तेज पटाखों का असर:शहर में 125 डेसिबल से ज्यादा ध्वनि‎ 2.5 पीएम से अधिक रहा वायु प्रदूषण‎

विदिशा‎25 दिन पहले
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ग्रीन क्रेकर्स बेचने की गाइड लाइन के बाद भी प्रदूषण बढ़ा‎। - Dainik Bhaskar
ग्रीन क्रेकर्स बेचने की गाइड लाइन के बाद भी प्रदूषण बढ़ा‎।
  • 206 दुकानों में बिके 125 करोड़ से ज्यादा के‎ पटाखे, 70 % से ज्यादा का स्टाक खत्म‎

दीवाली की रात तेज पटाखों की‎ धमक से शहर में 125 डेसिबल‎ से ज्यादा ध्वनि प्रदूषण रहा। इसी‎ प्रकार पटाखों से निकलने वाले‎ धुएं के कारण वायु प्रदूषण भी‎ 2.5 पीएम यानी पार्टिकल पर‎ मीटर से ज्यादा रहा।

पीएम 2.5‎ का मतलब ऐसे कण जिनका‎ व्यास 2.5 माइक्रो मीटर या इससे‎ कम हो। इसी तरह पीएम 10 का‎ मतलब ऐसे सूक्ष्म प्रदूषक कणों‎ से है जिनका व्यास 10 माइक्रो‎ मीटर या इससे कम होता है।‎ धूल, गर्दा, कंस्ट्र्क्शन, कूड़ा और‎ पराली जलाने से ये कण ज्यादा‎ पैदा होते हैं। सुप्रीम कोर्ट की ग्रीन‎ पटाखे बेचने की गाइड लाइन के‎ बाद भी ध्वनि और वायु प्रदूषण‎ पर कोई नियंत्रण नहीं रहा।‎

विदिशा के रामलीला मैदान में‎ पटाखों की 206 दुकानें लगाई गई‎ थीं। इनमें से करीब 125 करोड़‎ रुपए का कारोबार हुआ है।‎ रामलीला मैदान में लगी 70‎ फीसदी से ज्यादा दुकानों में‎ दीवाली की रात की पटाखों का‎ स्टाक खत्म हो चुका था। पटाखा‎ विक्रेता‎ विजय अग्रवाल ने बताया‎ कि चूंकि‎ इस बार देवी-देवताओं‎ की फोटो‎ वाले पटाखे नहीं बिके।‎ इस कारण‎ कई रोचक नाम वाले ‎क्रेकर्स मार्केट‎ में बिकने आए थे। ‎इनमें मियां-बीवी‎ की लड़ाई,‎ मेंढ़क, 5 रंगों वाले‎ अनार, 30‎ स्काई शाट वाले पटाखों‎ की खूब ‎डिमांड रही।‎

ग्रीन पटाखों की‎ पहचान के लिए‎ लगा था ट्रेड मार्क‎
रामलीला मैदान में 35‎ सालों से पटाखा की‎ दुकान लगा रहे प्रमुख‎ पटाखा विक्रेता विजय‎ अग्रवाल बताते हैं कि इस‎ बार सुप्रीम कोर्ट की‎ गाइड लाइन के कारण‎ 90 फीसदी तक ग्रीन‎ पटाखे बिके हैं। शेष 10‎ फीसदी जो अमानक‎ पटाखे थे, उनके विक्रय‎ पर रोक लगा दी गई थी।‎

जिन दुकानदारों के पास‎ पिछले साल का स्टाक‎ बचा था, वह भी नहीं‎ बेचा गया। ग्रीन क्रेकर्स‎ की पहचान के लिए‎ पटाखों के पैकेट पर एक‎ ट्रैग मार्का लगाया गया‎ था। इस कारण ये पटाखे‎ पहचाने जा सकते हैं।‎

नॉलेज... ठंड के सीजन में ज्यादा नीचे जमता है धुआं‎
मेडिकल कालेज के डीन डा.सुनील नंदीश्वर बताते हैं कि ठंड के सीजन में‎ धुआं और धूल के कण ज्यादा घनत्व के कारण काफी नीचे रहते हैं। यह‎ स्थिति काफी नुकसानदायक रहती है।इसी प्रकार देखा जाए तो गर्मी के‎ सीजन में वायु प्रदूषण का घनत्व कम रहता है, इसलिए धूल और धुएं के‎ कण ज्यादा ऊंचाई पर रहते हैं। ध्वनि प्रदूषण रात में 35 और दिन में‎ अधिकतम 45 डेसीबल तक मानक स्तर का माना जाता है।‎

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