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  • These are the front line warriors of the district, whose hard work did not result in death of anyone who had been living in the campus of Medical College for 3 months, neither met the wife nor the parents.

डाक्टर्स-डे आज / ये हैं जिले के फ्रंट लाइन योद्धा, जिनकी मेहनत से काेरोना से किसी की मौत नहीं हुई जो 3 माह से मेडिकल कॉलेज के कैंपस में ही रह रहे, न पत्नी से मिले और न माता-पिता से

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  • फ्रंटलाइन वॉरियर्स की जो अपने परिवार को छोड़कर इंसानियत को बचाने में जुटे हैं, मकसद सिर्फ एक जनता की सेवा

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 04:00 AM IST

विदिशा. 1 जुलाई को डाक्टर्स-डे है लेकिन बहुत से डॉक्टर अपने परिवार से दूर हैं। ये डॉक्टर फ्रंटलाइन वर्कर हैं जो परिवार को छोड़कर इंसानियत को कोरोना से बचाने में जुटे हैं। जिनकी मेहनत से जिले में एक भी मौत नहीं हो सकी है। ये कोरोना में डॉक्टर फ्रंट लाइन योद्धा के रूप में सामने आए हैं। विदिशा जिले में कोरोना पॉजीटिव मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में डॉक्टर्स के सामने कई चुनौतियां हैं।
सीएमएचओ डॉ केएस अहिरवार का कहना है कि हमारा एक मात्र लक्ष्य मरीजों की सेवा करना है। पूरी टीम मरीजों की देखभाल में लगी है। कोरोना महामारी से जंग तभी जीती जा सकती है, जब टीम एकजुट होकर काम करेगी। खुद की चिंता किए बगैर मरीजों की सेवा ही लक्ष्य है। मरीजों की सेवा करते वक्त कुछ स्टाफ भी संक्रमित हो गए, फिर भी जनता की सेवा का जज्बा कम नहीं हुआ है।

मरीजों की सेवा करने से मिलता है सुकून
अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल कॉलेज में कोरोना टेस्टिंग टीम में शामिल डॉ संजय किरार पिछले तीन महीने से अपने परिजनों से नहीं मिले। उनकी पत्नी अहमदाबाद में हैं और माता-पिता करैया गांव में है। उनका कहना है कि वे शुरुआत से ही टेस्टिंग टीम में शामिल हैं। इसलिए अप्रैल के शुरुआत में चार दिन की ट्रेनिंग के लिए जबलपुर भी गए। तीन महीने से ज्यादा हो गए लेकिन परिवार के किसी सदस्य नहीं मिले। मेडिकल कॉलेज के कैंपस में ही रह रहें । मरीजों की सेवा से सुखद एहसास होता है और खुशी मिलती है कि जीवन किसी के काम आ रहा है। 
मां के निधन के दूसरे दिन से ही लौटे
जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ संजय खरे की मां का निधन अस्पताल में ही 12 अप्रैल को हो गया। वे मां के अंतिम संस्कार करने के बाद दूसरे दिन से ड्यूटी पर लौट आए। सीनियर अफसरों ने छुट्टी लेने की सलाह दी लेकिन उनका कहना था कि पूरी टीम को अभी मेरी जरूरत है। कोरोना के दौर में मेरा टीम के साथ रहना जरूरी है। वे उम्मीद जताते हैं कि एक न एक दिन वायरस खत्म होगा। कोरोना महामारी से जंग जीती जा सकेगी। बीमारी से घबराने की जरूरत नहीं है। बस, एहतियात बरतकर इसे हरा सकते हैं।
मरीजों की बदतमीजी तक सहना पड़ी
जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ दिनेश शर्मा कोविड 19 अस्पताल प्रबंधन समिति के नोडल आफीसर का काम भी देख रहे हैं। पॉजीटिव मरीज मिलने के बाद वे मरीज को लेने घर जाते थे। इस दौरान मरीज और उनके परिजन नाराज होकर बदतमीजी पर उतर आते थे। उनका कहना है कि मरीजों की नाराजी से कभी भी काम का उत्साह कम नहीं हुआ बल्कि और ज्यादा काम करने की प्रेरणा मिली। परिवार के साथ खुद की भी चिंता रहती है लेकिन पहली प्राथमिकता मरीज हैं।

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