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30 संक्रमित मिले:ज्यादातर होम आइसोलेट ही पर मरीजों के हाल जानने नहीं आ रहा कोई कॉल

सीहोरएक महीने पहले
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  • एक मार्च को एक्टिव केस 25 थे जो 30 मार्च तक बढ़कर 162 हो गए

लगातार कोरोना संक्रमण फैलता जा रहा है और हर रोज शहर में ही सबसे अधिक पॉजिटिव मिल रहे हैं लेकिन इसके बाद भी अभी तक कहीं पर कोई कंटेनमेंट जोन नहीं बनाया गया है। यही नहीं दो दिन के आंकड़ों पर यदि गौर करें तो 616 सैंपल की रिपोर्ट आई जिनमें 30 पॉजिटिव निकले जबकि अभी तो 1674 सैंपल की रिपोर्ट आना बाकी है। होम क्वारेंटाइन लोगों का कहना है कि जांच के बाद जब वे पॉजिटिव हुए तो क्या दवा लेना है या क्या करना है, इस संबंध में कहीं से कोई कॉल नहीं आया। कई लोग ऐसे भी हैं जो बुखार या खांसी आने के बाद भी खुद ही अपना इलाज घर में कर रहे हैं। अब फिर से कोरोना तेजी से फैला है लेकिन ठीक उसके उल्ट अब पहले जैसी व्यवस्थाएं नहीं हैं। ना तो कोविड केयर सेंटर हैं और ना ही सर्वे के लिए टीमें हैं। हालत यह है कि कई पॉजिटिव लोगों ने भास्कर को बताया कि उनके पास तो कॉल तक नहीं आया कि वे कहां पर हैं और वे कहां इलाज करा रहे हैं। ऐ सोमवार और मंगलवार दो दिनों में जिले में 30 कोरोना पॉजिटिव निकले हैं जिनमें से 17 सीहोर शहर के ही हैं।

कहां मिले पॉजिटिव
पिछले 24 घंटे के दौरान 14 लोगों की कोरोना जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। सीहोर सी-1 स्काई कॉलोनी, नेहरु कॉलोनी, खजांची लाइन, गंगा आश्रम, इंदिरा कॉलोनी, पलटन एरिया, इंदिरा नगर से 9 लोग हैं। इसी तरह बुदनी बांया से 2, नसरुल्लागंज के एसबीआई क्षेत्र, बैंक ऑफ इंडिया क्षेत्र तथा स्थानीय नसरुल्लागंज से 1-1 व्यक्ति की कोरोना जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई। जिले में एक्टिव पॉजिटिव मरीजों की संख्या 162 हो गई है। मंगलवार को 6 लोग रिकवर हुए।

जिला अस्पताल में है व्यवस्था
सीएमएचओ डॉ. सुधीर डेहरिया का कहना है कि जो भी पॉजिटिव हैं उनके पास हर रोज कॉल जाता है और उनसे उनके स्वास्थ्य के बारे में पता किया जाता है। उन्हें दवा की किट भी दी जा रही है। जिन्हें अस्पताल की जरूरत पड़ती है तो उन्हें जिला अस्पताल में बनाए कोविड वार्ड में भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। यहां पर 48 बेड तो अलग हैं लेकिन आईसीयू में 11 बेड हैं जहां 5 वेंटीलेटर की सुविधा भी उपलब्ध है।

होम आइसोलेट मरीजों तक पहुंचा भास्कर- कोई नहीं पूछता हाल
जो लोग कोरोना पॉजिटिव हुए हैं उनसे भास्कर ने बात की। भोपाल नाका क्षेत्र में रहने वाली एक कोरोना पॉजिटिव महिला ने बताया कि अब वह निगेटिव हो गई है लेकिन जिस दिन मैं पॉजिटिव हुई तो उस रात को खूब खांसी चली। बुखार भी आया लेकिन स्थानीय स्तर से किसी का कॉल नहीं आया कि आपको कौन सी मेडिसिन लेना है। आखिरकार सुबह मैं भोपाल के एक अस्पताल में भर्ती हुई जहां इलाज कराया। चाणक्यपुरी निवासी एक व्यक्ति ने बताया कि जब उसे परेशानी हुई तो वह भोपाल के एक प्राइवेट अस्पताल गया जहां जांच कराने पर पॉजिटिव निकला। वहां से दवा लेकर घर आ गया लेकिन स्थानीय स्तर से किसी ने नहीं पूछा कि पॉजिटिव हैं तो क्या दवा ले रहे हैं या नहीं। कोई ना तो देखने आया और ना ही कॉल कर पूछा।

अब खतरा समझो : पिछले 10 दिन में मिले 125, इनमें सीहोर शहर के 75
सीहोर शहर में किस तरह मरीज बढ़ रहे हैं, इसका सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि पिछले 10 दिनों में 125 पॉजिटिव मरीज मिले हैं जिनमें से सीहोर शहर के 75 लोग हैं। इससे साफ हो जाता है कि शहर में खतरा कितना बढ़ता जा रहा है लेकिन इसके बाद भी लापरवाही हो रही है। अभी तो सबसे अहम बात यह है कि 1674 लोगों के जो सैंपल लिए हैं उनकी रिपोर्ट आना बाकी है। शहरी क्षेत्र की बात करें तो यहां पर कोरोना फैलता ही जा रहा है लेकिन अभी तक कहीं पर भी कंटेनमेंट जोन नहीं बनाया गया है। जहां पर अधिक मरीज मिलने लगते हैं तो वहां पर कंटेनमेंट जोन बनाया जाना चाहिए लेकिन अभी ऐसा नहीं हो पा रहा है।
लापरवाही : पॉजिटिव व्यक्ति घर के अंदर है या बाजार में घूम रहा है ये देखने वाला कोई नहीं...
इस समय सबसे बड़ा खतरा उन पॉजिटिव लोगों से है जो घर में ना रहते हुए बाहर घूमने निकल जाते हैं। पहले तो घर के बाहर सूचना चस्पा कर दी जाती थी या वहां पर टीम जाती थी तो आसपास रहने वाले लोगों को इसकी जानकारी मिल जाती थी और फिर व्यक्ति लोगों के डर से बाहर नहीं निकलते थे लेकिन अब तो कोई बताने वाला भी नहीं है। इसलिए इस तरह की लापरवाही भी हो रही है।

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