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अनिश्चित हाे रहा मानसून:दाे दिन की बारिश से खरीफ फसल को नया जीवन देकर फिर रूठा मानसून, तेज धूप से कम हो रही नमी

सीहोर21 दिन पहले
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  • फसलों को पानी नहीं मिलने के कारण एक बार फिर बढ़ने लगी किसानों की चिंता

मानसून की अनिश्चितता के चलते एक बार फिर किसानों की चिंता बढ़ने लगी है लेकिन गनीमत यह रही कि एक पखवाड़े के लंबे अंतराल के बाद रविवार की रात में हुई तेज बारिश से किसानों की फसलों को नया जीवन मिल गया। इससे कुछ हद तक किसानों की चिंता कम हो गई, हालांकि बीते तीन दिन में बढ़ी उमस एवं तेज धूप ने एक बार फिर किसानों को चिंता में डाल दिया है।

कई किसानों ने दो दिन की हुई बरसात के बाद खेतों में नमी को देखते हुए खरपतवार नाशक और कीटनाशक दवाओं का स्प्रे कर अपनी फसलों को कीट मुक्त तो कर लिया लेकिन इतने से ही किसानों की समस्या खत्म होने वाली नहीं है।

क्योंकि यदि मानसून की स्थिति ऐसी ही रही तो खरीफ फसल से भरपूर उत्पादन लेना और आगे की फसल की तैयारी करना किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन सकता है। मानसून आने के पूर्व मौसम वैज्ञानिकों ने इस बात के दावे किए थे कि मानसून इस वर्ष उम्मीद से अधिक सक्रिय रहेगा और तय समय पर ही मानसून की शुरूआत होगी।

इससे किसानों में इस बात की खुशी थी कि अच्छी बरसात से वह अपनी फसल का भरपूर उत्पादन ले सकेंगे। मानसून की शुरूआत तो उम्मीद के अनुसार हुई लेकिन अचानक ही एक पखवाड़े के लिए मानसून भटक गया और क्षेत्र ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में मानसून सक्रिय होने का इंतजार किसान और मौसम वैज्ञानिक करते रहे।

अभी तक हुई 342 मिमी बरसात
प्री-मानसून की बरसात के साथ क्षेत्र में 342 मिमी यानि 13.6 इंच बरसात दर्ज की जा चुकी है। लेकिन अभी भी झमाझम बरसात का इंतजार लोगों को है। जुलाई का आधा माह बीतने के बावजूद भी उमस और गर्मी में कोई कमी नहीं आई है और लोग मानसून के तेजी के साथ सक्रिय होने का इंतजार कर रहे हैं।

वहीं मानसून के रूठने के कारण लोगों को इस समय वैशाख जैसी गर्मी का सामना करना पड़ रहा है लेकिन वर्ष 2019 की बात करें तो इस वर्ष 84 इंच तथा 2020 में 45 इंच से भी अधिक बरसात पूरे सीजन में हुई थी। ऐसे में अब लोग यह उम्मीद लगाए बैठे हैं कि शेष बचे मानसूनी समय में पानी की कमी को दूर हो जाएगी।

महीने भर बाद भी रिचार्ज नहीं हुए जलस्रोत
गत वर्ष की बारिश का आंकड़ा सामान्य बरसात के आसपास ही रहा था जिसके चलते जमीनी जल स्त्रोत रिचार्ज हो गए थे लेकिन वह ज्यादा समय तक चल नहीं सके। लेकिन इस वर्ष तो वर्षा काल का एक माह बीतने के बावजूद भी जमीनी जल स्त्रोत अभी तक रिचार्ज नहीं हुए हैं। इस करण शहरी क्षेत्र हो या ग्रामीण क्षेत्र सभी जगह ऊपरी जल स्त्रोत पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है।

दो दिन सक्रिय हुआ मानसून फिर लग गया ब्रेक
नसून के रूठने और फसलों के सूखने की स्थिति निर्मित होने पर किसानों की चिंता और अधिक बढ़ गई। इस दौरान शनिवार एवं रविवार रात में सक्रिय हुए मानसून ने तेजी के साथ आकर फसलों को तो नया जीवन दे दिया लेकिन उसके बाद 2 दिन का समय बीत चुके हैं और आसमान पर मानसून आने की संभावनाएं क्षीण नजर आ रही हैं जिससे अब लोगों को जल स्तर के घटने से पीने के पानी की समस्या भी उत्पन्न होने लगी है। क्योंकि जल स्तर पर ही रबी और जायद फसल का भविष्य टिका हुआ है।

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