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  • Lungs Were Infected Up To 45% And Beds Were Not Found Even In Hospitals, But Did Not Give Up. Home Quarantine Was Given By Doctors To Win Medicines, Won The Battle Against Corona In 12 Days.

इच्छाशक्ति से हारेगा कोरोना:फेफड़े 45% तक संक्रमित थे और अस्पतालों में भी बेड नहीं मिला, लेकिन नहीं मानी हार डॉक्टर से दवाई लिखवाकर हो गए होम क्वारेंटाइन, 12 दिन में जीत ली कोरोना से जंग

कोरोना की खबर6 महीने पहले
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  • गंभीर कोरोना संक्रमण होने के बावजूद अपनी इच्छाशक्ति से कोरोना को हराने वालों की जांबाज कहानियां, पढ़िए आज पहली कड़ी- ढांडिया पचौर गांव के दीपक ने अनुलोम-विलोम योग आसन और देसी नुस्खों से 7 दिन में ही खांसी पर पाया काबू, अब वे स्वस्थ

मैं एक छोटे से गांव ढांडिया पाचौर का रहने वाला हूं। जिलेभर में लगातार कोरोना की खबरों से होने वाली मौतों से पूरा गांव दहशत में था, लेकिन मैं इसे महज इत्तेफाक ही मानता था। जब मुझे पहली बार अचानक से खांसी आना शुरू हुई तो मैं इसे साधारण खांसी मानता रहा लेकिन 4 दिन तक जब खांसी बंद नहीं हुई तो परिवार के लोग भी चिंतित हुए।

उनके लगातार कहने के बाद मैं नसरुल्लागंज मुख्यालय पहुंचा और सिविल अस्पताल में अपनी कोरोना की जांच कराई। मुझे पता था कि मुझे कुछ नहीं हुआ और रिपोर्ट भी निगेटिव आई। मैं हमेशा गांव के लोगों को निर्भीक होकर जीवन जीने की सलाह देता रहता था। मुझे कभी भी मौत से डर नहीं लगा। 7 दिन बीतने पर भी मेरी खांसी बंद नहीं हुई। खांसी इतनी तेज चलने लगी कि उसकी आवाज सुनकर गांव के लोगों को डर लगने लगा।

मैंने फिर भी हार नहीं मानी। रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद मैंने सोचा कि चलो होशंगाबाद जाकर सीटी स्कैन करा आता हूं। जब डॉक्टरों ने कहा कि 45 फीसदी तक संक्रमित हो चुके हैं फेफड़े दूसरे ही दिन मैं घर से होशंगाबाद के लिए निकल पड़ा।

वहां जाकर डॉक्टर को दिखाया और फिर सिटी स्केन कराई। कुछ घंटों बाद जब इसकी रिपोर्ट आई तो डॉक्टरों ने रिपोर्ट देखकर कहा कि आपके फेफड़े तो 45 प्रतिशत तक संक्रमित हो गए हैं और आपको तत्काल भर्ती होना पड़ेगा। जब डॉक्टरों ने यह बात कही तब भी मैं नहीं घबराया।

मैंने डॉक्टर से कहा भर्ती कर लो लेकिन वहां तो बेड ही नहीं था। मैंने डॉक्टर से कहा कि ठीक है मुझे भर्ती कर लो लेकिन हॉस्पिटल में बेड खाली नहीं मिला। परिवार की सुरक्षा की दृष्टि से मैं भोपाल के पालीवाल हॉस्पिटल में दोबारा जांच कराने के लिए गया। । यहां मुझे डॉक्टर आकाश मिश्रा मिले। उन्होंने रिपोर्ट देखी और कहा कि आपके फेफड़े संक्रमित हैं आपको तत्काल भर्ती होना होगा लेकिन अस्पताल में बेड खाली नहीं हैं।

मैंने डॉक्टर से सारी जानकारी लेकर कहा कि यदि अस्पताल में बेड नहीं है तो आप बदवाएं लिख दो। इसके बाद डॉक्टर ने दवाएं लिखीं और मैं दवाएं लेकर अपने गांव वापस आ गया। घर के ही एक कमरे में खुद को बंद कर डॉक्टर के बताए अनुसार नियमित रूप से दवाएं लीं।

प्रतिदिन अनुलोम विलोम और कपाल भारती योग से मैंने 7 दिन में ही खांसी से निजात पा ली। 7 दिन के बाद जब में भोपाल डॉक्टर के पास पहुंचा तो डॉक्टर ने मुझे स्वस्थ बताया। आज मुझे 12 दिन बीत चुके हैं और मैं व मेरा परिवार पूरी तरह स्वस्थ है।

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