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  • Last Year, There Was Damage Due To Floods In 61 Villages On The Banks Of Narmada, Now They Will Buy Moong From The Farmers Here

नई व्यवस्था:नर्मदा तटीय 61 गांवों में पिछले साल बाढ़ से हुआ था नुकसान, अब यहां के किसानों से पहले खरीदेंगे मूंग

सीहोर3 महीने पहले
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  • अब 15 नहीं बल्कि 50 किसानों को हर समिति से भेजे जा रहे एसएमएस

पिछले साल नर्मदा में आई बाढ़ ने तबाही मचाई थी। इससे नर्मदा तटीय गांवों के किसानों के घरों में रखी उपज भी बह गई थी। नसरुल्लागंज और बुदनी के ऐसे 61 गांव हैं जहां बाढ़ से नुकसान होता है। इसी को देखते हुए बाढ़ प्रभावित किसानों का मूंग प्राथमिकता से खरीदा जा रहा है। इसके लिए अब 15 नहीं बल्कि हर समिति से 50 किसानों को एसएमएस भेजे जा रहे हैं ताकि यदि आने वाले दिनों में बाढ़ आए तो इन गांवों के किसानों की उपज खराब ना हो। पिछले साल बुदनी, नसरुल्लागंज के नर्मदा तटीय गांवों में बाढ़ का पानी भर गया था। इससे कई मकान गिर गए थे। किसानों की मूंग सहित अन्य खाद्यान सामग्री बाढ़ में बह गई थी जिससे किसानों को लाखों रुपए का नुकसान उठाना पड़ा था। इस वर्ष भी लगातार नर्मदा में जल स्तर में बढ़ोतरी को देखते हुए नर्मदा तटीय गांवों का एक प्रतिनिधि मंडल मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात कर मूंग खरीदी को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की। इस पर सीएम ने ये नई व्यवस्था लागू करवाई।

नसरुल्लागंज और बुदनी क्षेत्र में नर्मदा उफान पर आने से होता है नुकसान

अब तक इन गांवों से खरीदा जा चुका है मूंग

क्षेत्र के गांव चौरसाखेड़ी व रानीपुरा के किसानों का मूंग सरकार खरीद चुकी है। कृषि विभाग का दावा है कि आने वाले एक सप्ताह में नर्मदा तटीय गांवों के सभी किसानों से मूंग की खरीदी कर ली जाएगी। नसरुल्लागंज क्षेत्र में 35 और बुदनी में करीब 25 गांव ऐसे हैं जहां बाढ़ से ज्यादा नुकसान होता है

20 दिन बंद रही खरीदी

15 जून से मूंग की खरीदी समर्थन मूल्य पर शुरू की गई। महज 45 दिन में ही मूंग खरीदी का कोटा पूरा हो गया। इसके बाद खरीदी को 20 दिन के लिए बंद कर दिया गया था जिससे किसान चिंतित हो उठे थे। केंद्र सरकार द्वारा खरीदी कोटा बढ़ाए जाने के बाद शासन ने नई गाइड लाइन बनाई। नई गाइड लाइन के अनुसार एसएमएस की संख्या में बढ़ोतरी करते हुए 15 के स्थान पर 50 किसान को एसएमएस भेज जा रहे हैं।

इन 26 गांवों में बाढ़ का अधिक खतरा

पिछले साल नर्मदा किनारे बसे लगभग 26 से अधिक गांवों को बाढ़ के पानी ने घेर लिया था जिससे किसानों के घरों में रखी खाद्य सामग्री व अनाज बाढ़ से खराब हो गया था। सरकार ने इससे सबक लेते हुए इस वर्ष किसानों की मांग पर क्षेत्र के नर्मदा तटीय गांव नीलकंठ, सीलकंठ, मंडी, अतरालिया, सातदेव, टिगाली, चौरसाखेड़ी, रानीपुरा, छिपानेर, छिदगांव काछी, बाबरी, आंबा, बडग़ांव, डिमावर सहित अन्य गांवों में सरकार प्राथमिकता के साथ मूंग की खरीदी करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। हालांकि शासन की गाइड लाइन के अनुसार 40 क्विंटल से अधिक कोई भी किसान मूंग का विक्रय नहीं कर सकेगा। इससे किसानों को बची उपज मंडी में बेचने जाना होगा।

परेशानी: 40 क्विंटल की शर्त

सरकार ने किसानों के आगे एक बंधन भी तय कर दिया है जिसमें किसान 40 क्विंटल से अधिक मूंग का विक्रय नहीं कर सकता। ऐसे में कई किसानों को अपनी उपज मंडी में खुले में बेचना होगी।

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