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बारिश का इंतजार:किसानों पर दोहरी मार, खेतों में खरीफ फसलें सूखने की कगार पर, इल्लियों का भी प्रकोप

विदिशाएक महीने पहले
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  • 95 हजार 480 हेक्टेयर में होती है खरीफ फसल की बोवनी, पठारी इलाकों में पानी की कमी

फसलों को बचाने के लिए किसान कहीं इल्ली मारने दवा डाल रहे हैं तो कहीं आसमान में छाए बादलों को बारिश की आस में ताक रहे हैं। इस बार विकासखंड में फसल के मान से कहीं ठीक बारिश है तो कहीं कम है। खंड बारिश से किसान परेशान है। जहां बारिश ठीक है वहां फसलों पर इल्लियों के हमले की आशंका बन रही है। जहां पठारी इलाके हैं वहां पानी कम है। किसान फसल को बचाने बारिश का इंतजार कर रहे हैं। इस साल विकासखंड में खरीफ फसल बोवनी 95 हजार 480 हैक्टेयर में की गई है। बारिश एक जैसी नहीं है। कहीं अच्छा पानी है। कहीं कम है। इससे इसका प्रभाव फसल पर पड़ रहा है। इससे किसान की चिंता है। जिन लोगों ने धान की बोवनी की है। उनकी फसल पर काफी संकट है। फसलें अब पानी मांग रहीं है। कई जगह पिछले पंद्रह दिन से बारिश का नामोनिशान नहीं है। गर्मी अलग पड़ रही है। वहां बारिश नहीं हुई तो जमीन की नमी लगातार घटने से फसलें सूखने लगेंगी।

पानी नहीं मिला तो उत्पादन पर पड़ेगा असर
कृषि महाविद्यालय के डा. सतीष शर्मा ने बताया वर्तमान में खंड वर्षा की स्थिति बनी हुई है। खरीफ फसल को समय पर पानी नहीं मिला तो उत्पादन पर असर पढ़ेगा। उत्पादन में गिरावट आएगी। बारिश जरुरी है। एक सप्ताह में बारिश हो जाए तो भी फसलों संभल जाएंगी। धान की फसल को वर्तमान में पानी मिलना बहुत जरुरी है।
फसल तो अच्छी है, लेकिन बारिश का टोटा
^इस साल वर्तमान में फसल अच्छी है। खंड बारिश की स्थिति बनी हुई है। उथली जमीनों की फसलें को पानी चाहिए। बारिश समय पर न होने से उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
एके कौरव, एसएडीओ कृषि विभाग गंजबासौदा।

खरपतवार नहीं, फिलहाल सिर्फ पौधे ही है
इस बार खेतों में खरपतवार दिखाई नहीं दे रही। सिर्फ पौधे दिखाई दे रहे हैं। इधर पंद्रह दिन से पर्याप्त बारिश बंद होने से गर्मी के हालात बने हुए है। उथली जमीनों की नमी लगातार कम हो रही है। इससे फसलें पानी मांग रहीं हैं। तो दूसरी तरफ इल्ली का प्रकोप शुरु होने के कारण वहां किसान फसल बचाने के लिए कीटनाशक दवा का छिड़काव कर रहे हैं।

फसल अच्छी है, लेकिन बारिश नहीं होने से संकट होगी
ग्राम भर्री के किसान प्रमोद शर्मा ने बताया विकासखंड में खरीफ फसल वर्तमान में अच्छी है। खरपतवार भी दिखाई नहीं दे रही है। फूल पर आ चुकी है। ग्राम बाबली के सुरेंद्र शर्मा ने बताया फसल को समय अनुसार बारिश का पानी मिलता जाए तो इस साल बंपर पैदावार मिल सकती है। यदि बारिश समय पर नहीं हुई तो किसानों को संकट का सामना करना पड़ सकता है।
खरीफ फसल बोवाई का लक्ष्य पाना हो सकता है मुश्किल
विकास खंड में खरीफ फसल बोवाई का लक्ष्य 95 हजार 480 हैक्टेयर रखा गया है। इसमें सोयाबीन, उड़द, तुअर, मूंग, मंूगफली, ज्वार, और धान शामिल है। समय पर मानसूनी बारिश के कारण किसान लक्ष्य गत खरीफ फसल करने में सफल रहे। इस साल विकास खंड में समान बारिश नहीं है। कहीं पानी ज्यादा गिर रहा है। कहीं कम इससे पठारी इलाकों की जमीनें पानी मांग रहीं हैं।

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