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इस्तीफा देने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ता सक्रिय:संगठन के हित में जिलाध्यक्ष कमल का इस्तीफा न स्वीकारें

विदिशा13 दिन पहले
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कांग्रेस जिला अध्यक्ष कमल सिलाकारी द्वारा अपना इस्तीफा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ को भेजने के बाद पार्टी में सरगर्मी बढ़ गई है। इस्तीफा देने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ता सक्रिय हो गए। पार्टी के सीनियर नेताओं और कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को आनन-फानन में अग्रवाल धर्मशाला में बैठक बुलाई। सभी के एक सुर... बैठक बुलाकर कांग्रेस के नेता एक स्वर में बोले कि कांग्रेस जिलाध्यक्ष कमल सिलाकारी का इस्तीफा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ स्वीकार ना करें। इसके लिए ठहराव प्रस्ताव पास किया गया।

प्रस्ताव में कांग्रेस के तमाम नेताओं ने हस्ताक्षर किए और यह पत्र प्रदेशाध्यक्ष को भेजा। ठहराव प्रस्ताव में कहा गया है कि गुरुवार को कांग्रेस परिवार ने संयुक्त रूप से ठहराव किया है कि जिला कांग्रेस अध्यक्ष कमल सिलाकारी द्वारा अपने पद से दिए गए त्याग पत्र को संगठन हित में मान्य नहीं किया जाए और पार्टी के एकता के लिए संगठन स्तर पर प्रयास किया जाना चाहिए। कांग्रेस नेता आनंद प्रतापसिंह का कहना था कि श्री सिलाकारी के इस्तीफा देने से कांग्रेस परिवार आहत है। संगठन हित में उनका अध्यक्ष बने रहना जरूरी है।

इन नेताओं के हस्ताक्षर: ठहराव में कांग्रेस के 42 नेताओं के हस्ताक्षर शामिल हैं। इनमें पूर्व सांसद प्रतापभानु शर्मा, ह्रदय मोहन जैन, बसंत जैन, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष अशोक ताम्रकार, कांग्रेस नेत्री आशा सिंह राजपूत, महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रियंका किरार, प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री पंकज जैन] यूथ कांग्रेस के जिला अध्यक्ष भारद्वाज, पूर्व विधायक मेहताबसिंह यादव, करतार सिंह, मनोज कपूर, रणधीर सिंह, वीरेंद्र पीतलिया, राजेश दुबे सहित कई कार्यकर्ताओं के हस्ताक्षर हैं।

सिलाकारी बड़े भाई: विधायक
कांग्रेस जिलाध्यक्ष के इस्तीफा देने पर विधायक शशांक भार्गव का कहना है कि कमल सिलाकारी मेरे बड़े भाई हैं। जिलाध्यक्ष बनने के लिए हमनें उनका नाम प्रस्तावित किया था। उनसे मेरे पारिवारिक संबंध भी हैं। हम चाहते हैं कि वे कंटीन्यू रहें। इस्तीफा देने के मामले में मेरी उनसे कोई चर्चा नहीं हुई।
काम करना मुश्किल: कमल
कमल सिलाकारी का कहना है कि मैं ऐसे माहौल में काम नहीं कर सकता। इस माहौल में मैं खुद को बहुत असहज महसूस करता हूं। इसलिए मैंने इस्तीफा दिया है। वर्तमान में पार्टी का काम करना काफी मुश्किल हो गया था। इस्तीफे के इस मामले में मैं किसी पर कोई भी आरोप नहीं लगाना चाहता।

यह हैं अब दावेदार: विधायक के खास माने जाने वाले शहर कांग्रेस अध्यक्ष वीरेंद्र पीतलिया, मोहित रघुवंशी, मोहरसिंह रघुवंशी, विदिशा व्यापार महासंघ के पूर्व अध्यक्ष सुरेश मोतियानी, महेंद्र यादव और महिला कांग्रेस के जिला अध्यक्ष प्रियंका किरार।

मई 2020 में संभाला था पद: सिंधिया गुट के शैलेंद्र रघुवंशी के भाजपा में शामिल होने के बाद मई 2020 में सिलाकारी को जिलाध्यक्ष बनाया था।

अंदर की बात... नकारात्मक सोच के नेताओं से घिरे कमल
कमल सिलाकारी की कांग्रेस में भूमिका अजातशत्रु की तरह रही। वे कांग्रेस के हर संघर्ष में साथ रहे। मई 2020 में जब वे जिलाध्यक्ष बने तब उन्हें कांग्रेस के नकारात्मक सोच के नेताओं ने घेर लिया। इस वजह से उनकी और विधायक शशांक भार्गव के बीच की दूरी लगातार बढ़ी। हालांकि इसके बाद भी दोनों नेता एक-दूसरे से मिलते रहे। वहीं आने वाले निकाय चुनाव में जिलाध्यक्ष के निर्णयों को पार्टी संगठन सुने और उसी हिसाब से टिकट बांटे। निकाय चुनाव से भी इस्तीफा देने के मामले को जोड़ा जा रहा है।


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