फसल पर कीटों का प्रकोप:गेहूं की फसल पर दिखने लगे जड़माहू, दवाओं का छिड़काव करें, नहीं तो फसल होगी प्रभावित

सीहोर2 महीने पहले
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गेहूं की फसलों में कीट प्रकोप - Dainik Bhaskar
गेहूं की फसलों में कीट प्रकोप

आसमान में छाए बादल अब रबी सीजन में बोई गई गेहूं और चने की फसलों के लिए मुसीबत का कारण बनकर आ रहे हैं। चने की फसल में जहां कहीं-कहीं इल्लियों का प्रकोप नजर आ रहा है तो बोवनी के बाद बढ़वार पर आ चुकी गेहूं की फसल पर भी जड़माहू का प्रकोप दिखाई देने लगा है। आर.एके कालेज स्थित कृषि मौसम केंद्र द्वारा जड़माहू रोग से गेहूं की फसल को बचाने के लिए अभी से उपाय करते हुए विशेषज्ञों की सलाह से दवाओं का छिड़काव करना चाहिए। ताकि, इस रोग से फसलों को बचाया जा सके। वहीं बोवनी के बाद खेतों में बढ़वार पर आ चुकी चने के पौधों में भी इल्लियोंं का प्रकोप देखा जा रहा हैं।

कैसे पहचाने जड़माहू कीट को
आरएके कालेज स्थित मौसम केंद के तकनीकी अधिकारी डॉ एसएस तोमर ने बताया कि इन दिनों गेहूं की फसलों में कहीं-कहीं जड़माहू रोग लगने की सूचनाएं मिल रही हैं। डॉ तोमर ने बताया कि हल्के पीले भूरे और हरे रंग का यह कीट गेहूं के पौधें के जड़भाग मेंं रहकर रस चूसता है। जिससे पौधे धीरे-धीरे पीले होने लगते हैं और फिर सूखकर नष्ट हो जाते हैं। जड़माहू कीट का जीवन चक्र 12 से 15 दिनों का होता है इस दौरान वह फसल के लिए ज्यादा घातक रहता हैं।

दवा का छिड़काव
कृषि वैज्ञानिक डॉ तोमर ने बताया कि जिन किसानों के खेतों में गेहूं के पौधे यदि पीले पढ़ रहे है तो किसानों को ध्यान से अपने खेतों में लगे पौधे उखाड़कर देखना चाहिए। यदि पौधे के जड़भाग में बारीक-बारीक काले पंखदार कीट जड़ से चिपके दिखाई दें तो समझ लेना चाहिए कि फसल पर जड़माहू रोग का आक्रमण हो चुका है। प्रकोप अधिक होने पर खेत में जगह-जगह गेहूं के पौधे पीले पड़कर सूखने लगत हैं। ऐसी स्थिति में यदि इस समय रोग का इलाज नहीं किया जाता है। पूरी फसल सूखने की आशंका बन जाती हैं।