रहा था कि शायद नवरात्र में सलकनपुर धाम न खुले।

जानिये ये पांच कारण जिनके कारण श्रद्धालुओं की संख्या रही कम

1. मंदिरों के खुलने की घोषणा में देरी: पहले यह कहा जा रहा था कि नवरात्र में देवी मंदिर बंद रहेंगे। बाद में सरकार ने फैसला लिया कि मंदिरों को खोला जाएगा। यही कारण है कि लोगों को जब यह पता था कि मंदिर इस बार नहीं खुलेंगे तो वे पहले ही आकर दर्शन कर गए।

2. हजारों पदयात्री भी नहीं दिखाई दिए: नवरात्र में यहां पर हजारों पदयात्री दिखाई देते हैं। इन लोगों की श्रद्धा देखते ही बनती है लेकिन इस बार पहले से पता नहीं होने से या तो पदयात्री आए नहीं और वह आकर चले गए हैं। यही कारण है कि नवरात्र में श्रद्धालु कम दिखाई दे रहे हैं।

3. आंवलीघाट के बंद होने से भी असर: यहां पर लोग आते हैं तो वह दर्शन करने के बाद सीधे आंवलीघाट पहुंचते थे। अधिकांश श्रद्धालु जो सलकनपुर देवी धाम दर्शन के लिए आता है तो वह फिर जाने से पहले नर्मदा के आंवलीघाट पर स्नान करना चाहता है। इस बार स्नान पर रोक होने से भी संख्या में कमी देखी जा रही है।

4. अधिक मास होने का भी प्रभाव: इस बार अधिक मास रहा। पूरे महीने अधिक मास में सलकनपुर देवी दर्शन करने के लिए हजारों लोग आए। यह भी मान्यता है कि अधिक मास में दर्शन करना नवरात्र में दर्शन करने के बराबर होता है। इसलिए कई लोग दर्शन करने के बाद लौट गए हैं।

5. कोरोना की दहशत: लोगों को लग रहा था कि कहीं नवरात्र में यदि सलकनपुर देवी धाम में अधिक भीड़ ह़ुई तो क्या हुआ। कोरोना के चलते लोग नहीं आए। कुछ लोग ऐस थे जो कोरोना से पहले ही सुरक्षित दर्शन कर घर जा चुके हैँ।

मंदिर सभागार में भी इक्का दुक्का लोग दिखे
विजयासन देवी धाम के प्रांगण में तो खड़े होने की जगह ही नहीं बचती थी लेकिन इस बार हालात अलग दिखाई दिए। यहां पर शनिवार को बहुत कम लोग थे। हालत यह थी कि सभागार में भी इक्का दुक्का लोग ही थे। मंदिर के अंदर जाने और बाहर निकलने के रास्ते भी खाली थे।
श्रद्धालुओं की स्क्रीनिंग की व्यवस्था भी थी
मंदिर के अंदर जाने से पहले हर श्रद्धालु की स्क्रीनिंग होना है। इसके लिए सभी व्यवस्थाएं थीं। जाली के अंदर बैठकर श्रद्धालुओं की स्क्रीनिंग की व्यवस्था की गई है। हालांकि आज कम संख्या होने से यहां पर भी भीड़ नहीं थी। इसी तरह सैनिटाइजर भी रखा था। इस संबंध में बुदनी एसडीएम शैलेंद्र हिनौतिया ने बताया कि पहले नवरात्र को श्रद्धालुओं की काफी कम भीड़ रही। हालांकि सभी तरह की व्यवस्थाएं कराई गई हैं। गाइड लाइन का पालन कराया जा रहा है।

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