पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

इच्छाशक्ति से हारेगा कोरोना:सकारात्मक सोच के साथ घर में आइसोलेट होकर ब्लड कैंसर के साथ कोरोना से भी लड़ी जंग

सीहोरएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • गंभीर कोरोना संक्रमण होने के बावजूद अपनी इच्छाशक्ति से कोरोना को हराने वालों की जांबाज कहानी

मैं पत्नी रूचि शाह के अलावा दो बच्चों और मेरे सास-ससुर के साथ रहता हूं। ससुर शैलेष पटेल को अप्रैल माह के शुरुआती सप्ताह में कोरोना हो गया तो उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने लगी। इस पर हमने उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया। जैसे ही वह सामान्य हुए तो हम उन्हें अस्पताल से छुट्टी कराकर घर ले आए क्योंकि यहां पर और बेहतर तरीके से इलाज हो सकता था। इस बीच मुझे भी एक दिन कमजोरी लगने लगी तो मैंने भोपाल में चेक कराया।

मैं कोरोना पॉजिटिव निकला। पिछले 8 साल से मैं ब्लड कैंसर से पीड़ित हूं और इसकी दवा प्रतिदिन खाता चला आ रहा हूं लेकिन इस गंभीर बीमारी में भी मैंने अपना आत्मबल नहीं खोया और सकारात्मक सोच बनाए रखी। ब्ल्ड कैंसर के कारण इसके लिए मुझे प्रतिदिन दवा लेना होता है। इसी के साथ कोरोना जैसी बीमारी हो जाए तो स्वभाविक है कि लोगों में भय हो जाता है। हर रोज दोनों बीमारियों की दवा ली। मैं घर में ही आइसोलेट हो गया और फिर कोरोना की दवा शुरू कर दी। इस बीच मैंने सुबह और शाम योग भी किया। इससे भी काफी मदद मिलती है। दवा खाने के साथ साथ मैं प्रतिदिन अच्छा महसूस करता चला गया । इसके अलावा मैंने देसी उपाय अपनाना भी शुरू किया। इस बीच में मुझे खांसी आती थी पर मैं घबराया नहीं और दवाएं लेता रहा और इस तरह से 14 दिन बाद बुधवार को मैं स्वस्थ होकर बाहर आ गया।

मेरा लोगों से यही कहना है कि कोरोना जैसी महामारी को यदि हराना है तो खुद का आत्मबल कम नहीं होने देना है। हौंसले से ही इस लड़ाई को आसानी से जीता जा सकता है। साथ ही यह भी कहना चाहूंगा कि जब भी इस बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। समय पर शुरू किया इलाज इस लड़ाई को जीतने में काफी मददगार साबित होता है।

खबरें और भी हैं...