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मन से त्यागें मृत्यु भोज:मृत्युभोज से बचने वाले रुपयों से अस्पताल में बनवाया मेटरनिटी वार्ड और आईसीयू

विदिशा10 महीने पहले
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जिले के लोगों ने न सिर्फ मृत्यु भोज को बंद करने की पहल की बल्कि उससे बचने वाले पैसों से अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए मेटरनिटी वार्ड और आईसीयू तक बनवा दिया। कई लोग अपने परिजनों की स्मृति में ट्रस्ट बनाकर गरीब बच्चों को स्कॉलरशिप दे रहे हैं। इतना ही नहीं गौशाला के लिए जमीन तक दान कर दी। कुशवाह समाज के युवा गोपाल कुशवाह ने मृत्युभोज से बचने वाले 50 हजार रुपए की राशि डायलिसिस के लिए दान कर दी।

1. पत्नी की स्मृति में अस्पताल में बनवाया मेटरनिटी वार्ड
विदिशा के पूर्व सांसद प्रतापभानु शर्मा की पत्नी रेणु शर्मा का 15 अक्टूबर 2005 को निधन हो गया था। मृत्युभोज से बचे हुए 3.50 लाख रुपए की लागत से सरकारी अस्पताल में मेटरनिटी वार्ड बनवा दिया था। जब 18 अगस्त 2012 को माताश्री बसंती देवी शर्मा के निधन पर ब्राम्हण समाज के भवन में एक कक्ष बनवा दिया। एक लाख रुपए समाज के कार्यों के लिए भी दान कर दिया।

2. पिता के निधन पर  बनवाया आईसीयू वार्ड 
विदिशा के आर्किटेक्ट इंजीनियर रंजीत सत्यनेशन के पिताश्री नीलकंठ सत्यनेशन का 20 जनवरी 2003 को निधन हो गया था। उन्होंने  पिताश्री की स्मृति में बचे हुए 1.75 लाख रुपए से एक 4 बिस्तरों वाला वार्ड बनवा दिया। इस वार्ड को बाद में आईसीयू में तब्दील कर दिया गया। इसके अलावा रंजीत सत्यनेशन हर साल एक गरीब बच्चे को पिताश्री की स्मृति में स्कॉलरशिप भी देते हैं।

3. मां की स्मृति में गोशाला के लिए दान की 3 बीघा जमीन
विदिशा के समाजसेवी गोविंद देवलिया के बेटे श्रेय देवलिया का निधन 15 जुलाई 2011 को हो गया था। उन्होंने श्रेय देवलिया स्मृति ट्रस्ट बनाकर सरकारी स्कूलों के 10 प्रतिभाशाली बच्चों को स्कॉलरशिप देने का काम किया। फिर माताश्री शांति देवी देवलिया के निधन पर पत्नी सरोज देवलिया के नाम की 3 बीघा जमीन ट्रस्ट बनाकर गोशाला को दान कर दी।

4. धर्मशाला निर्माण के लिए 51 हजार किए दान
मप्र कुर्मी क्षत्रीय समाज विकास समिति के अध्यक्ष और पूर्व नपाध्यक्ष संतोष चौरे ने मां की स्मृति में समाज की धर्मशाला निर्माण के लिए 51 हजार रुपए दान किए हैं। उन्होंने बताया कि मृत्युभोज जैसी कुप्रथा को खत्म करने के लिए हर समाज के प्रभावी और सम्पन्न तबके को आगे आना होगा। जनवरी 2019 में जब मेरी माताजी मथुराबाई चौरे का देहांत हुआ था।

यदि समाज और संगठन इस कुप्रथा को पूरी तरह बंद करने के लिए सहमत हैं तो पदाधिकारी समाज की सहमति हमें वॉट्सएप पर भेज सकते हैं। हम आपकी सहमति को प्रकाशित करेंगे जिससे अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिल सके। जो पदाधिकारी नहीं हैं वे भी अपनी राय दे सकते हैं। मृत्यु भोज में शामिल नहीं होने का निर्णय लेने वाले भी सिर्फ सहमत लिखकर आप हमें 9425044710 पर वॉट्सएप भेज सकते हैं।

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