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मुश्किल भरी राहत:मानसून की विदाई फिर भी हलाली, रेहटी और बघर्रू के अलावा अभी बांधों का पेट 50 फीसदी तक खाली

विदिशा2 महीने पहले
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  • हलाली डैम से विदिशा और रायसेन नगरीय निकाय को मिलेगा भरपूर पानी

जिले से मानसून की विदाई लगभग हो चुकी है लेकिन हलाली, रेहटी और बघर्रू बांध के अलावा अन्य सभी डैमों का पेट अभी तक खाली है। हलाली बांध की जल ग्रहण क्षमता 1508 फीट तक है। हलाली डेम इस साल अपनी पूरी क्षमता से अधिक 111.26 फीसदी तक भरा हुआ है। पिछले साल भी यह ओवर फ्लो हो गया था। इसके अलावा मीडियम प्रोजेक्ट की श्रेणी में आने वाले रेहटी और बघर्रू बांध भी 100 फीसदी तक भरे हुए हैं। इसके अलावा संजय सागर बांध भी इस बार 93.47 फीसदी ही भरा है। सगड़ बांध 73.14, कैथन बांध 55.42 और नरेन बांध 46.81 फीसदी ही भरे हैं। जिले के अन्य माध्यम और छोटी सिंचाई परियोजनाओं वाले डैम 50 से 55 फीट तक खाली पड़े हैं। हलाली, रेहटी और बघर्रू बांध से किसानों को रबी सीजन में पलेवा के बाद दूसरी बार सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल सकेगा। हलाली डैम से विदिशा और रायसेन जिले में करीब 65 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सिंचाई होती है। इतना ही नहीं विदिशा और रायसेन नगरीय क्षेत्र में पूर्ति के लिए भी हलाली डैम से ही पानी मंगाना पड़ता है। इसके अलावा अन्य सभी बांधों से भी 2 लाख हेक्टेयर से अधिक रकबा सिंचित होता है। विदिशा जिले में सामान्य बारिश भी पूरी नहीं हो सकी है। अभी 1059.4 मिमी बारिश हुई है जोकि सामान्य से 16.5 मिमी कम है।

औसतन 50 फीसदी तक भर सके जिले के प्रमुख बांध
किसान फसलों की सिंचाई में समस्या आने को लेकर चिंतित हैं। हालात यह हैं कि हलाली, रेहटी और बघर्रू के अलावा सभी बांध 50 से 55 फीसदी तक खाली हैं। हलाली बांध 1508 फीट तक भरने के बाद अभी भी ओवर फ्लो चल रहा है। संजय सागर बांध सिर्फ 93.47 फीसदी भरा है।

किस डेम में कितने फीसदी भरा पानी
बांध फीसदी

हलाली 118.26
रेहटी 100
सगड़ 73.74
संजय सागर 93.47
कैथन 55.42
नरेन 46.81
बघर्रू 100.00
स्रोत: जल संसाधन संभाग विदिशा

सिंचाई और पेयजल के लिए परेशानी होगी
जिले में अभी तक 1059.4 बारिश ही हुई है जो कि औसत जिले की सामान्य बारिश 107.5 सेमी से बहुत कम है। अभी तक करीब 16.5 मिमी बारिश कम है। कम बारिश की वजह से जहां सतही जल स्त्रोत खाली पड़े हुए हैं, वहीं ग्राउंड वाटर लेवल भी बहुत कम है। गर्मी में पीने का पानी भी लोगों को मुश्किल से मिलेगा। बांधों से पर्याप्त रबी सीजन में पर्याप्त सिंचाई का पानी दे पाना मुश्किल होगा, वहीं पेयजल आपूर्ति के विकल्प तैयार करना चुनौती से कम नहीं होगा। उल्लेखनीय है कि जिले में करीब 2.50 लाख हेक्टेयर रकबे में बांध, तालाब, चैक डेम आदि सतही जल स्त्रोंतों से सिंचाई होती है।

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