नदी का पानी उतरने के बाद:बरसाती- बांस के सहारे टिके मिट्‌टी के 404 मकान बने मलबा, जो बचे वह अब रहने लायक ही नहीं बचे

विदिशा2 महीने पहले
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कुरवाई क्षेत्र के सिरावदा गांव में बाढ़ के बाद दिखी तबाही। - Dainik Bhaskar
कुरवाई क्षेत्र के सिरावदा गांव में बाढ़ के बाद दिखी तबाही।
  • बाढ़ से जिले के 3298 मकान क्षतिग्रस्त, 50 मवेशी बहे, सर्वे जारी

2 दिन पहले तक कुरवाई का सिरावदा, कजरयाई, वीरपुर, मदउखेड़ी, जुन्हैयाखेड़ी आदि गांव पूरी तरह से आबाद थे। यहां ज्यादा खुशहाली तो नहीं थी, लेकिन दो जून की रोटी के लिए भटकना नहीं पड़ता था। मगर आज हर तरफ तबाही का मंजर ही दिखाई दे रहा है। शुक्रवार को हुई बारिश के बाद आई बाढ़ ने यहां सब कुछ तबाह कर दिया है। इन गांव में 404 से ज्यादा घर बर्बाद हो गए हैं। कई घर तो मिट्टी के बने से होने से पानी में गल गए हैं। जो बचे भी हैं वो रहने लायक नहीं हैं। वह इतने जर्जर हो चुके हैं कि कभी भी गिर सकते हैं। गांव में अब तक मदद नहीं मिल पाई है। इन गांवों के अनिल, रामस्वरूप और रघुवीर यादव ने बताया कि अचानक पानी बढ़ने ने कुछ घंटों में पूरे गांवों में पानी भर गया था। हम किसी तरह से अपने आपको बचा पाए। कई लोगों के कुछ देर में ही कच्चे मकान गिर गए। अब तक कोई मदद नहीं मिली है। वहीं करमेड़ी, दीपनाखेड़ा, भटोली, कुम्हारिया और सरकंडी के लोगों का कहना है कि प्लास्टिक की आड़ में हम लोग रह रहे हैं। घर में जो कुछ था वह बचा नहीं है। पता नहीं आगे की जिंदगी कैसे कटेगी। वहीं सिरोंज में शुक्रवार को क्षेत्र की नदियों में आई बाढ़ गहरे जख्म छोड़ कर गई है। शहर के अलावा ग्रामीण इलाकों में इस बाढ़ से तबाही का मंजर दिखाई दे रहा है। 1756 मकान आंशिक तो 264 मकान पूरी तरह नष्ट हो गए है। 202 लोगों को प्रशासन ने राहत शिविर में भेजा है। कई लोग ऐसे भी हैं जिन्हें राहत शिविरों के अलावा पड़ोसियों और रिश्तेदारों का सहारा मिला है।

तबाही का मंजर, न भूलने वाला दर्द

उजड़ी गृहस्थी देखकर भर आए आंसू

नटेरन... गांव के मनोज पुत्र अमरसिंह का कहना है कि गांव के कई घर मलबा में बदल गए हैं। मानसिंह खटीक का कहना है कि तबाही का जो मंजर देखा है वह कभी भूल नहीं पाएंगे। शनिवार को विधायक राजश्री सिंह और पूर्व विधायक रुदप्रतापसिंह पहुंचे तो उजड़ी गांव के लोगों की आंखें भर आई हैं। बसोरीलाल कटारिया के 35 क्विंटल चना बारिश में खराब हो गया है। इतना ही नहीं खाने का सारा सामान भी खराब हो गया है।

सोसायटी के भवन में भरा पानी, गेहूं हुए खराब: ग्राम पंचायत काछी कुम्हरिया के ग्राम जुन्हैयाखेडी की हालत बयान करते हुए प्राथमिक साख सहकारी समिति के सचिव प्रमोदसिंह राजपूत ने बताया कि गोदाम में रखा 200 बोरा गेहूं खराब हो गया। सिरावदा के समाजसेवी विनोद शिवहरे ने बताया कि लोगों के खाने पीने का कोई प्रबन्ध नहीं होने से ग्राम की दहलान में ठहरे हुए हैं। माला व सिरावदा के लोग मिलकर व्यवस्था कर रहे हैं। ग्राम पिथौली के दशरथसिंह राजपूत ने बताया कि 25 कच्चे मकान पूरी तरह गिर गए हैं। कुरवाई तहसीलदार हेमंत शर्मा का कहना है कि 2 दिवस के अन्दर रिपोर्ट तैयार की जा रही है।

प्रशासन कर रहा है प्राथमिक सर्वे

शुक्रवार को आई बाढ़ का प्राथमिक सर्वे प्रशासन किया है। 3298 मकानों में नुकसान हुआ है। जिसमें से 404 टूट चुके तथा 2894 मकानों में आंशिक रूप से क्षति हुई हैं। वहीं 50 मवेशी बाढ़ की वजह से मर गए।
-डाॅ. पंकज जैन , कलेक्टर, विदिशा।

राहत शिविरों में 202 लोग, कई पड़ोसियों और रिश्तेदारों के घर में

पत्नी को 8 माह का गर्भ इसलिए भाग नहीं सके 24 घंटे 16 फीट लंबे शीशम के पेड़ पर बिताए

केथन नदी मेंं शुक्रवार सुबह 5 बजे आई बाढ़ में रिनिया गांव गौरव कुशवाह परिवार चारों तरफ से घिर गया। सारी रात प्रशासन इस परिवार को निकालने की मशक्कत करता रहा। इसके बाद विदिशा से आई एनडीआरएफ की टीम ने शनिवार सुबह रेस्क्यू कर परिवार के सभी 6 सदस्यों को 16 फीट ऊंचे पेड़ से नीचे उतार कर बाढ़ से बाहर निकाला। बताया जाता है 12 फीट तक केथन का पानी बह रहा था। ये टीम गौरव कुशवाह 28, छोटू कुशवाह 25, लक्ष्मीबाई 26, सुनीताबाई 24, यश 9 वर्ष और बिट्टू कुशवाह 2 वर्ष को अपने साथ निकाल कर लाई। रेस्क्यू के बाद घर वापस लौटे गौरव ने बताया कि नदी का पानी तेज गति से आ रहा था। गांव से घर 400 मीटर दूर है। पत्नी लक्ष्मी, छोटा भाई छोटू और उसकी पत्नी सुनीता हम तेज से सामान बटोरने लगे। लक्ष्मी को 8 माह का गर्भ है। ऐसे में तेज भाग भी नहीं सकते थे। दोनों बच्चों को गोद में उठाया ही था कि पानी घर तक आता दिखाई दिया।

शीशम का पेड़ ही एकमात्र सहारा दिखाई दिया बच्चों को लेकर उस पर ही चढ़ गए। बच्चों को समझाइश देते हुए शुक्रवार को पूरा दिन और फिर सारी रात इस पेड़ पर ही बिताई। गांव के लोग और रेस्क्यू टीम नहीं होती तो बच कर वापस नहीं आते। इन लोगों की सुरक्षा के लिए सरपंच प्रतिनिधि राकेश बघेल और मुकेश शर्मा सारी रात जागते रहे। सचिव मुकेश कुशवाह ने बताया कि कलेक्टर पंकज जैन हर पल की जानकारी ले रहे थे। उन्होंने 7 बार खुद मोबाइल कर मुझसे जानकारी ली। 1756 मकान आंशिक तो 264 मकान पूरी तरह नष्ट हो गए है। इनमें कच्चे और पक्के दोनों ही तरह के मकान है। इनमें रहने वाले 202 लोगों को प्रशासन ने राहत शिविर में भेजा है। कई लोग ऐसे भी हैं जिन्हें राहत शिविरों के अलावा पड़ोसियों और रिश्तेदारों का सहारा मिला है।

25 बीघा क्षेत्र में सब्जी की फसल बह गई

बाढ़ से शहर का पंचकुइया इलाका, काजी घाट, सिकंदपुरा, लटेरी नाका, तहसील रोड और कटरा मोहल्ला सर्वाधिक प्रभावित हुए है। लटेरी नाका पर रहने वाले मदन मालवीय ने बताया सुबह जब पानी घर तक आया तो सिर्फ जान बचाने का ध्यान आया। कपड़े, सामान और अनाज सभी बह गया। पंचकुइया और राणापुर में कई किसानों की 25 बीघा एरिया इलाके में भिंडी, ककड़ी, गिलकी, गोभी और पालक की फसल को नदी बहा कर ले गई।

जवाहरी नदी के बहाव के कारण सिरोंज-बीना हाइवे सबसे ज्यादा क्षतिग्रस्त हुआ है। नदी का बहाव शनिवार को भी तेज था। इस कारण मरम्मत का काम शुरू नहीं हो सका। एसडीएम अंजली शाह ने बताया कि पुल पर से आवागमन कब शुरू होगा ये कह नहीं सकते।

बाढ़ में बहने से मानसिक विक्षिप्त की मौत

बाढ़ में बहने से 40 वर्षीय मानसिक विक्षिप्त युवक(रवि उर्फ भूरा कलावत निवासी प्रभात पेट्रोल पंप भोपाल) की मौत हो गई। शव कुरैशी समाज के कब्रिस्तान के पास लकड़ियों के ढेर में फंसा मिला।

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