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  • The First President Of The Country, Who Came To Lay The Foundation Stone Of SATI, Changed The Demand Of The People, Named Loharangi Hill In His Honor Rajendra Giri

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1956 के पहले भेलसा था विदिशा का नाम:एसएटीआई का शिलान्यास करने आए देश के पहले राष्ट्रपति ने लोगाें की मांग पर बदला, उनके सम्मान में लोहांगी पहाड़ी का नाम राजेंद्र गिरि रखा

विदिशा2 महीने पहले
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3 दिसंबर को देश के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद की जयंती है और उनकी कई यादें विदिशा से जुड़ी हुई हैं। 1956 के पहले विदिशा को भेलसा के रूप में ही जाना जाता था। दस्तावेजों में भी भेलसा ही नाम था। तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद 17 सितंबर 1956 विदिशा जिले के दौरे पर आए थे। उन्हें कई कार्यक्रमों में यहां शामिल होना था। इस दिन उन्होंने एसएटीआई पॉलीटेक्निक का शिलान्यास किया और इसके साथ ही राजमल बड़जात्या शिशु जैन मंदिर का उद्घाटन भी किया था। इसके अलावा वे ग्यारसपुर भी गए और प्राचीन उदयगिरि की गुफाएं देखीं। तब विदिशा का नाम भेलसा ही था लेकिन पूर्व में विदिशा नाम भी रहा था। तब शहर के कई लोगों ने उनसे भेलसा का नाम विदिशा करने की मांग की थी। वापस जाने के बाद राष्ट्रपति के प्रयासों से कुछ महीनों में ही भेलसा का नाम विदिशा हो गया।

बाबू तखतमल जैन सीधे तौर पर राष्ट्रपति से संपर्क में थे
इतिहासकर गोविंद देवलिया बताते हैं कि तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद के विदिशा शहर के निवासी और मध्यभारत के मुख्यमंत्री रहे बाबू तखतमल जैन से बहुत अच्छे संबंध थे। इस संपर्क का लाभ विदिशा को मिला। इसलिए तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद विदिशा दौरे पर आए थे और यहां के कई कार्यक्रमों में शामिल हुए थे।

पहाड़ी का नाम राजेंद्र गिरि रखा, लेकिन वह प्रचलन में नहीं आ पाया

गोविंद देवलिया का कहना है कि सितंबर 1956 में जब तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद विदिशा दौरे पर आए थे तब उनके सम्मान में शहर में स्थित लोहांगी पहाड़ी का नाम राजेंद्र गिरि रखा गया है। हालांकि ये नाम ज्यादा प्रचलन में नहीं आ पाया।

सातवीं शताब्दी में विदिशा का नाम भेलसा हुआ
इतिहासकर गोविंद देवलिया बताते हैं कि विदिशा के बारे में वाल्मिकी रामायण में उदाहरण मिलता हैं जो कि यह दर्शाता है कि शत्रुघ्न का बेटा शत्रु घाति विदिशा का प्रतिनिधि हुआ करता था। ब्राह्मण पुराण में भी इस जगह का वर्णन मिलता हैं। जिससे इस जगह का नाम हुआ भद्रावती जो कि यवनों का रहने का स्थान था। प्राचीन ऐतिहासिक शहर बैस नगर जो प्राचीन विदिशा के बारे में बताता है। कुछ शताब्दी पूर्व ईसा पूर्व बैस नगर एक बहुत ही महत्वापूर्ण जगह थी। बैस नगर शहर के समाप्त होने पर पश्चिम कि तरफ, बेतवा नदी के किनारे सातवीं शताब्दी में एक नए शहर का उदय हुआ। जिसका नाम भेलस्वानमिनी हुआ जो कि भिलसा या भेलसा का अपभ्रंश है।

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