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बेटी पूरा करेगी 'सीहोर के नायक' का सपना:CDS के साथ जान गंवा चुके पैरा कमांडो जितेंद्र चाहते थे खूब पढ़े बेटी; प्राइवेट स्कूल नहीं लेगा फीस

सीहोर5 महीने पहले

सीहोर के नायक की दिली इच्छा पूरी होगी। उनका सपना था कि उनकी बेटी खूब पढ़े और देश का नाम रोशन करे। उन्होंने 4 साल की बेटी का 13 अगस्त को केजी-1 में एडमिशन करवाया था। इस दौरान उन्होंने बेटी को अच्छी शिक्षा की इच्छा शिक्षकों के सामने जताई थी। उन्हें याद करते हुए अमलाहा पब्लिक स्कूल के संचालक ने शहीद की बेटी की 12वीं तक की पढ़ाई नि:शुल्क करवाने का निर्णय किया है। बेटी के लिए स्कूल बस भी फ्री कर दी गई है।

बता दें कि तमिलनाडु के कुन्नूर में बुधवार को हुए हेलिकॉप्टर क्रैश में जनरल बिपिन रावत सहित 13 लाेगाें का निधन हाे गया था। हादसे में सीहोर जिले के 31 साल के नायक जितेंद्र कुमार वर्मा की भी माैत हाे गई है। जितेंद्र का एक साल पहले 3 पैरा मिलिट्री फोर्स में नायक पद पर चयन हुआ। उन्हें प्रतिष्ठित रेड कैप मिला था। पैरा कमांडो उसे चुना जाता है, जो हवा, पानी और आकाश तीनों जगह सर्वश्रेष्ठ कार्य कर सके। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ में उनका पीओएस होना भी सीहोर के लिए गर्व की बात थी।

खेत पर अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू हो गई हैं।
खेत पर अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू हो गई हैं।

वैष्णो देवी लेकर जाने का बोला था, अब ऐसा नहीं होगा
जितेंद्र के पिता शिवराज वर्मा ने बताया कि उनके पास करीब तीन एकड़ जमीन है। अपने खेत पर काम करने के साथ उन्होंने मजूदरी भी की और बच्चों को पढ़ाया। हमारा पहले कच्चा मकान था, जितेंद्र 2011 में सेना में भर्ती हुआ तो उसने हमारे लिए खेत पर ही पक्का मकान बनवा दिया। उन्होंने कहा- वैसे तो वह कभी सीहोर से बाहर नहीं गए, लेकिन बेटा पिछली बार उन्हें सलकनपुर लेकर गया था। वह जनवरी में वैष्णो देवी लेकर जाने का कहकर गया था, लेकिन अब ऐसा नहीं हो पाएगा।

दोस्त ने बताया, प्लेन में उड़ने का था शुरू से सपना
जितेंद्र के दोस्त देवनारायण ने बताया कि जब भी वह पिता को रुपए भेजता, तो मैं एटीएम से रुपए निकालकर उनको देता था। उसने बताया कि जितेंद्र का आसमान में उड़ने का सपना स्कूल के समय से ही था। वह हमेशा से डिफेंस में जाना चाहता था। एक बार वह घर के बाहर चारपाई पर लेटा था, प्लेन को ऊपर से गुजरते हुए देखकर कहा- एक दिन मैं भी इसी तरह गुजरूंगा।

जितेंद्र की शादी सुनीता से 7 साल पहले हुई थी।
जितेंद्र की शादी सुनीता से 7 साल पहले हुई थी।

10वीं तक सरकारी स्कूल से पढ़े
जितेंद्र 10वीं तक सरकारी स्कूल में पढ़े। इसके बाद निजी स्कूल से 12वीं पास की। उच्च शिक्षा के लिए सीहोर कॉलेज में एडमिशन लिया। हालांकि, इसी दौरान आर्मी में सिलेक्शन हो गया। हालांकि, वहां रहते हुए आगे की पढ़ाई पूरी की। स्कूल के शिक्षकों ने बताया कि जब भी जितेंद्र छुट्टी पर आते तो स्कूल जरूर आते थे। वह यहां पर बच्चों को सेना में जाने के लिए प्रेरित करते थे। बच्चों को फिट रहने के टिप्स देते थे।

सबसे अच्छी नौकरी सेना की
जितेंद्र कहते थे कि सबसे अच्छी नौकरी सेना की है। वह अपने छोटे भाई धर्मेन्द्र को भी सेना में देखना चाहते थे। कई बार उसने तैयारी करवाकर उसे भर्ती प्रक्रिया में शामिल करवाया। हालांकि, चयन नहीं हो सका। धर्मेन्द्र ने बताया कि वे जब छुट्टी पर आते तो खेत पर काम करने जरूर जाते थे। उन्होंने अभी एक नया ट्रैक्टर भी दिलाया था।

डीएनए मैच होने पर आज या फिर कल आएगी पार्थिव देह
जानकारी के अनुसार गुरुवार को डॉक्टरों की एक टीम ने गांव पहुंचकर परिवारवालों के डीएनए सैंपल लिए थे। शुक्रवार को डीएनए मैच हो जाता है तो उनका शव शाम तक या शनिवार को सीहोर भेजा जा सकता है। शव की शिनाख्ती के लिए परिवार के लोग भी शुक्रवार को दिल्ली रवाना हुए हैं।

अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू
गांववालों को पार्थिव देह के आने का इंतजार है। शुक्रवार को कई अधिकारी गांव पहुंचे और अंतिम कार्यक्रम स्थल का जायजा लिया। रात में कलेक्टर और एसपी भी गांव पहुंचे थे। कलेक्टर ने बताया कि हादसे में जितेंद्र की मौत हुई है। जितेंद्र की शादी 2014 में सुनीता से हुई थी। उनके दो बच्चे चार साल की बेटी श्रव्या और डेढ़ साल का चैतन्य हैं। जितेंद्र की मां धापूबाई की तबीयत अकसर खराब रहती है।