भाव भी ज्यादा / कम व ज्यादा बारिश से प्रभावित नहीं होने वाली मूंग का रकबा पिछले साल से आठ गुना ज्यादा

The area of moong which is not affected by less and more rain is eight times more than last year.
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The area of moong which is not affected by less and more rain is eight times more than last year.

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 04:00 AM IST

सीहोर. इस बार खरीफ सीजन में हर साल की तरह रकबा तो बढ़ा लेकिन प्रमुख फसल सोयाबीन का रकबा घट गया है। इसके पीछे दो प्रमुख कारण हैं। पहला तो यह कि अधिक बारिश होने से सोयाबीन के सड़ने का खतरा बढ़ गया है और दूसरा यह कि  मूंग 7 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक बिका इसलिए किसानों का इसकी तरफ अधिक रुझान बढ़ा है। जिले की बात करें तो अभी तक 85 फीसदी बोवनी हो चुकी है । इस बार खरीफ फसल का रकबा तो दो हजार हेक्टेयर बढ़ा दिया लेकिन पिछले साल की तुलना में 1400 हेक्टेयर सोयाबीन का रकबा कम हो गया है। वहीं मूंग का रकबा 300 हेक्टेयर से 2500 हेक्टेयर पर पहुंच गया है।  दरअसल जब भी अधिक बारिश होती है तो यदि तीन चार दिन तक खेतों से पानी की निकासी ना हो पाए तो इसके पौधे सड़ने लगते हैं। इसलिए काफी फसल खराब हो जाने का खतरा बना रहता है। इसे देखते हुए किसान इस बार मूंग फसल की तरफ ध्यान दे रहे हैं।  सोयाबीन की 91 प्रतिशत हो चुकी है जबकि मूंग, अरहर और धान की बोवनी होना है। सबसे अधिक बोवनी नसरुल्लागंज और बुदनी क्षेत्र में बची है। 

खरीफ की चार फसलें...ये फैक्टर भी करते हैं काम
मूंग की फसल: पिछले साल मूंग का रकबा 300 हेक्टेयर था जबकि इस बार यह 2500 हेक्टेयर में बोया जा रहा है। अभी तक 700 हेक्टेयर में बोवनी हो चुकी है। 1800 हेक्टेयर में बोवनी का काम पूरा होना है। अभी जिले की बात करें तो सीहोर, बुदनी, नसरुल्लागंज, आष्टा, इछावर आदि में कुछ बोवनी का काम बचा है।
अच्छी कीमत मिलती है: मूंग मार्च माह में ही 7 हजार रुपए प्रति क्विंटल बिका। इसी तरह इसके लिए थोड़ा सा ही पानी चाहिए होता है। करीब 400 मिमी बारिश में काम चल जाता है। सितंबर के प्रथम सप्ताह तक ही पानी की जरूरत होती है। सोयाबीन के लिए कम से कम 900 एमएम बारिश चाहिए और यह सिंतबर तक चाहिए।
 अरहर : पिछली बार अरहर 2850 हेक्टेयर में बोई गई थी जबकि इस बार इसका लक्ष्य 3 हजार हेक्टेयर रखा गया है। अभी तक की बात करें तो     2500 हेक्टेयर में बोई जा चुकी है।
इसके लिए क्या जरूरी: दिसंबर तक कटती है इसलिए इसे पानी की जरूरत होती है लेकिन इसके हिसाब से बारिश होती रहती है जिससे इसके उत्पादन पर असर नहीं पड़ता है।
धान: अभी 24 हजार हेक्टेयर रकबे में ही धान की बोवनी हुई है। पिछली बार 33 हजार 790 हेक्टेयर में बोवनी हुई थी जबकि इस बार इसका रकबा 34000 निर्धारित किया गया है।
मक्का: पिछली बार मक्का का रकबा 14 हजार हेक्टेयर था इस बार यह बढ़मकर 14500 हेक्टेयर हो गया है। इस तरह से इसका रकबा भी बढ़ गया है। यह इसलिए कि मक्का के भाव भी अच्छे मिल रहे हैं।
हर साल बढ़कर किसान को मिल रहे मूंग के दाम
इस बार मूंग का 2200 हेक्टेयर रकबा बढ़ा है जो अभी तक का सबसे अधिक है। पिछले साल मूंग और मक्का के भाव 7 हजार रुपए क्विंटल मिले थे। यही कारण है कि किसान अब इन दोनों फसलों में अधिक रुचि दिखा रहे हैं। पिछली बार भी जब अधिक बारिश हुई थी तो किसानों की सोयाबीन की फसल खराब हो गई थी।  डिप्टी डायरेक्टर कृषि विभाग एसएस राजपूत ने बताया कि जिले में 85 फीसदी से अधिक बोवनी का काम पूरा हो चुका है।

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