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  • Seeds Are Expensive, Profits Are Low, There Is A Possibility Of Disease ... Soybean Area In The District Decreased By 27 Thousand Hectares

ट्रेंड बदला:बीज महंगा, मुनाफा कम, रोग की आशंका... जिले में सोयाबीन का रकबा 27 हजार हेक्टेयर घटा

सीहोर18 दिन पहले
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  • तीन साल से नुकसान होने से किसानों का रुझान मक्का और उड़द की तरफ
  • पिछले साल बाढ़ और कीट प्रकोप से साेयाबीन को हुआ था नुकसान

इस बार खरीफ फसल का रकबा तो पिछले साल के बराबर ही है लेकिन सोयाबीन की तरफ किसानों का रुझान कम हुआ है। पिछले साल की तुलना में इस बार यह करीब 8 फीसदी कम हुआ है। यानि 27 हजार 290 हेक्टेयर रकबा कम रखा गया है। इसकी जगह धान, ज्वार, मक्का, उड़द लेगी जिनकी तरफ किसानों का रूझान दिखाई दे रहा है। लगातार सोयाबीन की फसल में हो रहे नुकसान को लेकर किसानों का ये बदला हुआ ट्रेंड दिखाई दे रहा है। जिले में सोयाबीन की फसल का रकबा इस बार कम हो जाएगा। खरीफ फसल की बोवनी का लक्ष्य भी कृषि विभाग ने तय कर दिया है। इसके अनुसार भी सोयाबीन का रकबा कम होने की उम्मीद है। इस बार 3 लाख 24 हजार 100 हेक्टेयर रकबे में सोयाबीन की बोवनी करने का लक्ष्य रखा गया है।

जबकि पिछले साल जिलेभर में 3 लाख 51 हजार 390 हेक्टेयर में सोयाबीन की बोवनी हुई थी। इस बार 27 हजार हेक्टेयर रकबा कम हो जाएगा। अगर हम 2020 की बात करें तो बारिश में नर्मदा में बाढ़ आने से सोयाबीन का नुकसान हुआ था।

ये तीन प्रमुख कारण जिससे घटेगा सोयाबीन का रकबा

1. महंगा बीज : इस बार किसानों के सामने बीज की बड़ी समस्या है। बीज तो उपलब्ध है लेकिन वह काफी महंगा पड़ रहा है। बीज निगम और बीज संघ ने सोयाबीन के बीज का भाव करीब 7500 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है जबकि राष्ट्रीय बीज निगम और नाफेट से करीब 8500 रुपए में प्रति क्विंटल सोयाबीन बीज के मिलने की संभावना बताई जा रही है। प्राइवेट एजेंसी भी बीज उपलब्ध करा रही है लेकिन यहां पर बीज और महंगा हो जाता है। इनके रेट 8500 से 9500 रुपए प्रति क्विंटल तक हैं।

2. अधिक लागत और मुनाफा कम: सोयाबीन की लागत भी दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। यही कारण है कि किसानों का इस फसल की तरफ से रूझान कम होने लगा है। इस समय इसकी लागत प्रति एकड़ 12 हजार से अधिक पड़ रही है। जबकि उस हिसाब से भाव मंडी में मिलते नहीं हैं। यही कारण है कि किसान अब इसे कम बोते नजर आ रहे हैं। अहमदपुर के किसान राम किशोर का कहना है कि प्रति एकड़ में कभी एक से दो या तीन क्विंटल तक सोयाबीन हो पाती है। ऐसे में यह घाटे का सौदा होने लगी है।
3. पकने की अवस्था में नुकसान: सबसे बड़ा नुकसान सोयाबीन की फसल को उस समय हो रहा है जब वह पकने की अवस्था में होती है। लगातार तीन सालों से सोयाबीन की फसल को काफी नुकसान हो रहा है। पिछले साल की बात करें तो उस समय फसल में तना मक्खी का प्रकोप देखा गया था। यह मक्खी तने के ऊपर पौधे की ग्रोथ नहीं होने देती है। इस तरह से पौधे में फली तक नहीं आ पाती है और फसल को काफी नुकसान हो जाता है। कभी अधिक बारिश से पौधों के सड़ने का खतरा बना रहता है।
जानिए...तीन फसलों में से किसमें कितनी लागत और कितना फायदा

  • सोयाबीन फसल में प्रति एकड़ में 30 किलो बीज डाला जाता है। कई किसान 40 से 45 किग्रा तक का बीज भी डालते हैं। औसतन 4 हजार बीज पर खर्च होता है। बाकी की लागत करीब 8 हजार के बीच आती है। इस तरह से 12 से 13 हजार प्रति एकड़ खर्च होता है।

उत्पादन और फायदा: प्रति एकड़ सोयाबीन का उत्पादन 3 से 4 क्विंटल तक होता है।

  • मक्का फसल में प्रति एकड़ 8 किग्रा बीज डलता है। इसकी कीमत 100 से 300 रुपए प्रति क्विंटल है। इस तरह से यदि औसतन 200 रुपए प्रति क्विंटल बीज लिया जाए तो 1600 रुपए का बीज हो जाता है। इसमें प्रति एकड़ 8 हजार की अन्य खर्च हो जाते हैं। इस तरह से यह 10 हजार प्रति एकड़ लागत हुई।

उत्पादन और फायदा : एक एकड़ में 15 क्विंटल तक मक्का का उत्पादन होता है। इसका बाजार भाव 1400 से 1500 रुपए प्रति क्विंटल चल रहा है। इस तरह से 10 से 12 हजार रुपए तक का फायदा है।

  • उड़द की फसल बोने में भी किसानों को फायदा हो रहा है। एक एकड़ में 8 किग्रा बीज डाला जाता है। इसकी कीमत 1000 रुपए होती है। इसमें भी अन्य खर्चे प्रति एकड़ करीब 8 हजार रुपए आते हैं। इस तरह से 9 हजार रुपए प्रति एकड़ खर्च होता है।
  • उत्पादन और फायदा: इसमें प्रति एकड़ 3 से 4 क्विंटल उत्पादन होता है। बाजार में इसका भाव 6 हजार रुपए प्रति क्विंटल है। यानि एक एकड़ में 10 से 12 हजार का फायदा हो जाता है। इस फसल में कीट प्रकोप भी ज्यादा नहीं होता, इसलिए किसान इस फसल काे अपना रहे हैं।
इस साल फसलों का रकबा
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