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अधूरी तैयारी:स्वरूप नगर रेलवे फाटक को स्थाई रूप से किया बंद, आरओबी पर ट्रैफिक शुरू

विदिशा10 महीने पहले
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रेलवे ने स्वरूप नगर रेलवे फाटक क्रमांक 288 को स्थाई रूप से बंद कर दिया गया।  मंगलवार से आरओबी पर ट्रैफिक शुरू हो गया है। इसकी सूचना स्टेशन प्रबंधक ने एसडीएम, तहसीलदार, थाना प्रभारी को विधिवत पत्र लिखकर दे दिए हैं। साथ ही सड़क के बीच बोर्ड लगा दिया गया है। फाटक के दोनों ओर स्लीपर रखने की तैयारी चल रही है। इससे दोपहिया वाहन चालक या साइकिल यात्री पार न कर सकें। रेलवे फाटक से सटा स्वरूप नगर गांव है। रहवासियों का कहना है कि अंडर ब्रिज का निर्माण पूरा होने के बाद रेलवे को फाटक स्थाई रूप से बंद करना था। साइकिल चालकों, पैदल राहगीरों को समस्या आएगी। उनको 25 मीटर दूरी के लिए अब दो किमी का चक्कर लगाना पड़ेगा। 
5 साल पहले हुआ था स्वीकृत: स्वरूप नगर आरओबी 5 साल पहले स्वीकृत किया गया था। भूमि अधिग्रहण और निर्माण में 5 साल का समय लग गया। सबसे ज्यादा समय रेलवे क्षेत्र के निर्माण पर लगा। लॉक डाउन के कारण काम 3 महीने पिछड़ गया। वैसे इसे मई तक पूरा करने का लक्ष्य था। जुलाई के मध्य तक आरओबी ट्रैफिक के लिए खोल दिया जाएगा।
फाटक से बाजार की दूरी 25 मीटर
रेलवे फाटक के पूर्वी छोर से सटा स्वरूप नगर गांव है इसी गांव से सटकर अंडर ब्रिज का निर्माण चल रहा है। रहवासी तवर सिंह रघुवंशी, एडवोकेट अमन सिंह राजपूत , इमरत सिंह राजपूत का कहना है कि गांव के लोगों को जरूरत का सामान लेने दिन में सैकड़ों बार बाजार जाना पड़ता है। फाटक से बाजार की दूरी मात्र 25 मीटर है। आरओबी से बाजार जाने के लिए बारिश में 2 किमी का चक्कर लगाना पड़ेगा। यदि फाटक को बंद करना था तो अंडर ब्रिज का काम पूरा होने तक इंतजार करना था। इससे ग्रामीणों को समस्या का सामना नहीं करना पड़ता।
यह है अंडर ब्रिज की स्थिति

रेलवे लाइन के नीचे अंडर ब्रिज का काम पूरा हो चुका है। दोनों ओर सपोर्ट दीवार सीसी रोड  का निर्माण पहुंच मार्ग के रूप में किया जाना है। यह कार्य 2 महीने में पूरा हो सकता है लेकिन ठेकेदार की निर्माण गति बेहद धीमी होने के कारण मामला अधर में लटका हुआ है। इस साल हालात ऐसे हैं कि यदि रेलवे दबाव बनाए तो पहुंच मार्ग का निर्माण अक्टूबर तक पूरा हो सकता है। 

करीब एक लाख रुपए से ज्यादा की होगी बचत
इस रेलवे फाटक के बंद होने से रेलवे को करीब एक लाख रुपए से अधिक की प्रति महीने बचत होगी। फाटक पर 24 घंटे में 3 कर्मचारियों की ड्यूटी रहती थी। इसके अतिरिक्त मेंटेनेंस पर खर्चा होता था। फाटक के बंद होने से इस पर होने वाला खर्च बचेगा। 3 कर्मचारियों का उपयोग दूसरे कार्य के लिए होगा। रेल की गति में इजाफा होगा।

जाम की समस्या से मुक्ति
आरओबी से ट्रैफिक शुरू होने पर फाटक पर लगने वाले समय और जाम से वाहनों को निजात मिल गई। वर्तमान में तीन रनिंग ट्रैक पर 24 घंटे के दौरान 175 से 180 के बीच रेल गाड़ियां निकलती हैं। इससे गेट को बार-बार बंद करना खोलना पड़ता था। इस कारण वाहन चालकों को भी गेट खोलने के लिए आधा घंटे से 1 घंटे तक का इंतजार करना पड़ता है। 
बंद कर दिया गया है गेट
14 जुलाई से आरओबी ट्रैफिक से शुरू हो गया है। गेट क्रमांक 288 को स्थाई तौर पर बंद कर दिया गया है। इसकी सूचना प्रशासन और पुलिस को लिखित रूप से दे दी गई है। 
एसके पाल, स्टेशन प्रबंधक गंजबासौदा।

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