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संपन्नता:पूसा बासमती की महक, तेजस वैरायटी से गेहूं का भरपूर उत्पादन इस जीवनदायिनी की ही देन है

सीहोर13 दिन पहले
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हर हर नर्मदे...का जयघोष... सिर्फ धार्मिक ही नहीं संपन्नता का अलख भी जगाता है। यहीं कारण है जो जिले भर की लाइफ लाइन नर्मदा किनारे हजारों जमीन पर हरी-भरी फसल लहलहा रही है। सीहोर का जो तेजस गेहूं देश विदेेश में प्रसिद्ध है, वह इसी नर्मदा किनारे बसे गांवों में बाेया जाता है और इसी की चमक पूरी दुनिया चकाचौध है। अभी नर्मदा के पानी से बनेठा उद्धहन सिंचाई योजना में 13 गांवों का 2400 हेक्टेयर रकबा सिंचित हो रहा है लेकिन आने वाले दिनों में 8185 हेक्टेयर रकबे और सिंचित होने लगेगा। इसके लिए सीप अंबर सिंचाई मध्यम परियोजना बनाई गई है जिसका काम शुरू होने जा रहा है। नर्मदा के कारण ही रेत खदानों की नीलामी 109 करोड़ में हुई थी जिससे नसरुल्लागंज और बुदनी के हजारों लोगों को रेत के कारोबार से रोजगार मिला है। भास्कर की इस रिपोर्ट में पढ़िए कि कैसे नर्मदा जिले में संपन्नता लाई।

शुरुआत... 75 किमी का नदी का सफर: सीहोर जिले में नर्मदा बुदनी के सोमलवाड़ा से शुरू होती है जो छिपानेर तक करीब 75 किमी का सफर तय करती है। जिले में 30 रेत खदानें हैं जहां से रेत बाहर के कई जिलों के लिए जाती है।
वर्तमान... बनेठा उद्धहन सिंचाई योजना: योजना में 13 गांवों का 2400 हेक्टेयर रकबा सिंचित हो रहा है। इसमें वे गांव शामिल हैं जहां शरबती गेहूं और पूसा बासमती चावल पैदा होता है।
भविष्य... सीप अंबर सिंचाई काम्प्लेक्स मध्यम परियोजना: जल संसाधन विभाग के ईई दीपक चौकसे ने बताया कि सीप अंबर सिंचाई काम्प्लेक्स मध्यम परियोजना के माध्यम से 8000 हेक्टेयर रकबे को सिंचित करने की योजना है। इस योजना से कुरी, नयापुरा, बागलीखेड़ा, पलासी खुर्द, प्लासीकलां, सहित 30 गांवों को फायदा होगा।

फसल... पूसा बासमती की खुशबू को कौन नहीं जानता
नर्मदा के होने से बुदनी और नसरुल्लागंज क्षेत्र में पानी की कमी नहीं है। यही कारण है कि धान का सबसे अधिक रकबा बुदनी विकासखंड में ही है। यहां पर 33 हजार 800 हेक्टेयर रकबे में धान की फसल लगाई जाती है। पूसा बासमती की खुशबू और गेहूं की तेजस नामक वैरायटी का उत्पादन देश विदेश में प्रसिद्ध है।

रेत... 30 खदानों की नीलामी 109 करोड़ में
होशंगाबाद और भिंड के बाद सीहोर जिले की रेत खदानों की सबसे महंगी नीलामी हुई थी। ये महंगी खदानें तेलंगाना के पावरमैक समूह को मिली थीं। पावरमैक के पास मप्र की कुल रेत सप्लाई का एक तिहाई हिस्सा आया है। सबसे ज्यादा रेत होशंगाबाद, भिंड और सीहोर से ही निकलती है। सीहोर जिले में रेत की खदानों की संख्या 30 है। हर रोज करीब 700 से 1000 डंपर रेत के निकलते हैं। रेत के कारोबार से भी लोगों को काफी रोजगार मिला है।

पेयजल... बुदनी-नसरुल्लागंज के 219 गांवों की बुझ रही प्यास
बुदनी और नसरुल्लागंज के 219 गांवों के लोगों को नर्मदा का पेयजल मिल रहा है। चार समूह योजनाओं से इन गांवों को जोड़ा गया है। पीएचई विभाग के ईई एमसी अहिरवार ने बताया कि योजनाओं में बनेठा समूह योजना, मरदानपुर समूह योजना, नीलकंठ समूह योजना और छिपानेर समूह योजनाएं हैं।

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