राधा-रानी मंदिर के खुले पट:पूर्व सीएम उमा भारती ने किए राधा-रानी के दर्शन, भक्तों के साथ गाया - राधारानी की जय, महारानी की जय

विदिशा3 महीने पहले
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राधा-रानी मंदिर में पूर्व सीएम उमा भारती ने भजन गाया। - Dainik Bhaskar
राधा-रानी मंदिर में पूर्व सीएम उमा भारती ने भजन गाया।

साल में सिर्फ एक दिन खुलने वाले राधा रानी का दरबार मंगलवार को राधाष्टमी के अवसर पर भक्तों के लिए खोला गया। राधा-रानी के दर्शन को अलसुबह मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती भी मंदिर पहुंचीं। पिछले साल की तरह ही इस बार भी उन्होंने आशीर्वाद लेते हुए भक्तों के साथ भजन गए। सुबह-सुबह उमा भारती ने 'राधा रानी की जय, महारानी की जय' भजन गाकर मंदिर का पूरा माहौल भक्तिमय कर दिया।

बोलीं- राजनीति की बात मत करो
राधारानी के दरबार में राधाष्टमी के मौके पर दर्शन करने के बाद उमा भारती ने मीडिया से बात की। उन्होंने कहा - पिछले साल से यहां आ रही हैं। पिछले साल कोरोना के कारण बरसाने नहीं जा पाई क्योंकि वहां मंदिर के पट बंद थे। तब उन्हें पता चला कि बरसाने के अलावा विदिशा में भी राधा जी का 300 साल पुराना मंदिर है और वह इसलिए पिछले साल की भांति इस साल भी राधारानी के दरबार आई हैं। जब उनसे पूछा गया कि प्रदेश में आप कम सक्रिय दिख रही हैं, ऐसा क्यों... इस पर उन्होंने कहा- राजनीति की बात मत करो, इतना बोलकर वे यहां से रवाना हो गईं।

पूर्व सीएम उमा भारती ने आरती भी की।
पूर्व सीएम उमा भारती ने आरती भी की।

आज के कार्यक्रम

  • दोपहर 12 बजे जन्मोत्सव और तिलक दर्शन का कार्यक्रम
  • शाम 5 बजे उत्थापन दर्शन।
  • शाम 6 बजे भोग दर्शन और मटकी छेदन का कार्यक्रम
  • शाम 6.30 बजे से संध्या आरती।
  • रात 10 बजे तक लगातार पालना दर्शन, बधाइयां, हवेली संगीत, समाज गायन और भजन संध्या का दौर चलेगा।

कल के कार्यक्रम

  • सुबह 5 बजे मंगल आरती।
  • शाम 5 बजे उत्थापन दर्शन।
  • शाम 5.30 बजे भोग दर्शन।
  • शाम 6 बजे संध्या आरती।
  • 6.30 बजे पालना दर्शन।
  • 10 बजे शयन आरती के बाद फिर एक साल के लिए पट बंद।

मंदिर का इतिहास
विदिशा के नंदवाना में स्थित यह मंदिर लगभग 300 साल पुराना है। मंदिर के पुजारी मनमोहन शर्मा ने बताया कि उनके पूर्वज मुगल आक्रमणकारियों से बचाकर यह मूर्ति ब्रज से पैदल लेकर विदिशा आए थे और किसी को इसकी भनक न लगे इसलिए गुप्त रूप से पूजा अर्चना करते रहे। यही परंपरा अभी भी जारी है। उनकी तेरहवीं पीढ़ी, आज मंदिर में पूजा-पाठ कर रही है। आज भी सालभर मंदिर में गुप्त पूजा की जाती है और साल में एक बार राधा अष्टमी के अवसर पर भक्तों के लिए मंदिर के पट खोले जाते हैं।

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