मिसाल:अकेले बाइक से पहुंचा रहे प्राणवायु 12 दिन में 25 मरीजों को दीं सांसें

विदिशा6 महीने पहले
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15 दिन से शहर 
की स्थिति खराब है। मेरे प्रयास से अगर किसी की जान बच जाए तो मेरा जीवन सार्थक हो जाएगा। सोहिल अहमद - Dainik Bhaskar
15 दिन से शहर की स्थिति खराब है। मेरे प्रयास से अगर किसी की जान बच जाए तो मेरा जीवन सार्थक हो जाएगा। सोहिल अहमद
  • जान बचाने का जज्बा इतनी कि 24 घंटे भी पड़ रहे कम

पेढ़ी खाई रोड निवासी सोहिल वैसे पेशे से टेलर हैं लेकिन कोरोना संक्रमण के दौर में उन्होंने करीब 15 दिनों में 25 से ज्यादा मरीजों की जान बचाने का काम किया है । वे जरूरतमंदों की मदद के लिए बाइक पर अकेले प्राणवायु को टेंकर पर रखकर मरीजों को सांसें पहुंचा रहे हैं।

सोहिल अहमद कई बार सिलेंडर के रेगुलेटर और अन्य खराबी आ जाने पर ऐसे लोगों की सूचना देने पर तत्काल पहुंचकर समस्या का समाधान भी कर रहे हैं।

इस दौर में लोग अपनों के करीब नहीं जा रहे वहीं सोहिल श्मशान में लोगों को दफनाने भी जाते हैं। वे कहते हैं कि लोगों की सेवा में 24 घंटे भी कम पड़ रहे हैं।

ठीक होने पर पहले प्लाज्मा और अब दे रहे रक्तदान की सीख

माधवगंज निवासी प्रशांत खत्री अक्टूबर में कोरोना से संक्रमित हुए थे। स्वस्थ होने के बाद सबसे पहले उन्होंने एक गंभीर मरीज को भोपाल जाकर प्लाज्मा दिया। उनका कहना है कि शुरुआत में कई लोग प्लाज्मा देने से डर रहे थे। जब मैंने प्लाज्मा दान किया तो इसके बाद मेरे कई दोस्त आगे आए। इसके अलावा वे दो बार रक्तदान भी कर चुके हैं।

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