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  • The Campaign Started In Opposition To The British Government In Every Village, So Arrested And Kept In Jail For 8 Months, The Movement Failed, But The Result Was Favorable

भारत छोड़ो आंदोलन के आज 78 साल पूरे:गांव-गांव में ब्रिटिश सरकार के विरोध में शुरू किया था प्रचार, इसलिए गिरफ्तार हुए और 8 माह जेल में रहे, आंदोलन असफल रहा, लेकिन परिणाम सुखदायी रहा

विदिशा2 महीने पहले
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देश को ब्रिटिश हुकूमत से आजाद कराने के लिए न जाने कितने ही आंदोलन हुए और तमाम क्रांतिकारी शहीद हुए। आजादी की लड़ाई में भारत छोड़ो आंदोलन की भी अहम भूमिका रही। महात्मा गांधी के आह्वान पर नौ अगस्त 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत हुई थी। देश भर में हुए इस आंदोलन में विदिशा की भी महत्त्वपूर्ण भूमिका रही थी।
इस आंदोलन में शामिल विदिशा के कई क्रांतिकारी जेल भी भेजे गए लेकिन ये आंदोलन चलता रहा। वयोवृद्ध 97 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रघुवीर चरण शर्मा बताते हैं कि भारत छोड़ो आंदोलन भले ही सफल न हुआ हो लेकिन इसका दूरगामी परिणाम सुख दाई रहा और इस आंदोलन को देश की आजादी के लिए यह महान प्रयास था।
इन लोगों की हुई थी गिरफ्तारी
रघुवीरचरण शर्मा बताते हैं कि भारत छोड़ो आंदोलन में ठाकुर बलवंतसिंह, कमलसिंह, खुशीलाल तिवारी, धन्नालाल गुप्ता, छोटेलाल, बाबू गणेश दुबे, कृष्णानंद मिश्र, रामरतन पहलवान, राजाराम देसाई, कुरवाई के कंछेदीलाल, रामचरण लाल, प्रीतमसिंह, शरद पंडित, अयोध्या प्रसाद शर्मा, असद अली खान आदि कई राजनैतिक कार्यकर्ता अपनी भूमिका निभा रहे थे। विदिशा शहर में इन कार्यकर्ताओं की बैठक होती थी। विदेशी कपड़ों की होली जलाने का सिलसिला चला। रघुवीर चरण शर्मा का कहना है कि पहले हमें गिरफ्तार कर सेंट्रल जेल ग्वालियर में दो महीने रखा गया। इसके बाद 6 महीने
मुंगावली जेल में रखा गया। मुझे 8 महीने बाद रिहा किया गया।
बाबू तखतमल जैन पर्दे के पीछे से सक्रिय रहे: लेखक और इतिहासकार गोविंद देवलिया बताते हैं कि भारत छोड़ो आंदोलन का विदिशा में व्यापक असर रहा। उस वक्त के कद्दावर नेता और बाद में मध्यभारत के मुख्यमंत्री बने बाबू तखतमल जैन सिंधिया स्टेट के मंत्री मंडल में शामिल थे। इसलिए वे पर्दे के पीछे से सक्रिय भूमिका निभाते रहे और उनके पुत्र राजमल जालौरी एवं कांग्रेस के कद्दावर नेता राम सहाय की गिरफ्तारी इस आंदोलन में सक्रिय रहने के कारण हुई। इन दोनों को शिवपुरी जेल में भेजा गया। यहां के क्रांतिकारी चाहते थे सिंधिया स्टेट ब्रिटिश हुकूमत से पूरी तरह संबंध खत्म करे।
इसलिए अगस्त 1942 में विदिशा शहर में भारत छोड़ो आंदोलन के तहत विदेशी कपड़ों की होली जलाने का सिलसिला शुरू हुआ। वहीं गांव-गांव में किसानों को लगान न देने के लिए भड़काया गया। इस वजह से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ठाकुर बलवंतसिंह, रघुवीर चरण शर्मा, कमलसिंह, खुशीलाल तिवारी, धन्नालाल गुप्ता,
छोटेलाल, बाबू गणेश दुबे, कृष्णानंद मिश्र आदि की गिरफ्तारी हुई।

गांव-गांव में लगान न देने के लिए भड़काने पर हुई थी गिरफ्तारी
रघुवीरचरण शर्मा बताते हैं कि भारत छोड़ो आंदोलन की आग विदिशा के गांव-गांव में फैलाने के लिए कई कार्यकर्ताओं ने कमर कस ली थी। सिंधिया स्टेट ब्रिटिश हुकूमत का सहयोग करती थी। क्रांतिकारी चाहते थे कि सिंधिया स्टेट अंग्रेजी हुकूमत से रिश्ते खत्म करे। इसलिए विदिशा जिले के गांव-गांव में किसानों को लगान न देने के लिए भड़काना शुरू कर दिया। कई कार्यकर्ता इस काम में लगे हुए थे। पुलिस को इस बात की जानकारी लगी तो हमें गिरफ्तार कर लिया गया।

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