नया नियम / अब बिना शिक्षकों के घर में लगेंगे सरकारी स्कूल

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दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 04:00 AM IST

सीहोर. कोविड 19 में अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल में भेजने में हिचक रहे हैं और स्कूल खुलेंगे या नहीं इसको लेकर अब तक कोई फैसला नहीं हो पाया है। इस बीच राज्य शिक्षा केंद्र ने सरकारी स्कूलों को घर पर खोलने का प्लान बना लिया है। इसके लिए केंद्र ने प्रदेश के तमाम जिला शिक्षा केंद्र को फरमान जारी किया है कि कोविड 19 में बच्चे स्कूल नहीं आ पाएंगे ऐसे में घरों में ही स्कूल शुरू करें। घरों में स्कूल जैसा वातारण बनाएं ताकि बच्चा पढ़े तो उसे लगे कि वो स्कूल में पढ़ाई कर रहा है।
राशिकें के आदेश के अनुसार सुबह 10 से दोपहर 1 बजे के बीच बच्चों को अपने-अपने घरों में एक स्थान पर बैठाकर पढ़ाई कराने की व्यवस्था की जाए। पढ़ाई शुरू होने से पहले घर का कोई एक सदस्य घंटी या थाली बजाए। इसके पहले वर्क बुक और पाठ्यपुस्तक का वितरण करें और फिर वॉट्सएप ग्रुप बनाएं। इसमें कोर्स की डिटेल अभिभावकों को भेजें कि बच्चों को क्या पढ़ाना है। सप्ताह में जो पाठ पढ़ाना है, उसकी डिटेल भेजें। वहीं बच्चे का जिस स्कूल में दाखिला है वहां के शिक्षक पांच घरों की रोज मॉनिटरिंग करें। राज्य शिक्षा केंद्र ने इसे नाम दिया है हमारा घर, हमारा विद्यालय। यह 6 जुलाई से शुरू होगा।
रोज 5 बच्चों से करेंगे संपर्क : अभियान में शिक्षकों को बच्चों की मॉनिटरिंग करने का जिम्मा दिया गया है। हर दिन एक शिक्षक कम से कम पांच बच्चों की मॉनीटरिंग करेगा। मॉनीटरिंग स्वयं बच्चों के घर जाकर या फिर फोन पर संपर्क से होगा। इसका पूरा रिकार्ड शिक्षकों को रखना होगा और एम शिक्षा मित्र पर जानकारी देना होगी।

ऐसे चलेगा अभियान, शिक्षक करेंगे बच्चों की मॉनिटरिंग

  • 6 जुलाई से स्कूलों में हमारा घर हमारा विद्यालय अभियान शुरू होगा।
  •  कक्षा पहली से आठवीं तक के विद्यार्थी करेंगे पढ़ाई।
  •  1 से 4 जुलाई तक पाठ्य पुस्तकों का वितरण होगा।
  •  मोबाइल, रेडियो, टीवी, पाठ्य पुस्तकों, वर्कबुक से होगी पढाई।
  •  प्रतिदिन सुबह 10 से दोपहर 1 बजे तक बच्चे घरों में एक स्थान पर बैठकर करेंगे पढाई।
  •  घर के एक सदस्य द्वारा घंटी-थाली बजाकर घर में बच्चों को पढ़ने के लिए बैठाया जाएगा।
  •  हर सप्ताह पढ़ाई का नया टाइम टेबल बताया जाएगा।

1 से 4 जुलाई के बीच  बांटी जाएंगी किताबें
 इसके पहले 1 से 4 जुलाई के बीच बच्चों को पाठ्यपुस्तकें बांटी जाएंगी। पाठ्यपुस्तकें स्कूलों में भेज दी हैं। इधर, केंद्र ने बजट भी जारी नहीं किया है। ऐसे में बच्चों को घर में स्कूल जैसा माहौल कैसे मिलेगा। क्योंकि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले अधिकतर बच्चे गरीब वर्ग के होते हैं। घर में स्कूल जैसा माहौल बनाने के लिए अभिभावक ब्लैक बोर्ड, बैठने के लिए बैंच कहा से लेकर आएंगे। वहीं स्कूलों में टेस्ट भी होते हैं। ऐसे में वो कैसे होंगे। 

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