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आवेदक नपा कार्यालय के लगा रहे चक्कर:नामांतरण मामले की 300 फाइलें एक साल से नपा में खा रहीं धूल, नहीं हो रहा निराकरण

विदिशाएक महीने पहले
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  • राजस्व शाखा के अधिकारी हर बार कर रहे चलता

एक तरफ सरकार नागरिकों की समस्याओं काे तत्काल हल करने की बात कर रही है। दूसरी ओर नगर पालिका में नामांतरण के लिए तीन सौ आवेदन एक साल से धूल खा रहे हैं। आवेदक नगर पालिका कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। राजस्व शाखा के अधिकारी हर बार उनको चलता कर देते हैं।

उनके आवेदनों का निराकरण नहीं हो रहा। हालत यह है कि मकानों का नामांतरण रोकने से कई लोगों के लोन रजिस्ट्रेशन निर्माण अटके हुए हैं। कई लोगों को सरकार की योजनाओं का लाभ तक नहीं मिल पा रहा। इसके लिए वह है जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों से भी मिलकर अपनी समस्याएं बता चुके हैं। उसके बाद भी परेशान है।

  • नगर पालिका में लंबित प्रकरणों की जानकारी मनाई जा रही है। किन कारणों से प्रकरणों का निराकरण नहीं हुआ। जांच के बाद जल्द ही उनका निराकरण किया जाएगा। -रोशन राय, एसडीएम गंजबासौदा।

नामांतरण रोकने से कई लोगों के लोन रजिस्ट्रेशन अटके, बढ़ रही है परेशानीे

​​​​​​​निराकरण के लिए नहीं कर रहे पहल
मकान मालिक या भूमि स्वामी की मृत्यु या फिर नवीन रजिस्ट्रेशन के जरिए खरीदी गई संपत्ति का नामांतरण नगर पालिका में होना आवश्यक है। नामांतरण होने के बाद उसके वैद्य मालिक को संपत्ति का मालिकाना हक प्राप्त होता है। नगर पालिका राजस्व शाखा प्रभारी नारायण डे के अनुसार नामांतरण के लिए वर्तमान में 300 आवेदन लंबित हैं।

इनमें से ढाई सौ एक साल पुराने हो चुके हैं। 50 आवेदन नए आए हैं। इन आवेदन राजस्व शाखा में पड़े हुए हैं। इनका निपटारा नहीं हो रहा है। जबकि आवेदकों की ओर से सारी पूर्तियां की जा चुकी हंै। उसके बावजूद भी इनके निराकरण के लिए पहल नहीं की जा रही।

नागरिक इसलिए परेशान
कई नागरिकों को नामांतरण के बाद बैंकों से निर्माण के लिए ऋण लेना है। कई लोगों को मकान निर्माण के लिए स्वीकृति प्राप्त करना है। क्योंकि मकान मालिक की मृत्यु के बाद जब तक नामांतरण नहीं होगा। उसके वैद्य मालिक को मकान निर्माण कराने , ऋण लेने, जल या बिजली कनेक्शन लेने प्रधानमंत्री आवास निर्माण के लिए पात्रता नहीं रहेगी।

इसी कारण कई नागरिक नामांतरण के लिए पिछले एक साल से नगरपालिका का चक्कर लगा रहे हैं। गौरव जैन वार्ड क्रमांक 10 और प्रभादेवी वार्ड क्रमांक 1 नामांतरण के लिए नगरपालिका कार्यालय के चक्कर काट रही है।

एक साल से जिम्मेदार टिक नहीं रहे
पिछले एक साल से सीएमओ पद गतिशील बना हुआ है। इस पद पर स्थाई रूप से कोई भी अधिकारी पिक नहीं पाया है। इस पद पर ज्यादातर प्रभारी अधिकारी ही रहे। पिछले दिनों सीएमओ के रूप में राकेश सक्सेना आए। 15 दिन मैं उनका स्थानांतरण हो गया। इसके पश्चात साक्षी बाजपेई ने पदभार संभाला उनके आते ही कोरोना की दूसरी लहर शुरू हो गई।

जैसे तैसे लहर शांत हुई। उनका स्थानांतरण ग्वालियर हो गया। वर्तमान में कुरवाई नगर पंचायत की सीएमओ को प्रभार दिया गया है। प्रभार लेने के बाद आज तक नहीं आए। परिणाम स्वरूप लंबित आवेदनों का निराकरण नहीं हो पा रहा। इसके कारण लोग परेशान हैं।

प्रशासक ने रुचि नहीं दिखाई
वर्तमान नगर पालिका और मंडी के प्रशासक एसडीएम हैं। पद मुक्त प्रशासक राजेश मेहता ने लंबित फाइलों को निपटाने में रुचि नहीं ली। उनका अधिकांश कार्यकाल कोरोना व्यवस्था के बीच निकल गया। इसके कारण नगर पालिका में लंबित फाइलों का अंबार लगा हुआ है। इसी प्रकार कृषि मंडी में भी हम्माल मजदूर व्यापारियों के सही प्रकरण लंबे चल रहे हैं। सभी उनके निराकरण के लिए परेशान हैं।

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